बिजनेस स्टैंडर्ड - बचत खाते और एफडी के कर नियमों पर न रहे कोई भ्रम
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बचत खाते और एफडी के कर नियमों पर न रहे कोई भ्रम

अजीत कुमार /  07 29, 2022

बिजनेस स्टैंडर्ड बचत खाते और एफडी के कर नियमों पर न रहे कोई भ्रमअक्सर देखा गया है कि लोग बचत खाते और सावधि जमा पर कर के नियमों को लेकर भ्रम में रहते हैं। वित्त वर्ष 2021-22 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख यानी 31 जुलाई भी एकदम करीब है। इसलिए बचत खाते पर आयकर और सावधि जमा पर आयकर के नियमों को जान लेना अच्छा रहेगा।

बचत खाता

आयकर अधिनियम की धारा 80टीटीए के तहत 60 साल से कम उम्र के व्यक्ति के लिए बैंक, सहकारी समिति और डाकघर के बचत खाते पर किसी भी वित्त वर्ष के दौरान 10,000 रुपये तक के ब्याज पर कोई कर नहीं लगता। इसका मतलब है कि ब्याज के रूप में अगर 10,000 रुपये से अधिक कमाई होती है तो वह अधिक हिस्सा ही अन्य स्रोतों से होने वाली आय में शामिल किया जाएगा। उस पर आपको अपने आयकर स्लैब के हिसाब से कर चुकाना होगा।

अगर आपके एक ही बैंक में कई खाते हैं या अलग-अलग बैंक, सहकारी समिति तथा डाकघर में बचत खाते हैं तो उन सभी खातों में मिले ब्याज को जोड़ दिया जाएगा। अगर यह ब्याज 10,000 रुपये से अधिक है तो उस पर कर लगेगा। बचत खाते में मिलने वाले ब्याज पर स्रोत पर कर कटौती यानी टीडीएस का प्रावधान नहीं है।

डाकघर बचत खाता

डाकघर बचत खाते पर मिलने वाले ब्याज पर कर के लिए एक अलग धारा 10 (15)  है। इसमें कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति का डाकघर में बचत खाता है तो एकल खाता होने पर एक वित्त वर्ष में 3,500 रुपये तक ब्याज पर कोई कर नहीं देना पड़ेगा। संयुक्त खाता होने पर 7,000 रुपये तक की ब्याज आय करमुक्त रहेगी।

मगर याद रहे कि अगर आपने डाकघर बचत खाते पर 3,500 रुपये तक के ब्याज के लिए इस धारा के तहत कर छूट ले ली है तो 80टीटीए के तहत आप 6,500 रुपये के ब्याज पर ही कर बचा सकते हैं। हां, अगर आप डाकघर बचत खाते के ब्याज के लिए धारा 10(15) इस्तेमाल नहीं करते हैं तो धारा 80टीटीए के तहत आपको पूरे 10,000 रुपये ब्याज पर कर छूट मिलेगी।

सावधि जमा

60 साल से कम उम्र वाले व्यक्ति को सावधि जमा (एफडी) या आवर्ती जमा (आरडी) पर मिलने वाला ब्याज कर के दायरे में आता है। इसे भी अन्य स्रोतों से होने वाली आय में शामिल किया जाएगा और आपको इस पर अपने आयकर स्लैब के मुताबिक कर चुकाना होगा।

सावधि जमा पर टीडीएस

बैंक और सहकारी समिति की सावधि जमा योजना में मिलने वाले ब्याज पर टीडीएस का प्रावधान है। अगर आपको किसी वित्त वर्ष के दौरान एफडी पर 40,000 रुपये से ज्यादा ब्याज मिल रहा है तो बैंक को टीडीएस काटना ही पड़ेगा। वरिष्ठ नागरिकों के मामले में ब्याज की यह सीमा 50,000 रुपये है। खाते के साथ पैन उपलब्ध करा दिया है तो सावधि जमा पर हो रही ब्याज आय पर 10 फीसदी टीडीएस कटता है। अगर आपने बैंक या सहकारी समिति को पैन नहीं दिया है तो 20 फीसदी की दर से टीडीएस काटा जाएगा। टीडीएस से बचना है तो बैंक में फॉर्म 15जी या 15एच भरकर जमा करना होता है। सावधि जमा पर टीडीएस के मामले में नियम एकदम स्पष्ट है। किसी एक बैंक की सभी शाखाओं में उस व्यक्ति की जो भी सावधि जमा हैं, उन सभी पर मिलने वाले कुल ब्याज को जोड़ लिया जाता है। 40,000 रुपये (वरिष्ठ नागरिकों के लिए 50,000 रुपये) की सालाना ब्याज सीमा का हिसाब उसके बाद लगाया जाता है। डाकघर में चल रही सावधि जमा पर टीडीएस का प्रावधान नहीं है।

एफडी पर 80सी का फायदा

अगर आप एफडी पर 80सी के तहत आयकर छूट चाहते हैं तो एफडी कम से कम 5 साल के लिए होनी चाहिए। 5 साल की एफडी होने पर आप एक वित्त वर्ष में धारा 80सी के तहत अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक की कर रियायत के हकदार होंगे। मगर 5 साल की एफडी पर मिलने वाले ब्याज पर भी किसी तरह की कर छूट नहीं है।

वरिष्ठ नागरिक

आयकर अधिनियम की धारा 80टीटीबी के तहत 60 साल या उससे अधिक उम्र के व्यक्ति यानी वरिष्ठ नागरिक को बैंक, सहकारी समिति, डाकघर बचत खाते और सावधि जमा पर एक वित्त वर्ष में 50,000 रुपये तक का ब्या कर मुक्त रहेगा। इसका मतलब है कि वरिष्ठ नागरिक धारा 80टीटीए का फायदा नहीं ले सकते। 80 टीटीबी के तहत आपके विभिन्न बैंकों, सहकारी समितियों और डाकघर में मौजूद जमा राशियों पर मिलने वाले ब्याज को जोड़ दिया जाएगा।

Keyword: बचत खाते, एफडी, कर नियम, सावधि जमा, आयकर रिटर्न, बैंक, सहकारी समिति, डाकघर, टीडीएस,
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