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जुलाई में उपभोक्ता धारणा में आया सुधार

श्रम-रोजगार
महेश व्यास /  July 29, 2022

ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जुलाई 2022, उपभोक्ता धारणा में मार्च 2022 से चले आ रहे चिंतित करने वाले रुझान को बदलने वाला है। उपभोक्ता धारणा सूचकांक (आईसीएस) बीते चार महीनों से गति खो रहा है। फरवरी में 5 फीसदी की तेजी के बाद आईसीएस वृद्धि दर मार्च, अप्रैल और मई 2022 में गिरी। मई और जून में तो यह महज एक फीसदी रही। जुलाई में आईसीएस के मजबूत वृद्धि हासिल करने की संभावना है। हालांकि कुछ ऐसी बातें हैं जिनके चलते  इस बदलाव को सतर्कतापूर्वक देखने की आवश्यकता है।

24 जुलाई, 2022 तक आईसीएस का 30 दिन का औसत 73.05 पर पहुंच गया। इसका आधार सितंबर-दिसंबर 2015 के दौरान 100 था। इस स्तर पर यह यह एक माह पहले यानी 24 जून, 2022 की तुलना में 6.7 फीसदी अधिक था। यह जून 2022 के आईसीएस के औसत से भी 6.7 फीसदी अधिक था। यह हाल के किसी भी महीने की तुलना में काफी अधिक है।

आईसीएस का 30 दिन का चलायमान औसत जुलाई के शुरुआती 24 दिनों में तेजी से बढ़ा है। शुरुआती नौ दिनों में वह काफी हद तक सपाट रही। इसके बाद 17 जुलाई तक इसमें तेजी से इजाफा हुआ और 20 जुलाई तक के मामूली ठहराव के बाद यह रोज नयी ऊंचाइयां छूता दिखा। अगर यही रुझान बरकरार रहा तो आईसीएस जुलाई के अंत तक 75 रह सकता है। अगर यह 75 का आंकड़ा पार करता है तो जुलाई 2022 आईसीएस में एक वर्ष में सबसे अधिक तेजी हासिल करने वाला महीना बन जाएगा। एक वर्ष पहले जुलाई 2021 में यह 11.1 फीसदी बढ़ा था लेकिन ऐसा कोविड-19 की दूसरी लहर में आई गिरावट से सुधार के चलते हुआ था। इस बार ऐसी किसी गिरावट से सुधार की बात नहीं थी।

24 जुलाई तक आईसीएस में जो 6.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है वह शहरी और ग्रामीण इलाकों में भी समान रूप से विस्तारित है। 24 जुलाई तक दोनों श्रेणियों का आईसीएस जून से क्रमश: 6.3 प्रतिशत और 6.8 प्रतिशत अधिक था।

ग्रामीण क्षेत्रों में आईसीएस में हुए इजाफे को मॉनसून में सुधार तथा खरीफ फसलों की बुआई के जोर पकड़ने से जोड़कर देखा जा सकता है तो वहीं शहरी क्षेत्रों में इसमें इजाफे को समझ पाना मुश्किल है। ज्यादा से ज्यादा यही कहा जा सकता है कि जून महीने में मुद्रास्फीति में मामूली गिरावट जुलाई में भी बरकरार रही और इससे उपभोक्ता धारणा सुधारने में मदद मिली। जीएसटी दरों तथा ब्याज दरों में हालिया इजाफे से भी शहरी भारत बहुत अधिक परेशान नहीं नजर आ रहा है। 30 सदस्यीय डीएमए रोजगार संकेतक भी कोई सुधार नहीं दर्शाता है। शहरी रोजगार दर में गिरावट ही आ रही है। एक बदलाव यह नजर आ रहा है कि शहरी भारत निकट भविष्य को लेकर ग्रामीण भारत की तुलना में अधिक आशान्वित नजर आ रहा है। हालांकि यह आशावाद भी कुछ हद तक चौकन्नेपन के साथ है।

शहरी भारत के लिए 30 डीएमए आईसीई 24 जुलाई, 2022 तक जून 2022 के औसत की तुलना में 6.8 फीसदी अधिक था। 24 जून, 2022 की तुलना में यह पूरे 10.6 फीसदी अधिक था। आईसीई में तीन घटक शामिल होते हैं। इनमें से अगले 12 महीनों में शहरी परिवारों की वित्तीय और कारोबारी स्थितियों को लेकर नजरिया काफी सुधरा है।  जून 2022 में 11.5 फीसदी परिवार यह मानते थे कि भारत में वित्तीय और कारोबारी स्थितियां अगले 12 महीनों में सुधरेंगी। 24 जुलाई तक यह तादाद बढ़कर 15.1 फीसदी हो गई थी। 24 जून, 2022 में यह आंकड़ा 10.3 फीसदी था। ऐसे में एक महीने में आशावाद में सुधार उल्लेखनीय है।

लेकिन यह आशावाद कुछ सतर्कता के साथ आता है। ज्यादातर शहरी परिवार एक वर्ष की अवधि में कारोबारी संभावनाओं को लेकर आशावादी हो गए हैं लेकिन पांच वर्ष की अवधि को लेकर यह उतना आशावादी परिदृश्य नहीं है। अगले पांच वर्ष में अर्थव्यवस्था के निरंतर वृद्धि हासिल करने पर यकीन रखने वाले परिवारों की तदाद 24 जून, 2022 के 10.1 फीसदी से बढ़कर 24 जुलाई को 11.7 फीसदी हो गयी। जून 2022 का औसत 10.8 फीसदी था। यहां आशावाद में हुआ इजाफा एक वर्ष के परिदृश्य की तुलना में कम है।

शहरी परिवारों को इस बात पर यकीन नहीं है कि अगले 12 महीनों में कारोबारी माहौल में होने वाला सुधार उन्हें आगे चलकर भी लाभ पहुंचाएगा। 24 जून से 24 जुलाई, 2022 की अवधि में में आने वाले बदलाव पर एक नजर डालते हैं। अगले 12 महीनों में कारोबारी माहौल की बेहतरी को लेकर आशावादी रहने वाले शहरी परिवारों की तादाद जहां 10 फीसदी से बढ़कर 15 फीसदी हो गई, वहीं इसी अवधि में अगले 12 महीनों में अपनी आय में सुधार का अनुमान जताने वाले परिवारों की तादाद 12 प्रतिशत से बढ़कर 24 प्रतिशत ही हुई।

ग्रामीण परिवार भी भविष्य की संभावनाओं को लेकर सतर्क नजर आए। 24 जून से 24 जुलाई के बीच ऐसे परिवारों की तादाद बहुत कम बढ़ी जो यह मानते थे कि कारोबारी माहौल अगले एक या पांच वर्ष में सुधरेगा। यह इस तथ्य के बावजूद है कि उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ। ग्रामीण भारत की वर्तमान आर्थिक स्थिति से संबंधित सूचकांक 24 जुलाई तक के एक महीने में 9.1 फीसदी की दर से उछला। लेकिन ग्रामीण भारत के लिए उपभोक्ता अनुमान सूचकांक केवल तीन फीसदी की दर से सुधरा।

जुलाई महीने में उपभोक्ता धारणा में आया सुधार स्वागतयोग्य है लेकिन आम परिवारों ने भविष्य को लेकर जो सतर्कता दिखायी है वह भी उल्लेखनीय है।

(लेखक सीएमआईई के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी हैं)

Keyword: श्रम, रोजगार, उपभोक्ता धारणा सूचकांक, आईसीएस, ग्रामीण क्षेत्र, मॉनसून, खरीफ फसल, मुद्रास्फीति,
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