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बीमा पॉलिसी होशियारी से चुनें, इलाज के बोझ से बचें

संजय कुमार सिंह /  August 31, 2022

विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत में भारतके क्षेत्र में महंगाई यानी इलाज पर होने वाला खर्च हर साल लगभग 15 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। महंगाई के हिसाब से अपनी पॉलिसी की बीमा राशि लगातार बढ़ाते रहना ग्राहकों के लिए मुश्किल होता है। लेकिन अगर पॉलिसी चतुराई के साथ चुनी जाएं तो आप कुछ हद तक इस समस्या से निपट सकते हैं।

रिचार्ज का फायदा

इसे रीस्टोर, रीइंस्टेटमेंट या रीलोड भी कहा जाता है और बीमा कंपनियां कई साल से यह सुविधा दे रही हैं मगर अब इसमें काफी इजाफा हो गया है। आम तौर पर अगर आपने 5 लाख रुपये का बीमा लिया है तो आप उतनी ही राशि का दावा बीमा कंपनी से कर सकते हैं। एक बार आपने कंपनी से पूरी रकम ले ली तो साल के बाकी महीनों में आप और आपके परिवार को स्वास्थ्य बीमा की सुरक्षा के बगैर ही रहना पड़ता है। लेकिन जिन पॉलिसी में रिचार्ज की सुविधा होती है उनमें पॉलिसी में बीमा राशि एक बार फिर जुड़ जाती है ताकि बचे हुए महीनों में परिवार बीमा की सुविधा से वंचित न हो जाए। 

परिवार को बाकी बचे सालों के लिए बीमा  कवरेज का फायदा मिलता रहता है। 

पहले इस सुविधा के साथ कई बंदिशें थीं। मसलन बीमा राशि का रिचार्ज साल में केवल एक बार होता था। साथ ही दूसरी बार दावा उसी बीमारी के लिए नहीं होना चाहिए, जिसके लिए पहला दावा किया गया था। पॉलिसीबाजार डॉट कॉम में स्वास्थ्य एवं यात्रा बीमा प्रमुख अमित छाबड़ा कहते हैं, 'अब बीमा कंपनियां कई बार रिचार्ज की सुविधा दे रही हैं और अक्सर एक ही बीमारी के लिए बार-बार दावे तथा रिचार्ज की सहूलियत मिल गई है।' 

अगर ग्राहक इस सुविधा के साथ पॉलिसी लेना चाहते हैं तो उन्हें पहले ही यह तय करना होगा कि पॉलिसी किन स्थितियों में रिचार्ज होगी। मान लीजिए, किसी ग्राहक ने करीब 5 लाख रुपये का बीमा कराया है। वह पहली बार 3 लाख रुपये का दावा करता है। दूसरा दाना 2 लाख रुपये का होता है और उसके बाद तीसरी बार भी 2 लाख रुपये का दावा कर दिया जाता है। कुछ पॉलिसी में रिचार्ज की सुविधा तीसरा दावा होने पर ही मिलती है। दूसरी ओर कुछ ऐसी पॉलिसी भी हैं, जहां रिचार्ज फौरन हो जाता है। जैसे ही ग्राहक 3 लाख रुपये का दावा करता है वैसे ही बीमा राशि बढ़ाकर वापस 5 लाख रुपये कर दी जाती है।

अब आप सोच रहे होंगे कि इससे फर्क क्या पड़ता है। मान लीजिए कि कोई शख्स 3 लाख रुपये का एक दावा करता है और कुछ समय बाद 2.5 लाख रुपये का दूसरा दावा करता है। यदि रिचार्ज फौरन नहीं हुआ तो दूसरे दावे में उसे केवल 2 लाख रुपये मिलेंगे और 50,000 रुपये अपनी जेब से भरने होंगे। लेकिन रिचार्ज तुरंत हो जाने की सूरत में उसे दावे की पूरी राशि यानी 2.5 लाख रुपये मिल जाएंगे।
सना इंश्योरेंस ब्रोकर्स के स्वास्थ्य बीमा विशेषज्ञ विवेक नारायण कहते हैं, 'कुछ बीमा कंपनियां तुरंत रिचार्ज की सुविधा देती हैं मगर कुछ ऐसा नहीं करतीं। इसीलिए ग्राहक को बीमा कराने से पहले ही यह बात साफ कर लेनी चाहिए।'
पिछले 15-20 वर्षों के आंकड़ों के आधार पर बीमा कंपनियां जानती हैं कि एक ही साल में कई (2 या 3 से ज्यादा) दावों की संभावना बहुत कम होती है। अपनी बीमा पॉलिसी का प्रीमियम भी वे इसी के हिसाब से तय करती हैं। कुछ भी हो, यह फीचर वाकई बहुत फायदेमंद है।
 
पहले दिन से दोगुनी बीमा राशि
आजकल कुछ पॉलिसी जैसे रिलायंस जनरल इंश्योरेंस की हाल में पेश की गई हेल्थ गेन में ग्राहकों को पहले दिन से ही बीमा राशि दोगुनी करने की सुविधा मिलती है। मान लीजिए, कोई ग्राहक 5 लाख रुपये का बीमा लेता है। मगर वह अस्पताल में भर्ती होता है तो उसका 9 लाख रुपये का बिल आता है। उस सूरत में यह पॉलिसी पूरा खर्च उसे देगी।
छाबड़ा बताते हैं कि आम तौर पर बीमा राशि दावा नहीं करने के एवज में मिले बोनस (नो क्लेम बोनस) के कारण समय के साथ बढ़ती जाती है। मगर इस मामले में यह राशि पहले दिन ही दोगुनी हो जाती है। 
रिन्यूबाय के सह-संस्थापक इंद्रनील चटर्जी इसे बहुत काम का बताते हैं, वह कहते हैं, 'रिचार्ज या रीस्टोर की सुविधा अस्पताल में कई बार भर्ती होने पर काम आती है मगर राशि दोगुनी करने की सुविधा तब बहुत फायदेमंद होती है, जब एक ही बार में बीमा राशि से अधिक रकम का बिल आ जाता है।'
 
इकट्ठे बोनस की गारंटी
अगर बीमा कराने वाला व्यक्ति कोई दावा नहीं  करता है तो उसे नो क्लेम बोनस मिलता है। यह बोनस आम तौर पर बीमा राशि का कुछ प्रतिशत होता है। उदाहरण के लिए मान लीजिए, कोई पॉलिसी 20 फीसदी इकट्ठे बोनस की गारंटी देती है। यदि ग्राहक इस साल कोई दावा नहीं करता है तो अगले साल उसकी 5 लाख रुपये की मूल बीमा राशि  6 लाख रुपये (उतने ही प्रीमियम में) हो जाती है। 
अब मान लीजिए, ग्राहक दावा करता है। उस सूरत में आम तौर पर उसे कोई बोनस नहीं मिलना चाहिए। मगर गारंटीशुदा बोनस के फीचर में उसकी बीमा राशि दावे के बाद भी बढ़कर 6 लाख रुपये हो जाएगी।
बीमा कराने वाला दावा करता है तो आम तौर पर उसकी बोनस की रकम कम कर दी जाती है या खत्म कर दी जाती है। मगर गारंटीशुदा बोनस की सुविधा में ऐसा नहीं होता। यह बात अलग है कि बीमा कंपनी इस सुविधा का खर्च भी प्रीमियम में ही जोड़ लेती हैं। फिर भी यह फायदेमंद फीचर है।
Keyword: भारत, महंगाई, पॉलिसी,
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