बिजनेस स?टैंडर?ड - नीतिगत संतुलन
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, September 30, 2022 05:22 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

नीतिगत संतुलन

बीएस संपादकीय / नई दिल्ली September 07, 2022

आने वाले दिनों में भी वै​श्विक घटनाक्रम आ​र्थिक नतीजों एवं नीतिगत चयन को प्रभावित करता रहेगा। हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि अगस्त माह में सालाना आधार पर भारत का निर्यात आं​शिक रूप से कम हुआ जबकि क्रमिक आधार पर इसमें 9 फीसदी की गिरावट आई। निर्यात में गिरावट आने की कई वजह हैं और माना जा रहा है कि निकट भविष्य में परिदृश्य चुनौतीपूर्ण बना रहेगा। वै​श्विक अर्थव्यवस्था में तेजी से धीमापन आ रहा है जो मांग को प्रभावित कर रहा है। ईंधन की महंगी कीमतें दुनिया भर में आम परिवारों का बजट बिगाड़ रही हैं और वस्तुओं की मांग में कमी आ रही है। भारतीय निर्यातकों का कहना है कि उन्हें सस्ती वस्तुओं के ऑर्डर मिल रहे हैं। हालांकि निर्यात कमजोर रहा है लेकिन आयात ​स्थिर बना रहा है। इसकी एक वजह यह भी है कि कच्चे तेल की कीमतें काफी ऊंची बनी रही हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार का मौजूदा दौर भी विदेशी वस्तुओं की मांग में इजाफे की वजह बन रहा है। इसके परिणामस्वरूप व्यापार घाटा ऊंचे स्तर पर बना हुआ है।

 

जुलाई के रिकॉर्ड स्तर से कुछ कम होने के बावजूद अगस्त में व्यापार घाटा 28.68 अरब डॉलर के स्तर पर रहा। अ​धिकांश अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि यह ऊंचे स्तर पर बना रहेगा। उन्होंने चालू खाते के घाटे के पूर्वानुमान को संशो​धित किया है और पिछले वर्ष के जीडीपी के 1.2 फीसदी की तुलना में इस वर्ष इसके 3.5 से 4 फीसदी रहने का अनुमान जताया जा रहा है।

 

यद्यपि भारतीय रिजर्व बैंक घाटे की भरपाई करने के लिए आश्वस्त है लेकिन वै​श्विक वित्तीय हालात चुनौतियों में इजाफा कर सकते हैं। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक जहां हाल के महीनों में आक्रामक बिकवाली के बाद भारतीय शेयर बाजारों में लौट आए हैं, वहीं उनकी भागीदारी वै​श्विक हालात के सहारे रहेगी। हाल ही में केंद्रीय बैंकरों के जैकसन होल कॉन्क्लेव में इस बात के संकेत एकदम साफ थे कि केंद्रीय बैंक, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व मुद्रास्फीति पर नियंत्रण करने के लिए मौद्रिक नीति का आक्रामक इस्तेमाल करेगा। बड़े केंद्रीय बैंकों द्वारा दरों में निरंतर इजाफा और मौद्रिक हालात को सख्त बनाने का असर जो​खिम वाली परिसंप​त्तियों मसलन उभरते बाजारों के शेयरों पर भी पड़ेगा। इसके अलावा ऊंची ब्याज दरें वै​श्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेंगी जिससे उसमें धीमापन आएगा। यह बात भी भारत के निर्यात को प्रभावित करेगी। हालांकि धीमी वै​श्विक वृद्धि से जिंस कीमतों में नरमी आ सकती है लेकिन भूराजनीतिक कारकों के कारण ईंधन कीमतों में तेजी का सिलसिला बना रह सकता है। रूस से होने वाली गैस आपूर्ति में निरंतर बाधा भी ईंधन कीमतों में और इजाफे की वजह बन सकती है। चालू खाते के घाटे में ऐसे समय इजाफा हो रहा है जब सरकार का राजकोषीय घाटा बढ़ा हुआ है और मध्यम अव​धि में भी इसके ऊंचा बना रहने की उम्मीद है। हालांकि भारत के पास बचाव उपलब्ध है लेकिन ऊंचा दोहरा घाटा हमेशा वृहद आ​र्थिक ​स्थिरता के लिए खतरा होता है। यह संस्थागत विदेशी निवेशकों के ​लिए चिंता का विषय बन सकता है और आवक को प्रभावित कर सकता है। इस ​स्थिति में चालू खाते के घाटे की भरपाई करना और भी मु​श्किल हो जाएगा। सरकार को कर संग्रह में सुधार का इस्तेमाल अपनी राजकोषीय ​स्थिति में सुधार के लिए करना चाहिए। इस बीच रिजर्व बैंक चालू खाते के घाटे पर ध्यान केंद्रित कर सकता है। रिजर्व बैंक के गवर्नर श​क्तिकांत दास ने हाल ही में एक भाषण में इस बात को रेखांकित किया था कि रुपया अपेक्षाकृत ​स्थिर ​हालत में है। अमेरिकी डॉलर सूचकांक चालू वित्त वर्ष में 11.8 फीसदी बढ़ा है जबकि रुपये में केवल 5.1 फीसदी की गिरावट आई है। रुपया दुनिया की सबसे कम गिरावट वाली मुद्राओं में से एक है। ऐसा व्यापक तौर पर रिजर्व बैंक के आक्रामक हस्तक्षेप की वजह से हुआ।

 

बहरहाल यह बात ध्यान देने लायक है कि यह ​स्थिरता समय के साथ जो​खिम बढ़ा सकती है। अगर रुपये को समायोजित नहीं होने दिया गया तो इसकी मजबूती चालू खाते की ​स्थिति को खराब कर सकती है क्योंकि तब आयात सस्ता होगा और निर्यात गैर प्रतिस्पर्धी हो जाएगा। चूंकि वै​श्विक हालात निकट भविष्य में बदलते नहीं दिखते इसलिए यह अहम है कि मुद्रा को व्यव​स्थित ढंग से समायोजित होने दिया जाए। राजकोषीय और चालू खाते के घाटे में समायोजन से वृहद आ​र्थिक​ ​स्थिरता बढ़ेगी और आ​र्थिक गतिवि​धियों को मदद मिलेगी। इससे निवेशकों का विश्वास भी मजबूत होगा। 
Keyword: निर्यात, अर्थव्यवस्था, शेयर बाजार, निवेश, व्यापार घाटा, रिजर्व बैंक, जीडीपी,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या व्यापार घाटा कम करने के उपाय करे सरकार
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.