बिजनेस स्टैंडर्ड - शहरी कृषि पर ध्यान देने की जरूरत
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, August 09, 2022 06:47 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

शहरी कृषि पर ध्यान देने की जरूरत

खेती बाड़ी
सुरिंदर सूद /  July 27, 2022

शहरी कृषि यानी शहरों और उनके बाहरी इलाकों में कृषि उत्पाद उगाने की गतिविधि ने अपनी खूबियों को लेकर ध्यान आकृष्ट नहीं किया है। समान्य रूप से उपभोग होने वाले, लेकिन महंगे कृषि उत्पाद जैसे सब्जियां, फल, फूल, दूध, अंडे, मशरूम और मछली का शहरी और अर्द्ध-शहरी इलाकों में आसानी से उत्पादन किया जा सकता है। आवासीय भवनों, यहां तक कि अत्यधिक घनी आबादी वाले शहरों में भी छतों, चबूतरों, बालकनी और दीवारों को पौधे उगाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

छत पर बागवानी करना पहले ही बहुत से शहरियों का पसंदीदा शौक है, जिसमें गमलों या अन्य पात्रों में सजावटी, औषधीय और अन्य प्रकार के  पौधे उगाए जाते हैं। लेकिन सीमित जगह में पौधे उगाने के कुछ नए और अनोखे तरीकों ने इस शौक को कृषि कारोबार में बदलने का रास्ता खोल दिया है।

इन पद्धतियों में लंबवत कृषि (पौधों की कतारें लंबवत रूप में लगाना), ग्रीनहाउस कृषि (पॉलिथीन के आवरण में संरक्षित कृषि), एरोपोनिक्स (बिना मिट्टी के कृषि) और हाइड्रोपोनिक्स (पानी के घोल में पौधों का पोषण करना) आदि शामिल हैं। महानगरों में फ्लैटों में रहने वाले लोग भी इन तरीकों के जरिये खुद के उपभोग या बिक्री के लिए कृषि उत्पाद पैदा कर सकते हैं। छोटे दुधारू पशुओं का पालन, मुर्गीपालन, सूअर पालन और मधुमक्खी पालन आदि भी कृषि गतिविधियों में शामिल हैं, जिन्हें आसानी से शहरों या उनके आसपास अपनाया जा सकता है।

बहुत से देशों में शहरी और अर्द्ध-शहरी कृषि की अवधारणा आधुनिक शहरी योजना का अभिन्न हिस्सा बन गई है क्योंकि आर्थिक एवं अन्य लाभों के अलावा इसका पर्यावरण पर अच्छा असर होता है।

आम तौर पर शहरों में 10 फीसदी जमीन हरित क्षेत्र विकसित करने के लिए रखने का नियम अपनाया जाता है, जिसमें से कुछ का इस्तेमाल सब्जियां और फल उगाने में किया जा सकता है। शहरी नगर निकाय और सामुदायिक संगठन भी सरकारी और निजी भूमि पर कृषि उत्पाद पैदा करने को प्रोत्साहन दे रहे हैं। दुर्भाग्य से भारत में न शहरी और न ही ग्रामीण योजना इस अहम मुद्दे का समाधान करती है, जबकि प्रदूषण से निपटने के लिए इस तरह की कृषि आवश्यक है।

