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फिर हो सकते हैं महंगे खाने के तेल

वैश्विक बाजारों में खाद्य तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट की वजह से देश में खाद्य तेल की कीमतों म�
अजीत कुमार / नई दिल्ली 08 01, 2022

वैश्विक बाजारों में खाने के तेल (खाद्य तेल), खासकर पाम ऑयल, की कीमतों में पिछले दिनों आई भारी गिरावट की वजह से देश में खाद्य तेल की कीमतों में नरमी आनी शुरू हो गई थी। कीमतों में आगे और नरमी को लेकर भी लोग आशान्वित थे। लेकिन पिछले हफ्ते वैश्विक स्तर पर पाम ऑयल और सोयाबीन ऑयल की कीमतों में आये उछाल से इस बात की आशंका बढ गई है कि घरेलू स्तर पर कीमतों में आगे और नरमी की बजाय कीमतों में तेजी भी आ सकती है।

पिछले हफ्ते मलेशिया में क्रूड पाम ऑयल के बेंचमार्क अक्टूबर वायदे में 16 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। जबकि शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड (सीबोट) पर सोया ऑयल के बेंचमार्क दिसंबर वायदे में 13 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई।
 
इससे पहले क्रूड पाम ऑयल की कीमतें 14 जुलाई को अपने एक वर्ष से ज्यादा के निचले स्तर तक चली गई थीं। 14 जुलाई को बुरसा मलेशिया डेरिवेटिव एक्सचेंज पर क्रूड पाम ऑयल का बेंचमार्क सितंबर वायदा 3,544 रिंगिट प्रति टन पर बंद हुआ, जबकि इसी वर्ष 9 मार्च को पाम ऑयल 7,268 रिंगिट प्रति टन की रिकॉर्ड ऊंचाई तक चला गया था। इस तरह से देखें तो पाम ऑयल में गिरावट इस अवधि (9 मार्च-14 जुलाई) के दौरान 51 प्रतिशत से ज्यादा थी।  
 
एक और आंकड़े से इसे समझते हैं। 4 महीने पहले क्रूड पाम ऑयल का देश में लैंडेड प्राइस (ढुलाई और बीमा खर्च मिलाकर) 2,000 डॉलर प्रति टन, सोयाबीन डीगम ऑयल का 1,925 डॉलर प्रति टन और क्रूड सूरजमुखी ऑयल का 2,100 डॉलर प्रति टन था, जबकि 29 जुलाई को घटकर क्रूड पाम ऑयल का  1,170 डॉलर, सोयाबीन डिगम ऑयल का 1,431 डॉलर और क्रूड सूरजमुखी ऑयल का 1,530 डॉलर प्रति टन रह गया।
 
लेकिन 22 जुलाई को खत्म हुए हफ्ते के मुकाबले लैंडेड प्राइस में कमी आई है। 22 जुलाई को क्रूड पाम ऑयल 1,025 डॉलर प्रति टन जबकि सोयाबीन डिगम ऑयल 1,333 डॉलर और क्रूड सूरजमुखी ऑयल 1,550 डॉलर प्रति टन था।
 
ओरिगो ई-मंडी के असिस्टेंट जनरल मैनेजर (रिसर्च) तरुण सत्संगी के अनुसार, पिछले हफ्ते यानी 22 जुलाई को खत्म हफ्ते के मुकाबले लैंडेड प्राइस में बीते हफ्ते कमी आई है। यह कमी पाम ऑयल में ज्यादा है। इसलिए आने वाले कुछ दिनों में घरेलू कीमतों में थोड़ी नरमी और आ सकती है लेकिन अगर पाम ऑयल की वैश्विक कीमत और एक-दो हफ्तों तक मजबूत रहती है तो उसके बाद फिर से घरेलू कीमतों में तेजी आनी शुरू हो सकती है। हालांकि उनका मानना है कि अभी भी पाम ऑयल की वैश्विक कीमतों को लेकर फंडामेंटल्स बहुत सपोर्टिव नहीं है।
 
वैश्विक स्तर पर पाम ऑयल की कीमतों में तेजी की वजह इसकी कीमतों में सोया ऑयल के मुकाबले ज्यादा गिरावट रही है। जानकारों के अनुसार पिछले चार से ज्यादा महीनों में जितनी गिरावट पाम ऑयल में आई उसकी तुलना में सोया ऑयल में गिरावट कम रही। इस वजह से पाम ऑयल की मांग में वैश्विक स्तर पर बढ़ोत्तरी आई है।
 
दोनों तेलों के बीच अगर मौजूदा अंतर इसी तरह से बरकरार रहता है या इसमें और बढ़ोत्तरी होती है तो पाम ऑयल की मांग और बढ़ेगी जबकि सोया ऑयल की घटेगी। इससे पाम ऑयल की कीमतों मे वैश्विक स्तर पर इजाफा होगा। इसके अलावा कोरोना की वजह से उत्पादन में जो व्यवधान आया था वह भी पूरी तरह से बहाल नहीं हो पाया है। साथ ही इंडोनेशिया द्वारा निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए जो प्रयास किए जा रहे हैं उसको भी मार्केट ने कमोबेश पचा लिया है। हालांकि इंडोनेशिया के ये प्रयास जून और जुलाई के शुरुआती दिनों में कीमतों में गिरावट के लिए भी एक हद तक जिम्मेदार थे।  
 
वहीं सोया ऑयल की वैश्विक कीमतों में तेजी की बड़ी वजह प्रतिकूल मौसम की वजह से फसल को लेकर चिंता है।
 
केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया के मुताबिक, खाद्य तेलों की वैश्विक कीमत कच्चे तेल की कीमतों और यूक्रेन संकट के मद्देनजर सूरजमुखी तेल की सप्लाई पर भी निर्भर करेगा।
 
अजय केडिया के अनुसार, घरेलू स्तर पर भारी बारिश से महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में फसलों को हुए नुकसान और आने वाले त्योहारी सीजन को देखते हुए मांग में बढ़ोत्तरी जैसे कुछ फैक्टर्स हैं जो कीमतों को आगे सपोर्ट कर सकते हैं।
 
जहां तक बुआई की बात है, कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 29 जुलाई तक देश में 114.68 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बुआई हुई है, जबकि पिछले सीजन की समान अवधि के दौरान 111.88 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में सोयाबीन की बुआई दर्ज की गई थी।
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