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एफडी पर भी मिल सकता है 8% रिटर्न

पिछले तीन महीने में रीपो रेट में 140 आधार अंक की बढ़ोतरी हुई है जिससे लोगों का रुझान एफडी पर बढ़ने ल�
अजीत कुमार /  09 04, 2022

पिछले तीन महीने में रीपो रेट में 140 आधार अंक की बढ़ोतरी के भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के कदम से लोगों में फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) के प्रति रुझान बढ़ा है। खुदरा महंगाई रिजर्व बैंक के 2 से 6 फीसदी के लक्ष्य से अभी काफी ऊपर है, इसलिए रीपो दर में अभी और इजाफा हो सकता है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने भी ब्याज दर में इजाफे के साफ संकेत दिए हैं।

अगर दरें भविष्य में और बढ़ाई जाती हैं तो एफडी पर ब्याज दर भी बढ़ जाएगी। ऐसा इसलिए भी होने की संभावना है क्योंकि बैंकों की जमा में वृद्धि इस समय कर्ज में वृद्धि के मुकाबले करीब 5 फीसदी कम है यानी बैंकों में जितनी रकम जमा हो रही है, उसके मुकाबले बैंक ज्यादा उधार दे रहे हैं।

आपके लिए यही मौका है, जब एकमुश्त न सही तो किस्तों में एफडी में निवेश की शुरुआत की जा सकती है। दिक्कत यह है कि बैंक एफडी पर ब्याज की दर इस समय मंहगाई दर की तुलना में कम है। जुलाई में खुदरा महंगाई 6.71 फीसदी रही थी मगर ज्यादातर बड़े निजी और सरकारी बैंक एफडी पर 5 से 6 फीसदी ब्याज ही दे रहे हैं। इसलिए जो लोग स्थिर आय की योजना में निवेश करना और अधिक वास्तविक प्रतिफल चाहते हैं, उनके लिए कॉरपोरेट यानी कंपनी एफडी बेहतर हैं।

कॉरपोरेट एफडी के जरिये कंपनियां अपनी जरूरतों के लिए पूंजी जुटाने के मकसद से आम लोगों को निश्चित अवधि के लिए निवेश की पेशकश करती हैं। बदले में कंपनियां जमाकर्ता/निवेशक को तयशुदा और स्थिर ब्याज देती हैं। कंपनियों को बैंक या अन्य वित्तीय संस्थानों से कर्ज लेने पर ज्यादा ब्याज (15 से 20 फीसदी) देना पड़ता है। ऐसे में उनके लिए आम जनता के बीच सीधे जाकर कॉरपोरेट एफडी के जरिये पैसा जुटाना फायदेमंद है।

सामान्यतया कॉरपोरेट एफडी पर बैंक एफडी के मुकाबले 2 से 3 फीसदी तक ज्यादा ब्याज मिलता है। फिलहाल कॉरपोरेट एफडी पर 9 फीसदी तक का ब्याज मिल रहा है, जबकि बैंक एफडी पर यह  5  से  6  फीसदी है। यही वजह है कि कॉरपोरेट एफडी बैंक एफडी के मुकाबले निवेशकों को ज्यादा आकर्षित करती है। लेकिन आम निवेशक को कॉरपोरेट एफडी में निवेश करते समय प्रतिफल के साथ ही जोखिम (रिस्क) और तरलता पर भी ध्यान देना चाहिए। तो देखते हैं कि कॉरपोरेट एफडी में निवेश से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

कंपनी एफडी की रेटिंग
सिर्फ ज्यादा ब्याज देखकर किसी कंपनी की एफडी में निवेश का फैसला न करें। ब्याज के साथ कंपनी एफडी की क्रेडिट रेटिंग की पड़ताल करना बहुत जरूरी है। क्रिसिल, इक्रा और केयर रेटिंग्स कुछ रेटिंग एजेंसियां हैं, जिनसे मिली रेटिंग को बहुत तवज्जो दी जाती है। सबसे बेहतर रेटिंग 'एएए' होती है। इसलिए एएए रेटिंग वाली कंपनियों के पास एफडी कराना सबसे अच्छा रहता है। बेहतर रेटिंग का मतलब यह होता है कि कंपनी भुगतान में यानी ग्राहकों को मूलधन और ब्याज चुकाने में चूक शायद ही करे।

