बिजनेस स्टैंडर्ड - ... तो पंजाब को होगी हानि
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... तो पंजाब को होगी हानि

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली June 28, 2022

केंद्र व राज्यों के वित्त मंत्रियों की जीएसटी परिषद की बैठक के एक दिन पहले पंजाब ने कहा है कि अगर मुआवजा खत्म कर दिया जाता है तो राज्य को चालू वित्त वर्ष के दौरान 14,000 से 15,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा।

सोमवार को अपने बजट भाषण में राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, ‘जीएसटी मुआवजे की व्यवस्था जून, 2022 में खत्म हो रही है। ऐसे में वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान राज्य के वित्त पर 14,000 करोड़ रुपये से 15,000 करोड़ रुपये का असर पड़ेगा।’ उन्होंने इसे राज्य के लिए अचानक गिरावट की स्थिति करार दिया।

जीएसटी परिषद की दो दिवसीय बैठक मंगलवार को चंडीगढ़ में शुरू होगी।

अगर राजस्व के परिप्रेक्ष्य में देखें तो वित्त वर्ष 23 के दौरान पंजाब में कुल अनुमानित राजस्व प्राप्तियों में 14.5 प्रतिशत की कमी और अधिकतम 15.7 प्रतिशत की कमी आने का अनुमान है।

इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ‘पंजाब की राजस्व प्राप्तियों में जीएसटी मुआवजे का बड़ा हिस्सा बन चुका है क्योंकि जीएसटी के दौर में आने के लिए कृषि से संबंधित कई करों को छोड़ना पड़ा है।’

उन्होंने कहा कि यही वजह है कि राज्य का जीएसटी मुआवजा कुल मिलाकर ज्यादा है और तुलनात्मक रूप से अन्य राज्यों की तुलना में राजस्व में मुआवजे की हिस्सेदारी कहीं ज्यादा बड़ी है।

बहरहाल राज्य के बजट में अनुमानित जीएसटी राजस्व  चालू वित्त वर्ष के दौरान 21 प्रतिशत बढ़कर 20,550 करोड़ रुपये हो गया है, जो इसके पहले के साल के संशोधित अनुमान में 16,200 करोड़ रुपये था।

राज्य के वित्त मंत्री ने कहा, ‘जीएसटी संग्रह में खामियों को दुरुस्त करने की कवायद पहले ही की गई हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान जीएसटी संग्रह में 27 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी,  जिससे राज्य के खजाने में करीब 4,350 करोड़ रुपये अतिरिक्त आएंगे।’

जीएसटी मुआवजा खत्म होने के बाद राजस्व के नुकसान की स्थिति में पहले से योजना न बनाने को लेकर चीमा ने पहले की सरकार की आलोचना की है। राज्य सरकार परिषद की बैठक में अप्रत्यक्ष कर के दौर में मुआवजा बढ़ाए जाने की मांग कर सकता है।

पंजाब के वित्त मंत्री ने कहा, ‘यह कहना गलत नहीं होगा कि जीएसटी मुआवजा व्यवस्था खत्म होने की स्थिति को लेकर पहले से तैयारी न होने के कारण योजना व राजस्व को मजबूत करने के मामले में राज्य को समझौता करने की स्थिति में डाल दिया है।’

जीएसटी कानून में नए अप्रत्यक्ष कर के दौर में आधार वर्ष 2014-15 पर राज्यों के राजस्व में 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गारंटी पूरे 5 साल के लिए दी गई है। इस मकसद के लिए विलासिता की वस्तुओं और हानिकारक वस्तुओं जैसे सिगरेट, एरेटेड ड्रिंक, बड़ी कारों पर लगने वाले अधिकतम 28 प्रतिशत जीएसटी के ऊपर मुआवजा उपकर का प्रावधान किया गया।

केंद्र सरकार ने उपकर की अवधि करीब 4 साल के लिए बढ़ा दी है, जिसका इस्तेमाल राज्यों को मुआवजा देने के लिए ली गई उधारी चुकाने के लिए की जाएगी। कोविड के कारण हुई बंदी के बाद जीएसटी राजस्व घटा था और राज्यों को मुआवजा उपकर देने के लिए राजस्व जुटाना पड़ रहा है। कम संग्रह के कारण राज्यों को मुआवजा देने में देरी हो रही थी, उसके बाद केंद्र ने मई, 2022 तक का सभी बकाया चुका दिया था। पिछले महीने केंद्र ने राज्यों को 86,912 करोड़ रुपये जारी किए थे। इसमें से 5,890 करोड़ रुपये सिर्फ पंजाब को मिले थे।

जीएसटी परिषद के हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि पुदुच्चेरी के बाद पंजाब दूसरा बड़ा राज्य है, जिसके जीएसटी राजस्व में पिछले 2 साल में सबसे ज्यादा कमी आई है। पंजाब में वित्त वर्ष 22 के दौरान 48.8 प्रतिशत राजस्व की कमी आई है, हालांकि यह एक साल पहले आई 57.7 प्रतिशत कमी की तुलना में कम है।

परिषद की बैठक में राज्य जीएसटी मुआवजे की अवधि बढ़ाए जाने की मांग कर सकते हैं। उदाहरण के लिए छत्तीसगढ़ के वाणिज्यिक कर (जीएसटी) मंत्री टीएस सिंहदेव ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा था कि अर्थव्यवस्था अनुमान के मुताबिक नहीं बढ़ रही है, ऐसे में राज्यों के पास मुआवजे की अवधि और 5 साल बढ़ाए जाने की मांग के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

Keyword: पंजाब, जीएसटी परिषद बैठक, मुआवजा, बजट भाषण,
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