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बैंकों में जमा धन कितना सुरक्षित

बैंक एफडी निवेश के सबसे सुरक्षित विकल्पों में से एक है
अजीत कुमार /  08 22, 2022

रीपो रेट में लगातार हो रही बढ़ोतरी के मद्देनजर बैंकों के बीच भी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) पर ब्याज दरों को बढ़ाने की होड़ सी लग गई है। इस बात की पूरी संभावना है कि बैंक आने वाले दिनों में जमा दरों को और बढ़ाएं। ऐसे में लोगों का फिक्स्ड डिपॉजिट की तरफ फिर से आकर्षित होना स्वाभाविक है। बैंक एफडी निवेश के सबसे सुरक्षित विकल्पों में से भी एक है। लेकिन पिछले दिनों कई बैंकों में आए संकट के मद्देनजर खाताधारकों के बीच बैंकों में जमा धनराशि की सुरक्षा को लेकर थोड़ा डर भी है। इसलिए एफडी खुलवाने से पहले डिपॉजिट इंश्योरेंस स्कीम के बारे में जान लेना जरूरी है जिसके तहत  बैंकों में जमा धन की सुरक्षा गारंटी को लेकर प्रावधान किए गए हैं।

क्या है डिपॉजिट इंश्योरेंस स्कीम?

डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन एक्ट 1961 की धारा 16 (1) के तहत प्रत्येक जमाकर्ता,  जो बैंक में पैसे जमा करता है, उसे उसके अधिकतम  5 लाख रुपये तक की जमा राशि पर बीमा कवर मिलता है। यह कवर आरबीआई की सहायक डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (डीआईसीजीसी) द्वारा दिया जाता है। इसका मतलब यह है कि अगर किसी वजह से कोई बैंक डूब जाए या दिवालिया हो जाए अथवा बैंक का लाइसेंस रद्द हो जाए तो उस स्थिति में प्रत्येक जमाकर्ता को उस बैंक में जमा राशि या 5 लाख रुपये में से जो भी कम होगा, उसका भुगतान हाल में भुगतान किया जाएगा। 

उदाहरण के लिए अगर ‘ए’ के बैंक में दो लाख रुपये जमा थे और ‘बी’ के 7 सात लाख रुपये तो बैंक के बंद होने की सूरत में ‘ए’को उस बीमा की वजह से दो लाख रुपये मिल जाएंगे, जबकि ‘बी’ को पांच लाख रुपये मिलेंगे। 4 फरवरी 2020 से पहले जमा राशि पर एक लाख रुपये का ही इंश्योरेंस कवर था। लेकिन केंद्र सरकार द्वारा बजट 2020 में बैंक में जमा धनराशि पर बीमा कवर को बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है।

किसे मिलता है इंश्योरेंस कवर?

सभी कमर्शियल व को-ऑपरेटिव बैंक इस स्कीम में शामिल हैं। इनमें 12 पब्लिक सेक्टर बैंक, 21 प्राइवेट बैंक, 45 फॉरेन बैंक, 12 स्मॉल फाइनैंस बैंक, 6 पेमेंट बैंक, 43 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, 2 लोकल एरिया बैंक,  33 स्टेट कोऑपरेटिव बैंक, 352 डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक और 1,510 अर्बन कोऑपरेटिव बैंक शामिल हैं।

किन खातों पर बीमा कवर?

सेविंग, करेंट, रेकरिंग और फिक्स्ड खातों में जमा धनराशि पर बीमा कवर प्रदान किया जाता है। दूसरे देश की सरकार की तरफ से जमा, केंद्र व राज्य सरकार द्वारा जमा राशि, अंतर बैंकिंग जमा वगैरह पर बीमा कवर का प्रावधान नहीं है।

किस राशि पर बीमा कवर?

