बिजनेस स्टैंडर्ड - सबसे बड़ी चुनौती
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, August 13, 2022 09:09 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

सबसे बड़ी चुनौती

संपादकीय /  July 13, 2022

संयुक्त राष्ट्र के आ​र्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग की जनसंख्या शाखा के एक अनुमान के मुताबिक हमारा देश अगले वर्ष तक आबादी के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा देश बन जाएगा। इसके मुताबिक चालू वर्ष के दौरान भारत की आबादी चीन की आबादी के बराबर हो जाएगी। इनमें से प्रत्येक देश की जनसंख्या 1.4 अरब से कुछ अ​धिक होगी। बहरहाल ज्यादा महत्त्वपूर्ण बात यह है कि अगर दोनों देशों की प्रजनन दर में ढांचागत बदलाव नहीं आया तो भारत की आबादी का बढ़ना जारी रहेगा जबकि चीन की आबादी कम होने लगेगी। इसी अनुमान के मुताबिक सन 2050 तक भारत की आबादी करीब 1.7 अरब होगी जबकि चीन की 1.3 अरब। हालांकि ये आंकड़े कुछ अन्य वै​श्विक अनुमानों (मसलन द लान्सेट में गत वर्ष प्रका​शित अध्ययन समेत) से मेल नहीं खाते लेकिन इनकी दिशा मेल खाती है।

एक समय था जब बढ़ती आबादी को देश के जनांकीय लाभ के रूप में देखा जाता था। आज यह बात सुनने को नहीं मिलती। इसकी एक वजह यह भी है कि अब यह माना जाने लगा है कि जहां तक वृद्धि लाभांश के प्रतिनि​धित्व की बात है तो भारत ने कामगारों की यह पीढ़ी बहुत खराब तरीके से तैयार की है। शैक्ष​णिक दक्षता भी उपयुक्त स्तर की नहीं हैं। कागज पर देखा जाए तो स्कूली ​शिक्षा हासिल करने वालों की तादाद बढ़ी है। स्कूलों की गुणवत्ता पर ध्यान न दिए जाने से बच्चों में वे बुनियादी कौशल भी नहीं आ पा रहे हैं जो हाई स्कूल के बच्चों में होने चाहिए। दिल्ली के शहरी और आसपास के इलाकों के स्कूलों पर किया गया अध्ययन बताता है कि हाई स्कूल में पढ़ने वाले एक तिहाई बच्चों के पास बुनियादी ग​णितीय और भाषाई कौशल नहीं है। कई बच्चों का स्तर तो प्राथमिक विद्यालय के स्तर का है। इस तरह की श्रम श​क्ति रोजगार बाजार के लिए शायद ही तैयार हो, और यह जनांकीय लाभ का प्रतिनि​धित्व करती नहीं दिखती।

ऐसा कोई श्रम बाजार भी नहीं है जिसके लिए वे तैयारी कर सकें। यह सही है कि जून 2020 से जून 2021 के साव​धिक श्रम श​क्ति सर्वे से पता चलता है कि इस अव​धि में बेरोजगारी पिछले वर्ष से कम रही और इसका स्तर केवल 4.2 प्रतिशत रहा। बहरहाल, जैसा कि हम पहले भी कह चुके हैं, शीर्ष आंकड़े वास्तविक ​स्थिति दर्शाते हैं। यह बड़ी तादाद में स्वरोजगार वाले लोगों, काम की तलाश न करने वाले लोगों और कृ​षि कार्यों की ओर वापस लौट चुके लोगों को छिपा लेता है। श्रमिक आबादी अनुपात 40 फीसदी से कम है। जो रोजगार युवा भारतीय श्रमिकों से जनांकीय लाभांश तैयार कर सकते हैं वे न तो

कृ​षि क्षेत्र में हैं और न ही स्वरोजगार में। जब तक बच्चों की बुनियाद मजबूत नहीं की जाएगी तब तक शायद व्यावसायिक ​​शिक्षा देने के प्रयासों को भी अपे​क्षित सफलता प्राप्त न हो सके।

अगर हम दुनिया में सबसे कम रोजगार अनुपात के साथ दुनिया के सबसे बड़ी आबादी वाले देश बन जाते हैं तो यह एक बहुत बड़ी समस्या होने वाली है और भारत शायद इस आक​स्मिकता को समझने और इससे निपटने में तत्परता दिखाने में पिछड़ रहा है। जब तक हम दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती आबादी की मानव पूंजी नहीं बढ़ाते, भारत को समस्याओं का सामना करना होगा। ये समस्याएं केवल रोजगार और वृद्धि की आ​र्थिक समस्याएं नहीं होंगी ब​ल्कि  हमें सामाजिक समस्याओं का भी सामना करना होगा। हाल ही में सरकारी और सैन्य नौकरियों को लेकर दंगों जैसे जो हालात बने, उन्हें इसकी बानगी माना जा सकता है।

Keyword: चुनौती, संयुक्त राष्ट्र, जनसंख्या, आबादी, चीन, शैक्ष​णिक दक्षता, रोजगार बाजार,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 बिजली वितरण में बदलाव से उपभोक्ताओं को होगा फायदा
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.