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करदाता की मृत्यु होने पर वारिस के लिए उनका टैक्स रिटर्न दाखिल करना जरूरी

मृत करदाता के कानूनी उत्तराधिकारी को उनका टैक्स रिटर्न न दाखिल करना भारी पड सकता है।
बिंदिशा सारंग / नई दिल्ली July 21, 2022

 बेसिक छूट सीमा से अधिक की कुल आय वाले व्यक्ति को आयकर अधिनियम, 1961 के तहत आयकर रिटर्न जरूर  दाखिल   करना चाहिए। यह दायित्व किसी व्यक्ति की मृत्यु के मामले में भी पूरा किया जाना चाहिए।

 
दीपक जैन कहते हैं, “कानूनी उत्तराधिकारी को  मृत व्यक्ति  के  प्रतिनिधि के  तौर पर  ITR दाखिल करना चाहिए। ऐसा करने के लिए, उत्तराधिकारी को पहले ई-फाइलिंग पोर्टल पर एक प्रतिनिधि के रूप में खुद को पंजीकृत करना होगा। दीपक जैन TaxManager.in के मुख्य कार्यकारी हैं।
 
पंजीकरण और अनुमोदन
 
आवेदन के लिए, प्रतिनिधि को कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ मृतक के बारे में कुछ विवरण शामिल करने की आवश्यकता होती है। जैसे मृतक का पैन कार्ड, कानूनी उत्तराधिकारी का पैन कार्ड, अदालत या स्थानीय कर प्राधिकरण से उत्तराधिकार का प्रमाण पत्र और मृतक का पेंशन प्रमाण पत्र।  
 
पहले कानूनी उत्तराधिकारी या वारिस के अनुरोध की समीक्षा की जाती  है  ।  फिर ई-फाइलिंग व्यवस्थापक द्वारा अनुमोदित किया जाता है।
 
आईटीआर फाइल न करने का परिणाम ?
 
यदि कोई आईटीआर फाइल नहीं किया गया है या मृत व्यक्ति की ओर से देय कर का भुगतान नहीं किया गया है, तो दंडात्मक परिणाम हो सकते हैं।
 
सुरेश सुराणा कहते हैं, "अगर वारिस आयकर अधिनियम की धारा 139 में निर्दिष्ट नियत तारीख पर या उससे पहले आईटीआर दाखिल नहीं करता है, तो धारा 270 ए के तहत जुर्माना लगाया जाएगा। ये करदाता द्वारा टाले गए कर का 50 प्रतिशत होता है। उन पर धारा 276CC के तहत मुकदमा भी चलाया जा सकता है। धारा 276CC में आईटीआर फाइल करने में विफल होने पर कारावास का प्रावधान है।" सुरेश सुराणा आरएसएम इंडिया के संस्थापक हैं।
 
मनीत पाल सिंह कहते हैं, 'धारा 234एफ के तहत आईटीआर न भरने पर लेट फीस ब्याज के साथ वसूल की जाएगी। साथ ही, धारा 148 के तहत आय छिपाने के लिए उनपर कार्रवाई भी की जा सकती है।" मनीत पाल सिंह आईपी पसरीचा एंड कंपनी में एक पार्टनर हैं।
 
आयकर अधिनियम की धारा 234F में समय सीमा के बाद आईटीआर दाखिल करने पर जुर्माना कितना होगा बताया गया है। 1,000 रुपये उनके लिए जिनकी आय 5 लाख रुपये तक की है। और 5,000 रुपये उनके लिए जिनकी आय 5 लाख रुपये से अधिक है। करदाता को नोटिस जारी करने से संबंधित जानकारी धारा 148 में मौजूद है।
 
टैक्समैन के उप महाप्रबंधक नवीन वाधवा कहते हैं, “कानूनी प्रतिनिधि की देनदारी उस सीमा तक सीमित है, जिस सीमा तक संपत्ति देयता को पूरा करने में सक्षम है।"
 