पेड़, झाड़ी या अन्य पौधों के रूप में शहरों के आसपास हरित क्षेत्र बढ़ाना वातावरण से कार्बन को अवशोषित करने और शहरों में कुल कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए अति आवश्यक है। इसके अलावा घरों के बाहर, बगीचों में और सड़क के किनारे सजावटी बेलबूटे और पेड़ शहरों की सुंदरता बढ़ाते हैं। संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) खाद्य और पोषण सुरक्षा बढ़ाने के लिए अपने विभिन्न कार्यक्रमों के तहत शहरी और अर्द्ध-शहरी कृषि को बढ़ावा दे रहा है। यह वैश्विक संस्था संयुक्त उपक्रमों को बढ़ावा दे रही है। इन संयुक्त उपक्रमों में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां, नागरिक समाज, शिक्षा जगत और निजी उद्यमी शामिल हैं। भारत को व्यवस्थित शहरी कृषि में पिछड़ा माना जा सकता है। हालांकि लोग परंपरागत रूप से व्यक्तिगत स्तर पर अपनी छतों या किचन गार्डन में उपयोगी पौधे उगा रहे हैं। संगठित स्तर पर शहरी कृषि को प्रोत्साहित करने की दिशा में गंभीर प्रयास 2010 के दशक के प्रारंभ में बागवानी पर योजना आयोग के कार्यदल की सिफारिश पर किया गया, जो 12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-17) तैयार करने के लिए बनाया गया था। समूह ने स्थानीय जरूरतें पूरी करने और सबसे अहम पर्यावरण सेवाओं तथा स्वास्थ्य के लिए शहरों के आसपास फल, सब्जियां और अन्य फसलें उपजाने की जरूरत पर बल दिया था। इसके बाद 2011-12 में बड़े शहरों के आसपास सब्जियों और फलों के उत्पादन की खातिर शहरी संकुल स्थापित करने के लिए एक केंद्रीय योजना शुरू की गई। इसके दोहरे उद्देश्य थे- उपभोक्ताओं को पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना और रोजगार एवं आय के लिए नए अवसर सृजित करना।

हाल में बड़े शहरों के बाहरी इलाकों में खेती को प्रोत्साहन मिला है। इसका श्रेय फसल सिंचाई और अन्य उद्देश्यों के लिए अपशिष्ट जल के शद्धिकरण और पुनर्उपयोग को लेकर बढ़ती जागरूकता को जाता है। अपशिष्ट जल के शुद्धिकरण पर आधारित ऐसे उपक्रम बहुत से बड़े, मझोले और छोटे शहरों में शुरू हुए हैं। बहुत से महानगरों के शहरी निकायों ने बाहरी इलाकों में रिसाइकल पानी का इस्तेमाल कर सब्जियां और अन्य फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहन देना शुरू कर दिया है।

नदियों के किनारों पर स्थित ज्यादातर शहर परंपरागत रूप से नदियों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में मॉनसून से पहले और बाद में फसल उगाने को मंजूरी दे रहे हैं। ऐसी भूमि में फसल की उत्पादकता आम तौर पर अधिक होती है क्योंकि मिट्टी की उर्वरता बेहतर होती है और यह हर साल गाद से बेहतर हो जाती है। इसके अलावा मिट्टी में प्रचुर नमी की वजह से भी उत्पादकता अधिक होती है।

महानगरों में उपयोगी पौधे उगाने को प्रोत्साहन की उल्लेखनीय पहल हाल में घोषित दिल्ली सरकार की शहरी कृषि परियोजना है। इस परियोजना को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईएआरआई) की मदद से क्रियान्वित किया जा रहा है। इसमें खुद के उपभोग और बिक्री के लिए सब्जियां और फल उपजाने के लिए नागरिकों को प्रशिक्षण देना शामिल है। इसकी घोषणा राष्ट्रीय राजधानी के ‘रोजगार बजट’ के तहत की गई है। इस परियोजना से अगले पांच साल में करीब 25,000 हरित रोजगार पैदा होने का अनुमान है। इसके तहत करीब 400 जागरूकता कार्यशालाएं और 600 उद्यमिता प्रशिक्षण सत्रों के आयोजन की योजना है। ऐसी कृषि में रुचि रखने वाले परिवारों को बड़ी तादाद में बीजों के किट, ऑर्गेनिक खाद और जैव-उर्वरकों का वितरण किया जाएगा। हालांकि परियोजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे कितने बेहतर तरीके से लागू  किया जाता है। लेकिन पहली नजर में ऐसा लगता है कि इसे अन्य शहरों में भी लागू किया जाना चाहिए।

Keyword: शहरी कृषि, सब्जियां, फल, फूल, दूध, अंडे, मशरूम, बागवानी, औषधीय पौधे,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 बिजली वितरण में बदलाव से उपभोक्ताओं को होगा फायदा
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.