जमाकर्ता को जो अधिकतम 5 लाख रुपये का बीमा कवर मिलता है, उसमें मूलधन के साथ-साथ इस पर मिलने वाला ब्याज भी शामिल है। मान लीजिए किसी जमाकर्ता का किसी बैंक में कुल 6 लाख रुपये जमा है, जिसमें 4.50 लाख रु. मूलधन है, जबकि बाकी 1.50 लाख रु. ब्याज के है। बैंक के डूबने की स्थिति में जमाकर्ता को अधिकतम कुल 5 लाख रुपये का भुगतान किया जाएगा।

जमा राशि अलग शाखाओं में हो 

अगर किसी एक बैंक की अलग-अलग शाखाओं में आपकी धनराशि जमा है तो सभी शाखाओं में जमा धनराशि को जोड़ दिया जाएगा और अधिकतम 5 लाख रुपये की जमा राशि पर ही बीमा कवर का फायदा मिलेगा। मान लीजिए किसी जमाकर्ता का एक बैंक की तीन शाखाओं में कुल 7 लाख रुपये जमा हैं तो उस बैंक के डूबने की स्थिति में जमाकर्ता को कुल 5 लाख रुपये का ही भुगतान किया जाएगा। इसी तरह अगर आपके किसी बैंक में सेविंग या करंट अकाउंट में 4 लाख रुपये है और इसी बैंक में 3 लाख रुपये की एफडी है तो ऐसी स्थिति में भी कुल 5 लाख रुपये का ही बीमा कवर मिलेगा। लेकिन यदि एक बैंक की एक ही या अलग-अलग शाखाओं में अलग-अलग तरह के  कैपेसिटी का खाता है तो अलग-अलग कैपेसिटी वाले खाते में जमा धनराशि पर अलग-अलग बीमा कवर का फायदा मिलेगा। मान लीजिए किसी जमाकर्ता का किसी एक बैंक में एक इंडिविजुअल अकाउंट हैं और उसी बैंक में पत्नी के साथ ज्वाइंट अकाउंट। नाबालिग बेटे के अभिभावक के तौर पर भी एक अकाउंट है तो इस स्थिति में तीनों अकाउंट का कैपेसिटी/ओनरशिप अलग-अलग माना जाएगा और तीनों अकाउंट पर अलग-अलग बीमा 

कवर मिलेगा।

एक से ज्यादा ज्वाइंट अकाउंट 

अगर कोई जमाकर्ता का एक बैंक में एक से ज्यादा  ज्वाइंट अकाउंट है और सभी ज्वाइंट अकाउंट में अगर वह जमाकर्ता एक तरह का होल्डर है यानी वह या तो पहला अकाउंट होल्डर है या दूसरा अकांउट होल्डर है या ........ तो सभी ज्वाइंट अकाउंट पर जमा धनराशि को जोड दिया जाएगा। मतलब अलग अलग बीमा कवर नहीं मिलेगा। लेकिन अगर अलग अलग ज्वाइंट अकाउंट में जमाकर्ता का नाम एक आर्डर में नहीं है, मसलन अगर एक ज्वाइंट अकाउंट में वह पहला अकाउंट होल्डर है, दूसरे में दूसरा और तीसरे में तीसरा ...... या अलग अलग लोगों के साथ ज्वाइंट अकाउंट हो,  तो अलग अलग ज्वाइंट अकाउंट में जमा धनराशि पर अलग अलग बीमा कवर मिलेगा।

जमा राशि अलग-अलग बैंकों में 

अगर आपकी धनराशि अलग-अलग बैंक में जमा है तो प्रत्येक बैंक के लिए बीमा कवर की अधिकतम सीमा 5 लाख रुपये होगी। मान लीजिए अगर ‘ए’ बैंक में आपके 6 लाख रुपये जमा है और ‘बी’ बैंक में 7 लाख रुपये। अगर दोनों बैंक डूब जाए तो आपको दोनों बैंकों में डूबी हुई राशि पर बीमा के रूप में 5-5 लाख रुपये यानी कुल 10 लाख रुपये का भुगतान मिलेगा।

प्रीमियम का भुगतान

जमा राशि पर बीमा कवर के लिए प्रीमियम का भुगतान बैंक द्वारा डीआईसीजीसी को किया जाता है। यह प्रत्येक बैंक द्वारा प्रत्येक बैंक खाते के लिए करना अनिवार्य है।

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