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प्याज की गिरती कीमतों से परेशान किसान शुरू करेंगे आंदोलन

सुशील मिश्र / मुंबई 08 05, 2022

भारी बारिश के बावजूद इस साल प्याज के भाव में मजबूती नहीं आ रही है। उल्टे पिछले कई महीनों से प्याज के दाम लगातार गिर रहे हैं । उचित दाम न मिलने से परेशान प्याज उत्पादक सड़कों पर उतरने की तैयारी में है। महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक किसान 16 अगस्त से आंदोलन शुरू करने वाले हैं। किसानों द्वारा इस दौरान राज्य की प्याज मंडियों में किसी तरह का कारोबार नहीं होने दिया जाएगा।

बारिश के सीजन में आपूर्ति बाधित होने या फिर बारिश के कारण प्याज सड़ने की वजह से कीमतें बढ़ना शुरू हो जाती है। लेकिन इस बार प्याज की कीमतें बढ़ने की जगह लगातार कम हो रही है। नवी मुंबई एपीएमसी में प्याज का औसत भाव 1300 रुपये चल रहा है। थोडी कम गुणवत्ता वाली प्याज एक हजार रुपये के नीचे भी मिल रही है। प्याज सस्ता होने से ग्राहक तो खुश हैं लेकिन किसान और कारोबारियों के चेहरे बारिश में भी मुरझाएं हुए हैं।

कृषि उत्पादों के मूल्यों और आवक की जानकारी देने वाले सरकारी पोर्टल एगमार्कनेट से प्राप्त आंकड़़ों के मुताबिक चालू महीने में महाराष्ट्र में प्याज की औसत कीमत 1099 रुपये और देश में औसत कीमत 1454 रुपये प्रति क्विंटल है। पिछले महीने जुलाई में महाराष्ट्र में 1142 रुपये और देश में 1706 रुपये प्रति क्विंटल प्याज बिक रही थी । जबकि पिछले साल जुलाई 2021 में महाराष्ट्र में प्याज का औसत दाम 1577 रुपये और देश में 2092 रुपये चल रहा था । इस साल किसान पूरे सीजन प्याज के सही दाम के लिए तरसते रहे, उन्हें लग रहा था कि बरसात के समय कीमतें बढ़ेगी लेकिन दाम न बढ़ने और सरकारी तैयारियों के कारण आने वाले महीनों में भी कीमतों में सुधार की गुंजाइश न देखते हुए महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक किसान 16 अगस्त से आंदोलन शुरू करेगें। महाराष्ट्र प्याज उत्पादक संगठन के नेताओं ने कहा है कि आंदोलन के दौरान किसी भी किसान और व्यापारी को प्याज मंडी तक लाने नहीं दिया जाएगा।

महाराष्ट्र प्याज उत्पादक संगठन के संस्थापक अध्यक्ष भारत दिघोले ने कहा कि आजादी के 75 साल बाद भी प्याज के दाम को लेकर सरकार कोई नीति नहीं बना सकी है। जिसकी वजह से हर साल लाखों किसान, व्यापारियों और बिचौलियों की चक्कियों में पिस रहे हैं। सरकार प्याज उत्पादकों की ओर ध्यान नहीं दे रही है। इसी के चलते किसान परेशान और आक्रोशित हैं।


दाम और आयात निर्यात की स्पष्ट नीति की मांग
 
प्याज किसान लम्बे समय से इसे एमएसपी के दायरे में लाने की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब कीमतें गिरती है तो सरकार चुप रहती है और जैसे ही कीमतें बढनी शुरू होती है सरकार एक्शन में आ जाती है यानी दोनों तरफ से किसानों के खिलाफ ही काम होता है। मंडी में एक हजार रुपये से कम का भाव मिल रहा है, भाड़ा और मंड़ी खर्च व दूसरे खर्च काटने के बाद किसान के हाथ में तीन चार रुपये प्रति किलो आ रहा है जबकि उत्पादन लागत इससे कहीं ज्यादा है। किसान प्याज के दाम कम से कम 25 से 30 रुपये चाहते हैं। किसानों का कहना है कि प्याज के दाम और आयात-निर्यात की एक स्पष्ट नीति तय होनी चाहिए। देश में सबसे ज्यादा प्याज का उत्पादन महाराष्ट्र में होता है । नासिक जिले के लासलगांव में एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी है जहां से देश के हर राज्य में प्याज की आपूर्ति बड़े पैमाने पर की जाती है।
 
दाम बढ़ने के नहीं है आसार
 
देश में प्याज की बढ़ती कीमतें हर बार बड़ा मुद्दा बन जाती हैं, इस बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस वर्ष 2022-23 में किसानों से 2.5 लाख टन प्याज की खरीद की है और बफर स्टॉक बना लिया है। सरकार द्वारा तैयार किया गया प्याज का बफर स्टॉक अगस्त से सितंबर के बीच में बाजार में लाया जाएगा । इस समय त्यो हारी सीजन होने की वजह से बाजार में प्याज की मांग अधिक रहती है जबकि आवक कमजोर पड़ जाती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 में प्याज का उत्पादन तीन करोड़ 17 लाख टन रहने का अनुमान है जबकि एक साल पहले यह दो करोड़ 66.4 लाख टन था । खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि पिछले रिकॉर्ड को तोड़ते हुए केंद्र ने वर्ष 2022-23 में बफर स्टॉक के लिए 2.50 लाख टन प्याज की खरीद की है। चालू वर्ष में प्याज के बफर स्टॉक का आकार 2021-22 के दौरान बनाए गए 2 लाख टन से 50 हजार टन अधिक है। भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नाफेड) द्वारा महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे प्याज उत्पादक राज्यों में किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से की गई है।
 
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