हालांकि, मृतक की कर देयता जितनी है उतनी ही रहती है। पर कानूनी प्रतिनिधि व्यक्तिगत रूप से सिर्फ उतने का उत्तरदायी है जितनी सम्पति का उसे मृतक द्वारा अधिकार मिला है।
 
दो आईटीआर दाखिल करने होंगे
 
मृत्यु के वर्ष के लिए दो अलग-अलग आईटीआर दाखिल किए जाने चाहिए। सुराणा कहते हैं, 'मृत व्यक्ति की वित्तीय वर्ष की शुरुआत से लेकर उसकी मृत्यु की तारीख तक की आय के लिए वारिस को एक आईटीआर दाखिल करना होता है। दूसरी आईटीआर को निष्पादक द्वारा मृतक की संपत्ति द्वारा अर्जित आय पर करना होता है। जिसकी अवधि करदाता की मृत्यु के दिन से लेकर कानूनी उत्तराधिकारी को संपत्ति वितरित किए जाने तक होती है। '
 
संपत्ति वितरित हो जाने के बाद, उसपर उत्पन्न आय को कानूनी उत्तराधिकारी या वारिस की आय माना जाता है।
 
इन बातों का ध्यान ज़रूर रखें:
 
आईटीआर फाइल करना कई परिस्थितियों में उपयोगी होता है। जैन कहते हैं, "यदि किसी व्यक्ति की वित्तीय वर्ष के मध्य में मृत्यु हो जाती है, तो कानूनी उत्तराधिकारी द्वारा एक आईटीआर दायर किया जाना चाहिए। यह बीमा दावे के समय आय के प्रमाण के रूप में भी काम आता है।"
 
आईटीआर में किसी भी गलती के लिए वारिस उत्तरदायी है। वाधवा कहते हैं, 'कानूनी उत्तराधिकारी को रिटर्न दाखिल करने से पहले सभी डेटा को एकत्रित करना होगा। यदि मूल रिटर्न में कोई चूक है तो उसे किसी भी समय संशोधित किया जा सकता है। संशोधन रिटर्न को प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति से तीन महीने पहले या मूल्यांकन पूरा होने से पहले, या फिर इनमे से जो भी पहले हो उस समय तक कराया जा सकता है।
 
यहां तक कि एक विलंबित रिटर्न को भी संशोधित किया जा सकता है। आप जितनी बार चाहे संशोधन करा सकते हैं, क्यूंकि इसकी कोई सीमा नहीं है।
 
यदि वारिस की कुल आय, मृत्यु की तारीख से मृतक की आय सहित, 50 लाख रुपये से अधिक है, तो उसको अनुसूची एएल में वित्तीय वर्ष के अंत में उसके द्वारा धारित सभी संपत्तियों और देनदारियों का विवरण प्रदान करना होगा। साथ ही, आईटीआर फाइल करने के बाद मृतक का पैन कार्ड सरेंडर करना होगा।
 
कानूनी उत्तराधिकारी के रूप में पंजीकरण कैसे करें :
 
•आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग ऑन करें: https://bit.ly/3aQJRLS
 
• 'अधिकृत भागीदार' टैब पर, 'प्रतिनिधि के रूप में पंजीकरण करें' विकल्प चुनें
 
• 'लेट्स गेट स्टार्ट' पर क्लिक करें
 
• एक नया संवाद बॉक्स दिखाई देगा: 'निर्धारिती की श्रेणी जिसका आप प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं'; 'मृतक (कानूनी उत्तराधिकारी)' विकल्प चुनें
 
• नाम, पैन, मृत्यु की तारीख, कानूनी उत्तराधिकारी का बैंक खाता विवरण, पंजीकरण का कारण आदि जैसे विवरण दर्ज करें।
 
•आवश्यक दस्तावेज को अपलोड करें
 
• विवरण भरने के बाद, 'आगे बढ़ें', फिर 'अनुरोध सत्यापित करें' और उसके बाद 'अनुरोध सबमिट करें' पर क्लिक करें।
 
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