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बुनियादी सुधार जरूरी

संपादकीय /  June 10, 2022

सेवानिवृत्ति के फंड का प्रबंधन करने वाले संस्थान को कैसे निवेश करना चाहिए? उसे कम से कम जोखिम लेना चाहिए तथा जोखिम रहित परिसंपत्तियों में निवेश करना चाहिए या कुछ जोखिम लेते हुए निवेशकों के लिए बेहतर प्रतिफल का प्रयास करना चाहिए? इसका उत्तर कई कारकों पर निर्भर करेगा जिसमें योगदान करने वालों का प्रोफाइल भी शामिल होगा। आमतौर पर ऐसे फंडों का प्रबंधन करने वालों के लिए हल्काफुल्का जोखिम लेना उचित माना जाता है। ऐसे फंड प्रबंधकों का सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि उनके फंड दीर्घकालिक प्रकृति के होते हैं जिससे उन्हें प्रबंधन में जरूरी लचीलापन मिलता है। बहरहाल, अगर फंड प्रबंधन संस्था सरकार की ओर से संचालित हो तथा योगदान की प्रकृति अनिवार्य हो तो चीजें इतनी सीधी सपाट नहीं रह पातीं। कर्मचारी भविष्य निधि संस्थान (ईपीएफओ) पर यही बात लागू होती है।

ईपीएफओ पारंपरिक तौर पर डेट  निवेश करता रहा है और 2015 में इसने वृद्धिकारी राशि का 5 प्रतिशत शेयरों में निवेश करना शुरू किया। अब इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है और जानकारी के मुताबिक ईपीएफओ इसे 25 प्रतिशत करने पर विचार कर रहा है। शेयरों में निवेश बढ़ाने को समझा जा सकता है क्योंकि दीर्घावधि में वे अन्य परिसंपत्ति वर्ग से बेहतर प्रदर्शन करते हैं, विशेषकर डेट की तुलना में वे बेहतर प्रतिफल देते हैं। बीते पांच वर्षों में शेयरों से 18 प्रतिशत का औसत प्रतिफल मिला है जो सरकारी बॉन्ड से काफी बेहतर रहा। नीतिगत दरों में हालिया इजाफे के बाद भी 10 वर्ष के मानक सरकारी बॉन्ड से केवल 7.5 प्रतिशत का प्रतिफल मिल रहा है जो ईपीएफओ की ओर से 2021-22 के लिए मंजूर 8.1 प्रतिशत की ब्याज दर से कम है। ध्यान रहे कि ईपीएफओ की यह दर भी कई दशकों में न्यूनतम है। परंतु यह अन्य तमाम जोखिम रहित उपायों से बेहतर है तथा कर व्यवहार इस प्रतिफल को और अधिक आकर्षक बना देता है।

शेयरों में निवेश बढ़ाने से दीर्घावधि में बेहतर प्रतिफल मिलना तय होता है। बहरहाल, ईपीएफओ की प्रकृति और उसकी स्थिति को देखते हुए यह आसान नहीं है। यह एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) तथा केंद्र सरकार के उपक्रमों में भी निवेश करता है लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि विगत वर्षों में शेयरों में किए गए निवेश का प्रदर्शन कैसा रहा। सन 2020 में इसने ब्याज के एक हिस्से का भुगतान करने से इनकार कर दिया क्योंकि वह ईटीएफ के मोचन पर निर्भर था। शेयर परिसंपत्तियों का प्रबंधन इस तरह नहीं किया जा सकता। शेयर एक जोखिम वाली परिसंपत्ति है और इसे तयशुदा प्रतिफल के लिए नहीं इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा शेयर दीर्घावधि में अच्छा प्रदर्शन करते हैं तथा इसका इस्तेमाल बार-बार बाजार से राशि लेकर खातों में सालाना ब्याज भुगतान के लिए नहीं किया जाना चाहिए। शेयर में निवेश बढ़ने के साथ ऐसे मसले और जटिल होते जाएंगे।

ऐसे में शेयर में निवेश बढ़ाने का विचार अच्छा है लेकिन इसे चरणबद्ध तरीके से किया जाना चाहिए। सेवानिवृत्ति फंड प्रबंधकों को पहले कुछ बुनियादी चीजें ठीक करनी चाहिए। उदाहरण के लिए सबस्क्राइबर को शेयर निवेश के मामले में चयन का विकल्प दिया जाना चाहिए। संभव है कि कुछ सबस्क्राइबर  इस विचार से सहमत न हों। चयन प्रक्रिया को ऑनलाइन तरीके से आसानी से अंजाम दिया जा सकता है। ईपीएफओ प्रतिफल बढ़ाने के लिए उच्च रेटिंग वाले कॉर्पोरेट डेट पर भी विचार कर सकता है। बल्कि इससे सबस्क्राइबर को पांच अलग-अलग फंड विकल्प मिल जाएंगे जिनमें से एक पूरी तरह जोखिम रहित होगा। कुछ परिस्थितियों में उन्हें चयन बदलने का विकल्प भी मिलना चाहिए। निश्चित तौर पर इसका क्रियान्वयन बहुत कठिन नहीं होगा क्योंकि अधिकांश परिसंपत्ति प्रबंधन फर्म ऐसे विकल्प देती हैं। बहरहाल इसके लिए पेशेवर प्रबंधन तथा उच्च पारदर्शिता की आवश्यकता होगी। केवल शेयरों में निवेश बढ़ाने से वांछित लाभ नहीं मिलेगा।

Keyword: बुनियादी सुधार, सेवानिवृत्ति, फंड प्रबंधन, निवेश, जोखिम, ईपीएफओ, प्रतिफल,
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