पिछला प्रदर्शन
रेटिंग जरूरी तो है मगर यही निवेश की एकमात्र कसौटी नहीं होनी चाहिए। कंपनी का रिकॉर्ड यानी उसका पिछला प्रदर्शन और उसकी मौजूदा वित्तीय स्थिति को भी ठीक से जांचना जरूरी होता है। ज्यादा कर्ज ले चुकी कंपनियों की एफडी में निवेश से बचें। यह भी जरूर देखें कि ब्याज और मूलधन चुकाने में कंपनी का अब तक का रिकॉर्ड कैसा रहा है। संभव हो तो कंपनी के ब्याज कवरेज रेश्यो, डेट टू सेल्स रेश्यो और असेट टर्नओवर रेश्यो को समझने की कोशिश भी की जानी चाहिए। कंपनी के प्रवर्तकों के बारे में भी तहकीकात कर लें।

न्यूनतम सुरक्षा गारंटी
कॉरपोरेट एफडी किसी भी सूरत में बैंक एफडी जितनी सुरक्षित नहीं हैं। बैंक एफडी में प्रत्येक ग्राहक को अधिकतम 5 लाख रुपये तक की जमा राशि पर रिजर्व बैंक से सुरक्षा गारंटी (बीमा) मिलती है मगर कंपनी दिवालियो होने पर निवेशक की एफडी (कॉरपोरेट एफडी) की रकम (मूलधन और ब्याज) डूबने का पूरा खतरा रहता है। हालांकि कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत कॉरपोरेट एफडी पर भी 20,000 रुपये तक के बीमा का प्रावधान किया गया है, लेकिन कंपनियां इस पर कम ही अमल करती हैं।
 
कराधान

कर के मामले में भी बैंक एफडी भारी पड़ जाती हैं। कॉरपोरेट एफडी में आपको सालाना 5,000 रुपये से अधिक के ब्याज पर टीडीएस कटवाना पड़ता है मगर बैंक एफडी में 40,000 रुपये (वरिष्ठ नागरिकों के लिए 50,000 रुपये) से अधिक ब्याज मिलने पर ही टीडीएस देना होगा। टीडीएस से बचना है तो आप कंपनी के पास 15जी या 15एच फॉर्म जमा कर सकते हैं, लेकिन इमें भी कुछ जरूरी शर्तें आपको पूरी करनी होंगी। मसलन अगर सभी प्रकार की कटौती और छूट के बाद जमाकर्ता की कुल आय पर शून्य कर लगता हो और एफडी पर मिलने वाला सालाना ब्याज कर में छूट की बेसिक सीमा यानी 2.5 लाख रुपये से कम हो तभी 15जी फॉर्म जमा किया जा सकता है। 
 
अगर आपकी उम्र 60 साल या इससे अधिक है तो आपको 15एच फार्म जमा करना होगा। यहां आपकी कुल आय पर कर देनदारी शून्य होने की ही शर्त लागू होती है यानी ब्याज की राशि कर में छूट की बेसिक सीमा से ज्यादा होने पर भी वरिष्ठ नागरिक 15एच फॉर्म जमा कर सकते हैं। बैंक में पांच साल के लिए एफडी की जाए तो आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत 1.5 लाख रुपये की रकम पर कर छूट का प्रावधान है मगर कॉरपोरेट एफडी में इस तरह का कोई कर लाभ नहीं मिलता। मगर बैंक एफडी की तरह कॉरपोरेट एफडी पर भी ओवरड्राफ्ट यानी कर्ज लेने की सुविधा मिलती है।
 
तो क्या करें?

जोखिम कम करने के लिए एवरेजिंग और बेहतर तरलता के लैडरिंग की रणनीति अपनाकर आप निवेश की कुल रकम को अलग-अलग कंपनियों की अलग-अलग परिपक्वता अवधि वाली एफडी में लगा सकते हैं। लैडरिंग के साथ निवेश करने पर आपको नियमित अंतराल पर तरलता यानी नकदी की सुविधा मिलेगी। अगर आप कम रेटिंग वाली कंपनियों की एफडी में निवेश चाहते हैं तो कम अवधि की एफडी चुनें। अच्छी रेटिंग वाली कॉरपोरेट एफडी में भी ज्यादा से ज्यादा तीन साल के लिए निवेश करना ही समझदारी होगी।
Keyword: Corporate FD, Fixed deposits, रीपो रेट, आरबीआई, एफडी,
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