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ग्रामीण क्षेत्र की उपभोक्ता धारणाओं में दबाव

महेश व्यास / नई दिल्ली 08 25, 2022

अगस्त महीने में उपभोक्ताओं की धारणा में थोड़ी कमजोरी दिखी। कई महीनों की मंदी के बाद जुलाई 2022 में उपभोक्ता धारणा में 6.7 फीसदी की अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। लेकिन जुलाई के अंतिम सप्ताह में और फिर अगस्त के पहले सप्ताह में इन धारणाओं को झटका लगा। उपभोक्ता धारणाओं को सबसे ज्यादा निराशा देश के ग्रामीण हिस्से से हुई। संभवतः इसकी मुख्य वजह दक्षिण पश्चिम मॉनसून का रुझान है।

जून में बारिश में काफी अनियमितता थी और पूरे सीजन भर यह रुझान जारी रहा। अगस्त के अंत तक, वर्षा की मात्रा पर्याप्त थी लेकिन इसका भौगोलिक वितरण समान न होने के कारण इस खरीफ फसल को लेकर चिंताजनक स्थिति बन गई है। इस साल 17 अगस्त तक कुल वर्षा सामान्य से 9.5 प्रतिशत अधिक थी। लेकिन उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और बंगाल में बारिश में 36 फीसदी से अधिक की कमी आई है। यह गंगा क्षेत्र काफी हद तक कृषि प्रधान है और यहां की खेती काफी हद तक बारिश पर ही निर्भर है। 17 अगस्त तक, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सीजन और खरीफ बुआई सीजन का आधे से अधिक समय खत्म हो गया था। ऐसे में खरीफ फसल में सुधार की गुंजाइश दूर की कौड़ी लगती है।

कम बारिश और अच्छी खरीफ फसल की कम होती संभावनाओं ने अगस्त महीने की कमजोर धारणा में अपना योगदान दिया है। जुलाई में इसमें सुधार के बाद अगस्त में उपभोक्ता धारणा कमजोर होती नजर आ रही है। उपभोक्ता धारणा सूचकांक (आईसीएस) इस साल जुलाई में 73.1 (सितंबर-दिसंबर 2015 में इसका आधार 100) के स्तर पर था। 21 अगस्त तक यह कम होकर 70.7 के स्तर पर आ गया। जुलाई महीने में उपभोक्ता धारणा सूचकांक के स्तर से यह 3.2 प्रतिशत कम है। हम 30 दिनों के बढ़ते औसत (30-डीएमए) वाले उपभोक्ता धारणा सूचकांक का इस्तेमाल कर इस कमी का जायजा लिया जाता है। 30-डीएमए महीने के अंत से पहले 10 दिनों में, एक महीने या हफ्ते के दौरान उपभोक्ता धारणा सूचकांक के अग्रिम तार्किक संकेत देता है। मुमकिन है कि अगस्त के आखिरी कुछ दिनों में उपभोक्ता धारणा सूचकांक में महीने दर महीने की वृद्धि में और कमी न दिखे क्योंकि जुलाई के आखिरी हफ्ते में तेज गिरावट देखने को मिली थी। लेकिन, यह केवल संख्यात्मक आधार पर जायजा लेने जैसा होगा। उपभोक्ता धारणा सूचकांक को अगले 10 दिनों में सुधार करने की आवश्यकता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह अगस्त के दौरान इसमें कमी न दर्ज हो। अगर इसमें पर्याप्त रूप से तेजी नहीं दर्ज की जाती है तब अगस्त महीना पहला ऐसा महीना साबित होगा जब उपभोक्ता धारणा में गिरावट दर्ज की जाएगी।

अगस्त महीने में उपभोक्ता धारणा सूचकांक में कमजोरी का एकमात्र कारण बारिश, कृषि और देश का ग्रामीण क्षेत्र ही नहीं हैं। 21 अगस्त को देश के ग्रामीण क्षेत्र के लिए 30-डीएमए आईसीएस इस साल जुलाई महीने के स्तर से 3.4 प्रतिशत कम था। वहीं देश के शहरी क्षेत्र में 30-डीएमए आईसीएस जुलाई महीने के स्तर से 1.7 प्रतिशत नीचे था।

