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ग्रामीण बैंकों के लिए भी बने ईज

भारतीय बैंक संघ से सरकार ने कार्यशालाएं कराने के लिए कहा ताकि इसकी तैयारी पर चर्चा हो
निकुंज ओहरी / नई दिल्ली August 10, 2022

केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए बने ईएएसई(ईज) की तर्ज पर इंडियन बैंक एसोसिएशन से क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के लिए व्यवहार्यता योजना बनाने को कहा है। 

एक अधिकारी ने कहा कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए व्यवहार्यता योजना की तैयारी पर चर्चा के लिए आईबीए से कार्यशालाओं का आयोजन कराने को कहा गया है। पिछले सप्ताह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आरआरबी के प्रमुखों की बैठक में कहा गया था कि वे अपना कामकाज बढ़ाने और पहुंच बढ़ाने की योजना का खाका और उसे लागू करने की समयसारिणी पेश करें। इस तरह का खाका आरआरबी में परिचालन और प्रशासन संबंधी सुधारों की केंद्र की योजना के लिए अहम है। 

इसके लिए 43 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की व्यवहार्यता की योजना को अंतिम रूप देने के लिए हिस्सेदारों की एक बैठक का आयोजन किया जाएगा। इस दिशा में केंद्र ने आईबीए को शामिल किया है, क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के सुधार के लिए एनहांस्ड एक्सेस ऐंड सर्विस एक्सीलेंस (ईएएसई) योजना पर वह पहले से काम कर रहा है। बैंकों के लॉबी समूह को कहा गया है कि वह राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के साथ परामर्श कर आरआरबी के लिए व्यवहार्यता योजना बनाए। नाबार्ड ग्रामीण बैंकों का प्रायोजक है। 

ईएएसई सभी सरकारी बैंकों के लिए एक सामान्य सुधार एजेंडा है, जिसे आईबीए ने तैयार किया है। ईएएसई सुधार एजेंडा वित्त वर्ष 2019 में शुरू किया गया और इस समय पीएसबी के पांचवें संस्करण या ईएएसई-5 पर काम चल रहा है, जिसका ध्यान सामान्य सुधार के साथ बैंक विशेष के लिए खाके पर ध्यान है।

केंद्र के लिए पुनर्गठन और आरआरबी को व्यावहारिक बनाना प्राथमिकता में शामिल रहा है। वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने एक विशेषज्ञों की समिति गठित की थी, जिसे आरआरबी को मध्यावधि व दीर्घावधि के हिसाब से व्यावहारिक बनाने को लेकर सिफारिशें करनी थीं। समिति ने आरआरबी के परिचालन संबंधी और प्रशासनिक सुधारों की सिफारिश की है, जो क्रेडिट विस्तार, व्यापार विविधीकरण, एनपीए में कमी, लागत को तर्कसंगत बनाने, प्रौद्योगिकी अपनाने, कॉर्पोरेट प्रशासन में सुधार के मामले में परिचालन संबंधी उपलब्धियों पर आधारित होगा। 

वित्त वर्ष 19 और वित्त वर्ष 20 में लगातार दो साल तक घाटा दिखाने के बाद आरआरबी का वित्त वर्ष 21 में समेकित शुद्ध मुनाफा 1,682 करोड़ रुपये रहा है। इन 43 आरआरबी में से वित्त वर्ष 21 में 30 ने शुद्ध मुनाफा दिखाया है। बहरहाल 43 में से 17 आरआरबी का 31 मार्च, 2021 को संचयी नुकसान 8,264 करोड़ रुपये रहा है। परिचालन के हिसाब से मजबूत आरआरबी को केंद्र सरकार स्टॉक एक्सचेंजों से जोड़ने पर विचार कर रही है। इस कदम को नियामकीय पूंजी हासिल करने के अतिरिक्त स्रोत मुहैया कराने के रूप में देखा जा रहा है। केंद्र सरकार ने प्रायोजक बैंकों से कहा है कि वे उन आरआरबी को चिह्नित करें, जिनको एक्सचेंज में सूचीबद्ध किया जा सकता है। 

नियम के मुताबिक जिन बैंकों का न्यूनतम नेटवर्थ 300 करोड़ रुपये और उनका 3 साल से  न्यूनतम कैपिटल टु रिस्क वेटेड ऐसेट रेशियो (सीआरएआर) 9 प्रतिशत है, वे सूचीबद्ध हो सकते हैं। अन्य मानकों के अलावा क्षेत्रीय बैंकों के लिए यह भी जरूरी है कि 5 साल में 3 साल तक उनका कर के पूर्व परिचालन मुनाफा 15 करोड़ रुपये रहा हो, रिटर्न ऑन इक्विटी (आरओई) 10 प्रतिशत और रिटर्न ऑन असेट (आरओए) पिछले 5  में से 3 वर्षों में 0.5 प्रतिशत रहा हो, बैंक रिजर्व बैंक के त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) के ढांचे के तहत न आता हो। 

आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) की पूरी प्रक्रिया के दौरान प्रायोजक बैंकों को आरआरबी को संभालने का काम सौंपा गया है। प्रायोजक बैंकों की आरआरबी में करीब 35 प्रतिशत हिस्सेदारी होती है, जबकि केंद्र व राज्य सरकारों की हिस्सेदारी क्रमशः 50 प्रतिशत और 15 प्रतिशत होती है।

Keyword: BANKING, SBI, PNB, RBI, RURAL BANK,
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