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मंदी से उबरने के लिए तमाम तरीके आजमाने में जुटी है सेल
विश्लेषक की राय
कुणाल बोस /  May 20, 2009

सेल के अध्यक्ष सुशील रुंगटा को बहुत ज्यादा प्रोत्साहन नहीं दिया गया। लगभग 5 सालों से लेकर पिछले साल अगस्त तक सेल के बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उन्हें कोई श्रेय नहीं दिया गया।

दूसरी जिंसों की तरह स्टील को भी मंदी का झटका लगा। रुंगटा ने खुद की शिकायत करने के बजाय उन्होंने लागत में कमी लाकर संकट का हल निकालने की कोशिश की। इसके साथ ही उन्होंने समूह के उत्पाद पोर्टफोलियो की पुर्नसंरचना, बाजार के मांग के मुताबिक की।

अब खासतौर पर के विशेष और बेहतर स्टील बनाने पर जोर है। देश की सबसे बड़ी स्टील निर्माता कंपनी सेल के पास 5 एकीकृत संयंत्र हैं। इसके अलावा एलॉय स्टील यूनिट है जिसे खदान परिचालन और ऊर्जा उत्पादन के जरिए मदद मिलती है।

रुंगटा भिलाई के स्टील संयत्र को सेल का हीरा मानते हैं। वहां स्टील की मांग बढ़ाने के लिए बेहतर रणनीति तैयार की जा रही है। भिलाई  प्रदर्शन सूचकांक के मुताबिक शीर्ष स्थान पर कायम है। इस संयत्र की खासतौर पर रेल और विश्व मानकों पर आधारित भारी प्लेट बनाने की क्षमता है।

सेल के मुताबिक भिलाई में वर्ष 2008-09 के दौरान मजदूरी उत्पादन 319 टन प्रति आदमी रहा जो 104 टन सामूहिक उत्पादकता से ज्यादा था। कोक दर की बात करें तो भिलाई का 491.2 किलोग्राम प्रति टन गर्म धातु समूह दर से कहीं ज्यादा बेहतर था।

भिलाई स्टील के प्रबंध निदेशक आर. रामाराजु के मुताबिक, 'दुनिया भर में कोकिंग कोयला की कीमतों में बढ़ोतरी हुई जो पिछले सीजन में 300 डॉलर प्रति टन था। देसी कोयला और सहायक पदार्थो के ज्यादा इस्तेमाल के जरिए हमने आयातित कोयले के हिस्से को पहले के 80 फीसदी के मुकाबले कम करके 75 फीसदी तक किया गया।'

वित्त निदेशक टी. के. गुप्ता का कहना है कि इस तरह के सभी कदम और तकनीकी आर्थिक मानको में सुधार मसलन स्टील निर्माण में कम ऊ र्जा और ज्यादा कोयले का इस्तेमाल ब्लास्ट फरनेस में होने से वर्ष 2008-09 में भिलाई को 205 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 293 करोड़ रुपये की बचत करने में मदद मिली।

वैसे भिलाई को दुनिया के ज्यादा सक्षम मिलों के प्रदर्शन की सूचकांक में लाने के लिए गुंजाइश बनाने की जरूरत है। कई समूहों की मांग और कीमतों में गिरावट आई जिसमें आर्सेलर मित्तल शामिल हैं जिसने संयत्र के उत्पादन में 50 फीसदी से ज्यादा तक की गिरावट आई। इसने ज्यादा लागत वाली मिलों को बंद कर दिया और हजारों कर्मचारियों को छुट्टी दे दी।

हालांकि भिलाई में पिछले साल कच्चे और बिक्री करने लायक स्टील ने नई ऊंचाई की ओर कदम बढ़ाया। वर्ष 2008-09 की अंतिम दो तिमाही में बाजार की हालत इतनी खराब हो गई कि किसी ने भी यह उम्मीद नहीं की थी कि भिलाई को पिछले साल के 5,366 करोड़ रुपये के पीबीटी का प्रबंधन करना होगा।

रामराजु का कहना है कि लेकिन अगर भिलाई अपने मुनाफे के नुकसान को कम क रती है तो विशेष और मूल्यवर्द्धित स्टील के उत्पादन में लगभग 29 फीसदी की वृद्धि के साथ यह 27.9 लाख टन होगा। पिछले 10 महीने पहले कीमतों में जिस तरह का उछाल देखा गया है उससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्टील एक संवेदनशील जिंस है।

लेकिन भिलाई ने रेल और प्लेट्स जैसे उत्पादों के लिए लगातार बढ़ोतरी की है और जहां प्रतियोगियो का भी ज्यादा दबाव नहीं है वहां कीमतों में भी ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं है। यहां मुद्दा यह है कि रेलवे से जिन उत्पादों की मांग ज्यादा है उस जरूरत को पूरा करना है, मसलन लंबी रेल और बेहतर प्लेट की मांग को। भिलाई ने उत्पादों की डिलिवरी भी की है।

इसके अलावा इसने प्लेट को कस्टमाइज करने और पवनचक्की बनाने में सफलता पाई है। यह आयात का एक विकल्प बनकर उभरा है। बीएसपी मर्चेंट और वॉयर रॉड मिल हाल ही में जंगरहित और भूकंपरोधी टीएमटी रेबार और वॉयर रॉड को पेश किया है। इन उत्पादों की मांग सिस्मिक जोन में निर्माण के लिए होगी। इसमें कोई संदेह नहीं है कि बीएसपी ने खुद को कई तरह से अलग रखा है।

लेकिन एक वास्तिविकता बाकी है कि 50 साल पुराना संयंत्र अब आधुनिकीकरण की मांग करता है। इसकी वजह यह है कि इसे कच्चे स्टील निर्माण की क्षमता को वर्ष 2012 तक 39.2 लाख टन के मुकाबले 70 लाख टन करना है जिसके लिए लगभग 12,000 करोड़ रु पये का निवेश करना होगा।

रुंगटा का कहना है कि इस निवेश से भिलाई में स्टील निर्माण का काम लगातार चलेगा। नया स्टील मेल्टिंग शॉप बनाया जा रहा है। इसके साथ ही एसएमएस-1 से लैस सोवियत रुस के पुराने ज्यादा ऊ र्जा वाले फरनेस की जगह यह ले सकता है। मुमकिन यह भी है कि ऐसे फरनेस को रिम स्टील बनाने के लिए रखा जाए।

Keyword: SAIl is using lots of tactics for recovering from recession,
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