अगस्त महीने में अब तक ग्रामीण और शहरी उपभोक्ता धारणाओं में कमी देखी गई है हालांकि इसमें थोड़ा अंतर है। दोनों ही क्षेत्रों में भविष्य को लेकर उम्मीदें अच्छी नहीं दिखती हैं। 21 अगस्त तक ग्रामीण क्षेत्रों का उपभोक्ता प्रत्याशा सूचकांक (आईसीई) जुलाई महीने की तुलना में 2.1 प्रतिशत कम था। वहीं शहरी भारत के लिए आईसीई इसकी तुलना में 2.8 प्रतिशत कम था।

ऐसा 2022 में पहली बार हुआ जब शहरी उपभोक्ता प्रत्याशा सूचकांक में एक महीने में कमी आई। जनवरी और जुलाई 2022 के बीच, शहरी आईसीई औसतन 4 प्रतिशत प्रति माह की दर से बढ़ा है। जून में सबसे कम वृद्धि 1.7 प्रतिशत रही। इसी वजह से 2.8 प्रतिशत की संभावित गिरावट उम्मीदों के काफी विपरीत है। 25 जुलाई के करीब शहरी क्षेत्रों की उम्मीदों में कमी आनी शुरू हो गई थी। एक वर्ष के बाद परिवार की अपेक्षित आमदनी, अगले 12 महीनों में वित्तीय और व्यावसायिक स्थितियों का प्रदर्शन और अगले पांच वर्षों में वित्तीय और व्यावसायिक स्थितियों का प्रदर्शन जैसी तीन स्थितियों में बदलता हुआ रुझान दिखा है।

25 जुलाई से 22 अगस्त के बीच लंबी अवधि को लेकर शहरी क्षेत्रों के लोगों की उम्मीदें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। जिन परिवारों का मानना है कि अगले पांच वर्षों में देश की वित्तीय और कारोबारी हालात में सुधार होगा, उनका अनुपात 11.7 प्रतिशत से घटकर 8.8 प्रतिशत हो गया। वहीं, जिन परिवारों का मानना है कि इस अवधि के दौरान हालात बिगड़ेंगे, उनकी तादाद 27.8 प्रतिशत से बढ़कर 30.1 प्रतिशत हो गई है। हालांकि एक साल की अवधि के लिए इस पैमाने पर अधिक उम्मीदें दिखती हैं। लेकिन, अब भी उम्मीदों के स्तर में गिरावट दिख रही है। जो लोग मानते हैं कि हालात में सुधार होगा, वैसे लोगों की तादाद 15.2 प्रतिशत से कम होकर 12.4 प्रतिशत हो गई है और जो लोग मानते हैं कि हालात और खराब होंगे उनकी तादाद 32.2 प्रतिशत से बढ़कर 33.5 प्रतिशत हो गई है।

शहरी परिवारों में यह नकारात्मकता एक साल में अपनी आमदनी को लेकर की गई उम्मीदों में भी देखी जा रही है। जो लोग मानते हैं कि उनकी आमदनी बढ़ेगी, उनकी तादाद 25 जुलाई से 22 अगस्त के बीच 14.3 प्रतिशत से कम होकर 12.7 प्रतिशत हो गई और जो लोग आमदनी कम होने की उम्मीद करते हैं, उनकी तादाद 29 प्रतिशत से बढ़कर 29.9 प्रतिशत हो गई।

देश के ग्रामीण क्षेत्रों में आईसीई में कम गिरावट देखी गई है, जबकि इसके वर्तमान आर्थिक स्थितियों के सूचकांक (आईसीसी) में बड़ी गिरावट दिख रही है। 21 अगस्त तक ग्रामीण आईसीसी जुलाई महीने के अपने स्तर से 5.4 प्रतिशत कम थी। संभवत: किसानों को इस साल खरीफ फसल के खराब होने की आशंका से झटका लग रहा है।

महामारी के दौर में कृषि क्षेत्र ही तारणहार रहा है। इसने अच्छा प्रदर्शन किया है और इस क्षेत्र में गैर-कृषि क्षेत्रों के अतिरिक्त श्रमिकों को भी काम मिला। हालांकि वर्ष 2022 कुछ अलग हो सकता है।

Keyword: मंदी, उपभोक्ता, बारिश, खरीफ फसल, सूचकांक, आमदनी,
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