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सर्वोच्च न्यायालय पहुंची एमेजॉन

भाविनी मिश्रा / नई दिल्ली July 30, 2022

डिजिटल कॉमर्स प्लेटफॉर्म एमेजॉन ने एनसीएलएटी के उस आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें ट्रिब्यूनल ने फ्यूचर समूह में एमेजॉन के निवेश को 2019 में निलंबित किए जाने वाले भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के आदेश को सही ठहराया था। अदालत इस मामले पर अगले हफ्ते सुनवाई कर सकती है।

एनसीएलएटी ने 13 जून को सीसीआई के 17 दिसंबर, 2021 के उस आदेश को सही ठहराया था, जिसमें आयोग ने फ्यूचर कूपंस प्राइवेट लिमिटेड (एफसीपीएल) में एमेजॉन की 49 फीसदी हिस्सेदारी को मंजूरी नहीं दी थी।

एफसीपीएल, फ्यूचर रिटेल लिमिटेड की प्रवर्तक है। अपील ट्रिब्यूनल ने एमेजॉन पर 200 करोड़ रुपये जुर्माना लगाने के आयोग के फैसले को भी सही ठहराया था। कंपनी को यह जुर्माना प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 के तहत सूचनाओं का  खुलासा न करने के चलते चुकाने को कहा गया था।

सीसीआई ने एनसीएलएटी से कहा था कि एमेजॉन को प्रस्तावित निवेश के आर्थिक व रणनीतिक मकसद स्पष्ट करने  की दरकार थी। सीसीआई ने कहा था, एमेजॉन ने प्रस्तावित जुड़ाव की गुंजाइश व मकसद पर गलत जानकारी दी थी।

एमेजॉन ने तर्क दिया था कि उसने निवेशयोजना से संबंधित सभी दस्तावेज सीसीआई के पास जमा कराए थे। एनसीएलएटी ने कहा कि एमेजॉन ने फ्यूचर रिटेल लिमिटेड में अपने रणनीतिक हितों को लेकर पूरा खुलासा नहीं किया था।

एमेजॉन ने कहा कि विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए वह भारत में विदेशी निवेशके नियमों में सरलता चाहती है। उसने  कहा था कि वह फ्यूचर समूह का पूरी तरह से अधिग्रहण नहीं करेगी लेकिन उसके कॉरपोरेट ग्राहकों को कार्ड जारी करेगी। हालांकि सीसीआई  ने  कहा कि निवेश की वास्तविक वजह का खुलासा नहीं  किया गया, जो बाजार में वर्चस्व कायम करने  के लिए था। फ्यूचर समूह ने सीसीआई के सामने दलील दी थी कि मुख्य मकसदों आदि के बारे में खुलासा नहीं किया गया था।

एमेजॉन व फ्यूचर कूपंस के बीच 1,400 करोड़ रुपये के निवेश

सौदे पर सीसीआई से मंजूरी मांगी गई थी। एमेजॉन ने कहा था कि 2019 का निवेश सौदा स्पष्ट तौर पर कहता है कि फ्यूचर समूह कुछ निश्चित कंपनियों (रिलायंस समेत) के साथ सौदा नहीं कर सकता। हालांकि 2020 में फ्यूचर समूह ने रिलायंस के साथ सौदा  कर लिया था।

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