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गुजरात में मुफ्त बिजली से खजाने पर 8,700 करोड़ रुपये का बोझ

इंदिवजल धस्माना और विनय उमरजी /  July 28, 2022

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में उन नेताओं की आलोचना की जो देश में ‘मुफ्त रेवड़ी’ बांटते हैं। मोदी ने इस तरह के कदम को देश के विकास के लिए हानिकारक बताया। हालांकि, इन टिप्पणियों की वजह से आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को गुजरात के प्रत्येक परिवार को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का वादा करने से नहीं रोका जा सकता। गुजरात में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। हालांकि पंजाब की तुलना में गुजरात में इस तरह की सब्सिडी देना आसान है। पंजाब में इन दिनों ‘आप’ सत्ता में है। इसकी वजह यह है कि गुजरात के सार्वजनिक वित्त की स्थिति उत्तर भारत के अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर है।

वित्त वर्ष 2021-22 (संशोधित अनुमान) में गुजरात सरकार का कर्ज इसके सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 17.8 प्रतिशत था और चालू वित्त वर्ष (बजट अनुमान) में इसके कुछ हद तक कम होने का अनुमान है। इससे यह घटकर 17.8 प्रतिशत रह सकता है। दूसरी ओर, पंजाब सरकार का कर्ज वित्त वर्ष 2022 (संशोधित अनुमान) में 49.46 प्रतिशत था और वित्त वर्ष 2023 (बजट अनुमान) में मामूली रूप से घटकर 48.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। हालांकि, प्रस्तावित सब्सिडी निश्चित रूप से गुजरात का अनुत्पादक खर्च बढ़ाएगी।

गुजरात के ऊर्जा विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस्तेमाल की श्रेणियों में क्रॉस सब्सिडी देने के बाद, राज्य वितरण कंपनी (डिस्कॉम), गुजरात ऊर्जा विकास निगम (जीयूवीएनएल) द्वारा लगभग 1.3 करोड़ उपभोक्ताओं को  300 यूनिट बिजली देने की वार्षिक लागत अनुमानतः सालाना 7,500 करोड़ रुपये प्रति वर्ष होगी और निजी बिजली वितरण कंपनियों के लिए यह इससे अलग 1,000-1,200 करोड़ रुपये रहेगी।

यदि राज्य, निजी बिजली वितरण कंपनियों के लिए भी आवश्यक सब्सिडी का बोझ उठाता है, जैसे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में किया जाता है, तो राजकोष की कुल लागत एक वर्ष में 8,700 करोड़ रुपये तक बढ़ जाएगी। हालांकि ऐसी कोई भी सब्सिडी केवल अगले वित्त वर्ष में दी जा सकती है क्योंकि चुनाव इस कैलेंडर वर्ष के अंत में होने वाले हैं। हम मान सकते हैं कि यह सब्सिडी चालू वित्त वर्ष में दी जाती है। ऊर्जा और पेट्रोरसायनों को दी जाने वाली सब्सिडी वित्त वर्ष 2019 के बाद से कुल सब्सिडी की 40 प्रतिशत से अधिक है। वित्त वर्ष 2023 में इसके घटकर 42.66 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान की 48.61 प्रतिशत थी।

 ऊर्जा और पेट्रोरसायनों को दी जाने वाली सब्सिडी वित्त वर्ष 2023 में घटकर 9,446.86 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है जबकि वित्त वर्ष 2022 के संशोधित अनुमान में यह 10,834.86 करोड़ रुपये थी। दरअसल, इस अवधि के दौरान कुल सब्सिडी के भी 22,323.37 करोड़ रुपये से घटकर 22,144.85 करोड़ रुपये रह सकती है। अगर वित्त वर्ष 2023 में इस सब्सिडी के आंकड़े में 8,700 करोड़ रुपये जोड़े जाते हैं, तो अकेले ऊर्जा और पेट्रोरसायन को दी जाने वाली सब्सिडी बढ़कर 18,146.86 करोड़ रुपये हो जाएगी। ऐसे में कुल सब्सिडी बिल बढ़कर 31,023.37 करोड़ रुपये हो जाएगा। इसका मतलब है कि ऊर्जा और पेट्रोरसायन को दी जाने वाली सब्सिडी की हिस्सेदारी कुल सब्सिडी में 58.49 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी।

