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बिज़नेस स्टैंडर्ड का सर्वेक्षण : 35 से 50 आधार अंक बढ़ेगी रीपो!

भास्कर दत्ता / मुंबई July 31, 2022

ऊंची मुद्रास्फीति पर लगाम कसने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) रीपो दर में 35 से 50 आधार अंक की बढ़ोतरी कर सकती है। समिति 5 अगस्त को इसकी घोषणा कर सकती है। बिज़नेस स्टैंडर्ड के सर्वेक्षण में ज्यादातर प्रतिभागियों ने दरों में बढ़ोतरी की संभावना जताई है।

सर्वेक्षण में शामिल 10 संस्थानों में से 3 ने कहा कि एमपीसी रीपो दर में 50 आधार अंक की बढ़ोतरी कर सकती है जबकि तीन का अनुमान था कि दर में 35 आधार अंक का इजाफा हो सकता है। दो संस्थानों ने 35 से 40 आधार अंक की वृ​द्धि का अनुमान जताया और एक प्रतिभागी ने रीपो दर 40 से 50 आधार अंक बढ़ने की संभावना जताई। एक अन्य संस्थान ने कहा कि एमपीसी इस बार रीपो दर को 25 से 35 आधार अंक बढ़ा सकती है। सर्वेक्षण में शामिल प्रतिभागियों के अनुमान का औसत 43 आधार अंक की बढ़ोतरी की है।

मौद्रिक नीति समिति ने 4 मई के बाद से रीपो दर में कुल 90 आधार अंक का इजाफा कर उसे 4.90 फीसदी कर दिया है। रीपो दर में 25 आधार अंक की वृद्धि होने पर यह लॉकडाउन से पहले मार्च, 2020 के 5.15 फीसदी पर पहुंच जाएगी।

खुदरा मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के 2 से 6 फीसदी के लक्षित दायरे से ऊपर बनी हुई है। ऐसे में अर्थशा​स्त्रियों और बाजार के भागीदारों का कहना है कि रिजर्व बैंक 5 अगस्त को रीपो दर में एक बार और बढ़ोतरी कर सकता है। ताजा आंकड़ों के अनुसार खुदरा मुद्रास्फीति जून में 7.01 फीसदी थी और यह लगातार छठे महीने आरबीआई के सहज दायरे से ऊपर रही। केंद्रीय बैंक ने मध्यम अव​​धि में खुदरा मुद्रास्फीति को 4 फीसदी पर रखने का लक्ष्य रखा है।

फरवरी में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से दुनिया भर में कच्चे तेल और जिंसों के दाम में उछाल से मुद्रास्फीति बढ़ने का जो​खिम बहुत बढ़ गया था। ऐसा इसलिए भी हुआ क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। हालांकि पिछले कुछ महीनों में कच्चे तेल के दाम में तेजी से कमी आई और मार्च में 14 साल के उच्च स्तर 140 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा ब्रेंट क्रूड घटकर 104 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है।

अर्थशा​स्त्री मान रहे हैं कि आरबीआई मुद्रास्फीति के दबाव को कम करने के लिए दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है। एचडीएफसी बैंक की प्रधान अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता ने कहा, ‘मुद्रास्फीति 7 फीसदी से नीचे आने के संकेत हैं लेकिन आरबीआई दरों में बढ़ोरती जारी रखेगा क्योंकि मुद्रास्फीति बढ़ने का जो​खिम बना हुआ है। इस नीतिगत चक्र में रीपो दर 5.75 से 6 फीसदी के करीब हो सकती है।’ गुप्ता का अनुमान है कि आगामी बैठक में रीपो दर 35 से 50 आधार अंक बढ़ाने का निर्णय हो सकता है।    

एमपीसी के सदस्यों और आरबीआई के अ​धिकारियों ने मौजूदा चक्र में दरें बढ़ाए जाने की जरूरत के संकेत भी दिए थे। अमेरिका में भी मुद्रास्फीति के 40 साल के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद फेडरल रिजर्व आक्रामक तरीके से दरें बढ़ा रहा है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक वर्ष 2022 में अब तक ब्याज दरों में 225 आधार अंक की बढ़ोतरी कर चुका है।

फेड के तेजी से दरें बढ़ाने से 2022 में भारतीय शेयर बाजारों से विदेशी पूंजी की बड़ी निकासी हुई है क्योंकि वैश्विक निवेशकों ने दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में प्रतिफल सुधरने की वजह से उसे तरजीह दी है।

इसके नतीजतन डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हुआ है, जो 9 जुलाई को 80.06 प्रति डॉलर  के रिकॉर्ड निचले स्तर तक लुढ़क गया। कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अमेरिका में महंगाई के जोखिम भारत की तुलना में काफी अधिक हैं। लेकिन फेड के दर बढ़ाने से आरबीआई पर भी अपने यहां दरें बढ़ाने और घरेलू ऋण योजनाओं पर प्रतिफल को ज्यादा आकर्षक बनाने का दबाव बढ़ता है।

दर में बढ़ोतरी की मात्रा की बात करें तो आरबीआई फेड की चाल नहीं चलता हुआ नजर नहीं आ रहा है। लेकिन अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि केंद्रीय बैंक सख्त वित्तीय स्थितियों का ठोस संकेत केवल रीपो दर बढ़ाकर नहीं बल्कि अपना तरलता रुख बदलकर देगा।

बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज के अर्थशास्त्रियों ने कहा, ‘हमारा मानना है कि आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति नीतिगत रीपो दर 35 आधार अंक बढ़ाकर इसे 5.25 फीसदी (महामारी से पहले के  स्तर से अधिक) करेगा। इसके अलावा अपना रुख नरम से बदलकर संतुलित सख्ती करेगा।’

उन्होंने लिखा, ‘एक विकल्प यह भी हो सकता है कि एमपीसी जून  के समान 50 आधार अंक की ज्यादा आक्रामक बढ़ोतरी का फैसला ले और एक ज्यादा स्पष्ट संकेत देने में कुछ उभरती अर्थव्यवस्थाओं और और क्षेत्रीय केंद्रीय बैंकों की जमात में शामिल हो जाए।’

ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि आरबीआई वास्तविक जीडीपी की वृद्धि का अपना अनुमान चालू वित्त वर्ष के लिए 7.2 फीसदी बनाए रखेगा।

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