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कर रिटर्न दाखिल करने से पहले मिला लें फॉर्म 16 और फॉर्म 26एएस

बिंदिशा सारंग /  June 27, 2022

जब आप आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं तो हरेक बात को बारीकी से जांचना जरूरी होता है। जून के मध्य तक कर्मचारियों को उनके दफ्तरों से फॉर्म 16 मिलने शुरू हो जाते हैं और अब तक ज्यादातर के पास यह कागज आ ही चुका होगा। जब आप आयकर रिटर्न भरने चलते हैं तो पहला काम होता है फॉर्म 26एएस और फॉर्म 16 का मिलान करना। अगर दोनों फॉर्म में दिए गए आंकड़ों में किसी तरह का अंतर दिखता है तो उन्हें ठीक कराना होगा।

मिगलानी वर्मा ऐंड कंपनी के मैनेजिंग पार्टनर प्रत्यूष मिगलानी कहते हैं, 'अगर किसी तरह का फर्क रहा तो आपको आयकर विभाग से नोटिस मिल सकता है।'


फॉर्म 26एएस को समझिए

यह सालाना ब्योरा होता है, जिसमें स्रोत पर काटे गए कर (टीडीएस), स्रोत पर संग्रह किए गए कर (टीसीएस), चुकाए गए अग्रिम कर, स्वत: आकलन के जरिये चुकाए गए कर, चुकाए कर पर मिले रिफंड और करदाता द्वारा किए गए उच्च मूल्य के लेनदेन की पूरी जानकारी होती है।

टैक्समैनेजर डॉट इन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीपक जैन कहते हैं, 'नवीनतम फॉर्म 26एएस में खास वित्तीय लेनदेन, आकलन की लंबित और पूरी हो चुकी कार्यवाही, कर मांग और रिफंड के बारे में भी जानकारी होती है।'

इस फॉर्म में अचल संपत्तियों और म्युचुअल फंड की खरीद और बिक्री, बचत खातों में नकद जमा और निकासी आदि के बारे में भी पूरा विवरण होता है।


जांचें कौन-कौन सी बातें

फॉर्म 26एएस में दिखने वाला ब्योरा करदाता के अपने वित्तीय रिकॉर्ड से मिलना चाहिए। उसके फॉर्म 16 और फॉर्म 16ए से तो इसका मिलना बेहद जरूरी है।

फॉर्म 16 नियोक्ता से मिलने वाला सालाना विवरण होता है, जिसमें उस वित्त वर्ष के दौरान हुई आय, निवेश और काटे तथा जमा किए गए कर का ब्योरा होता है।

पीएसएल एडवोकेट्स ऐंड सॉलिसिटर्स में एसोसिएट पार्टनर सोएब कुरैशी कहते हैं, 'चूंकि फॉर्म 16 में नियोक्ता द्वारा काटे गए कर का जिक्र होता है, इसलिए इसमें दी गई टीडीएस की रकम को फॉर्म 26एएस में दिख रही रकम से मिला लेना बेहद जरूरी है। यह जरूरी इसलिए है क्योंकि आयकर विभाग भी करदाता के पैन का इस्तेमाल कर इन दोनों का मिलान करता है।'

इसके साथ ही जमा राशि पर मिलने वाले ब्याज की टीडीएस राशि को बैंक से मिले फॉर्म 16 से मिलाना जरूरी होता है।


सुधारें त्रुटियां और अंतर

फॉर्म 16 और फॉर्म 26एएस के बीच अंतर होना सामान्य बात है। मिगलानी कहते हैं, 'टीडीएस रिटर्न में गलत राशि भर जाने के कारण, टीडीएस काटने वाले द्वारा उसे जमा करने में देर किए जाने के कारण, पैन गलत होने के कारण या करदाता के बारे में अधूरी जानकारी होने के कारण ऐसा हो सकता है।'

करदाता को टीडीएस काटने वाले के पास जाना चाहिए और गलती ठीक करानी चाहिए। कर विभाग की वेबसाइट कहती है, 'यदि टीडीएस में अंतर दिख रहा है तो नियोक्ता या आपकी आय में से इसे काटने की जिम्मेदारी वाले व्यक्ति को फौरन सूचित कीजिए। वही संशोधित टीडीएस रिटर्न दाखिल करेगा।'

प्रिवी लीगल सर्विसेज एलएलपी में मैनेजिंग पार्टनर मोइज के रफीक कहते हैं, 'कर काटने वाला टीडीएस/टीसीएस सुधार विवरण जमा कर अपनी गलती सुधार सकता है। संशोधित टीडीएस रिटर्न की प्रोसेसिंग होते ही फॉर्म 26एएस में सही आंकड़े नजर आने लगेंगे।'

यदि टीडीएस काटने वाले ने उस रकम को सरकार के खाते में जमा नहीं किया है या टीडीएस रिटर्न दाखिल नहीं कर सका है तो करदाता जल्द से जल्द ऐसा करने के लिए कह सकता है। समय पर टीडीएस जमा नहीं किया जाए तो जुर्माना लगता है।

विक्ट्रियम लीगलिस-एडवोकेट्स ऐंड सॉलिसिटर्स में मैनेजिंग पार्टनर आदित्य चोपड़ा कहते हैं, 'आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 234ई के अनुसार तय तारीख से पहले या उस तारीख तक टीडीएस और टीसीएस रिटर्न दाखिल नहीं करने पर 200 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से विलंब शुल्क लगता है। अधिकतम जुर्माना टीडीएस की रकम के बराबर होता है।'

यदि फॉर्म 16 और फॉर्म 26 एएस में दिए गए पैन अथवा कर कटौती खाता संख्या (टैन) में किसी तरह का फर्क हुआ तो करदाता को कर की वापसी नहीं होगी। इसी तरह यदि काटे गए कर और जमा किए गए कर में अंतर मिलता है तो भी करदाता को फॉर्म 26एएस में दिख रही कर राशि की ही वापसी की जा सकती है।

आजकल फॉर्म 26एएस में दिख रही जानकारी खुद-ब-खुद आयकर रिटर्न में भर जाती है। यदि जानकारी में किसी तरह का अंतर होता है तो पहले से भरी हुई जानकारी व्यक्ति के वास्तविक हिसाब-किताब से मेल नहीं खाएगी। इस तरह की त्रुटियों से आयकर रिटर्न की प्रोसेसिंग और कर वापसी में देर हो जाती है।


सुधार के बाद कीजिए रिटर्न दाखिल

यदि त्रुटि मुक्त आयकर रिटर्न दाखिल करना है तो पक्का कर लीजिए कि आपका फॉर्म 26एएस अपडेट हो गया है। जैन कहते हैं, 'ऐसा हो जाने तक इंतजार कर लीजिए वरना जानकारी में मेल नहीं होने पर आयकर अधिकारी आपको नोटिस भेज सकते हैं।'

यह नोटिस आयकर अधिनियम की धारा 143 के अंतर्गत जारी किया जाता है। कुरैशी कहते हैं, 'नोटिस में बताया जाता है कि जमा किया गया कर कम है या अधिक। नोटिस मिलने पर करदाता को बकाया कर जमा कर देना चाहिए और चार्टर्ड अकाउंटेंट या आयकर अधिकारी से मिलना चाहिए।'


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