यह मानते हुए कि राज्य का कुल खर्च चालू वित्त वर्ष के  लगभग 2.4 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर बना हुआ है जैसा कि बजट अनुमान में बताया गया है। वहीं राजस्व और पूंजीगत खर्च में बदलाव होगा। राज्य का राजस्व खर्च 1.81 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 1.90 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा, जबकि पूंजीगत खर्च 35,898 करोड़ रुपये से घटकर 27,198 करोड़ रुपये

रह जाएगा।  इसका मतलब यह है कि पूंजीगत व्यय में छह प्रतिशत से अधिक की गिरावट की संभावना है। हालांकि पूंजीगत खर्च में पिछले वर्ष के 29,023 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान के मुकाबले चालू वित्त वर्ष में 24 प्रतिशत की वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। स्कूल भवनों, अस्पतालों, सड़कों और पुलों आदि के निर्माण जैसे क्षेत्रों में पूंजीगत खर्च लगता है। ऐसे में, इस तरह की सब्सिडी के लिए राज्य के राजस्व को कम से कम 8,700 करोड़ रुपये के स्तर तक बढ़ाने या अन्य मदों में राजस्व खर्च में कमी लाने  की आवश्यकता होगी। इसके अलावा, चालू वित्त वर्ष में राज्य को केवल तीन महीने के लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) मुआवजा मिलेगा जब तक कि जीएसटी परिषद द्वारा इसे बढ़ाने का फैसला नहीं लिया जाता है। वर्ष 2018-22 के दौरान, गुजरात ने 2015-16 के आधार वर्ष पर जीएसटी राजस्व में गारंटी वाली सालाना 14 प्रतिशत वृद्धि हासिल करने के लिए जीएसटी मुआवजा अनुदान पर निर्भरता जताई। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के विश्लेषण के अनुसार वर्ष 2021-22 में, गुजरात को जीएसटी मुआवजा अनुदान और ऋण के रूप में 19,627 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है जो अपने कर राजस्व का लगभग 20 प्रतिशत है। रिपोर्ट के अनुसार जून 2022 के बाद, गुजरात में राजस्व प्राप्तियों के स्तर में गिरावट देखी जा सकती है।

कोई यह भी सवाल कर सकता है कि गुजरात को ऐसी योजना की आवश्यकता क्यों है जबकि इसकी प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से काफी आगे है। वित्त वर्ष 2021 में गुजरात का प्रति व्यक्ति जीएसडीपी लगभग 2.42 लाख रुपये था  जबकि राष्ट्रीय औसत लगभग 1.46 लाख रुपये है।

प्रस्तावित योजना दरअसल दिल्ली में आप के नेतृत्व वाली सरकार की पेशकश के समान है, जिसकी वित्त वर्ष 2021 में प्रति व्यक्ति आमदनी, गुजरात की तुलना में 3.91 लाख रुपये अधिक थी। इसके बावजूद सरकार 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली मुहैया कराती है। इसके अलावा 400 यूनिट तक खपत करने वालों को 800 रुपये की मासिक सब्सिडी भी मिलती है।

हालांकि दिल्ली में इसमें थोड़ा बदलाव हुआ है। अगस्त महीने से ही उपभोक्ताओं को मुफ्त सुविधाएं पाने के लिए सब्सिडी का विकल्प चुनना पड़ सकता है। ऐसा नहीं करने पर अक्टूबर से उनकी यह सुविधा बंद हो सकती है।              

Keyword: गुजरात, मुफ्त बिजली, नरेंद्र मोदी, आम आदमी पार्टी, अरविंद केजरीवाल, विधानसभा चुनाव,
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