बिजनेस स?टैंडर?ड - नई फसल की आवक शुरू होने से कपास में गिरावट
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नई फसल की आवक शुरू होने से कपास में गिरावट

सुशील मिश्र / मुंबई 09 05, 2022

कपास उत्पादक प्रमुख राज्य महाराष्ट्र में कपास की नई फसल की आवक  शुरू होने के साथ ही कीमतों में गिरावट आने लगी है। कपास का रकबा बढ़ने और उत्पादन अधिक होने की वजह से कीमतों में गिरावट आने के आसार है तो दूसरी तरफ बारिश से फसल खराब होने और कपास उत्पादक दूसरे देशों में कमजोर फसल के कारण आने वाली विदेशी मांग इस बार भी कपास किसानों को मालामाल करने के संकेत दे रही है।
 
देश में कपास का उत्पादन बढ़ने के अनुमान के साथ कीमतों में गिरावट शुरू हो गई। सोमवार को एमसीएक्स वायदा अक्टूबर का अनुबंध (कॉटन 29 एमएम) 3.18 फीसदी टूटकर 36,480 रुपये प्रति गांठ हो गया। पिछले एक महीने में कॉटन के भाव करीब 20 फीसदी की गिरावट हो चुकी है। हालांकि हाजिर बाजार में कपास के दाम में खास गिरावट देखने को नहीं मिली। हाजिर बाजार में शंकर-6 कपास 93200 रुपये प्रति कैंडी ( 26152 रुपये प्रति क्विंटल) चल रहे हैं। हाजिर बाजार में भाव अच्छा मिलने के कारण किसान खुश हैं। महाराष्ट्र की मंडि़यों में इस समय कपास 16000 रुपये प्रति क्विंटत तक बिक रहा है जबकि पिछले साल सीजन की शुरुआत में कपास के दाम 14000 रुपये प्रति क्विंटल बोले जा रहे थे।
 
कमोडि़टी विशेषज्ञों का कहना है कि कपास में गिरावट का दौर शुरू हो गया है। एमएमसी कमोडिटी की वंदना भारती कहती है कि देश में रकबा बढ़ने और नई फसल की आवक शुरू होने के कारण कीमतों में गिरावट देखने को मिलेगी। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 2 सितंबर तक देशभर में कपास की बोआई 125.69  लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हो चुकी है,  जो पिछले साल की समान अवधि के 117.68 लाख हेक्टेयर की तुलना में करीब सात फीसदी अधिक है। रकबा बढ़ने की वजह से आने वाले कपास वर्ष (अक्टूबर 2022-सितंबर 2023) में उत्पादन 375 लाख गांठ तक पहुंच सकता है। देश में कपास की खपत करीब 315-320 लाख गांठ रहने का अनुमान है। 
 
दूसरी तरफ वैश्विक स्तर पर कपास की फसल खराब होने के कारण इस साल कीमतों में तेजी रहने की उम्मीद जताई जा रही है। अमेरिकी, चीन और पाकिस्तान में मौसम की मार पड़ने के कारण कपास की फसल को काफी नुकसान हुआ है जिसके कारण लम्बे समय में कॉटन बाजार सकारात्मक रहने वाला है। ओरिगो कमोडिटीज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट राजीव यादव के मुताबिक चीन में लॉकडाउन और अमेरिका में मंदी की घबराहट से कमोडिटी मार्केट में निगेटिव ट्रेंड है। अब कॉटन मार्केट में वैश्विक आपूर्ति में तेज गिरावट और वैश्विक बाजार में संभावित मंदी के आसार है जिसकी वजह से मांग कम हो सकती है। उत्पादन कम होने का अनुमान है जिसके कारण वैश्विक मांग कीमतों को मजबूत करेगी।
सीजन भर एमएसपी से अधिक भाव मिलने के कारण किसान कपास की खेती की तरफ आकर्षित हुए है। केन्द्र सरकार ने 2022-23 के लिए कपास का एमएसपी 6380 रुपये प्रति क्विंटल तय किया। जबकि 2021-22 में कपास का एमएसपी 5727 रुपये प्रति क्विंटल था। एमएसपी में बढोतरी के बावजूद किसान साल भर खुले बाजार में अपनी फसल बेच रहे थे क्योंकि बाजार में एमएसपी से ज्यादा भाव मिल रहा है। जानकारों का मानना है कि घरेलू बाजार में आवक शुरू होने से कीमतों में थोड़ी गिरावट जरूर  होगी लेकिन यह गिरावट ज्यादा दिनों तक नहीं रहने वाली है क्योंकि वैश्विक बाजार से निकलने वाली मांग का रुख  भारत की तरफ रहने वाला है।
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