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महंगाई से हैं परेशान तो गैर जरूरी खर्चों पर कसें लगाम

बिंदिशा सारंग /  May 16, 2022

मेरी जे (वास्तविक नाम नहीं) की उम्र करीब 44 साल है और वह मुंबई में रहती हैं। आयात-निर्यात के कारोबार से जुड़ी एक कंपनी में काम करने वाली मेरी कहती हैं कि पिछले कुछ महीनों में महंगाई का असर बहुत अधिक दिखने लगा है और तकलीफ बढऩे लगी है। वह बताती हैं, 'राशन से लेकर आने-जाने का खर्च तक कमोबेश सब कुछ महंगा हो गया है। मेरे होम लोन की ब्याज दर भी पिछले हफ्ते 35 आधार अंक (0.35 फीसदी) बढ़ा दी गई। बदकिस्मती से मेरी कंपनी की हालत भी अच्छी नहीं चल रही है, इसलिए पिछले दो साल से मेरी तनख्वाह नहीं बढ़ाई गई है।'

मेरी गलत नहीं कह रही हैं। महंगाई का कहर देश पर टूट रहा है। सरकारी आंकड़े बता रहे हैं कि भारत इस समय पिछले आठ साल में सबसे अधिक महंगाई से जूझ रहा है। अप्रैल 2022 में खुदरा मुद्रास्फीति 7.79 फीसदी रही, जो मई, 2014 की 8.39 फीसदी के बाद सबसे अधिक है। इसका असर भी साफ नजर आ रहा है। रोजमर्रा के नाश्ते-खाने से लेकर विलासिता के साजोसामान तक हरेक मोर्चे पर महंगाई का सामना करना पड़ रहा है, जिसने आम आदमी की हालत पतली कर दी है और खास तौर पर मध्यमवर्गीय परिवार का बजट बिगाड़कर रख दिया है।

एलएक्सएमई की संस्थापक प्रीति राठी गुप्ता कहती हैं, 'मार्च में जब खुदरा महंगाई 6.95 फीसदी थी, उस समय भी व्यक्तिगत तौर पर हमारे लिए महंगाई करीब 10 फीसदी थी। अब तो निजी महंगाई दर का आंकड़ा और बढ़ गया होगा।'

निजी महंगाई दर पर दें ध्यान

महंगाई से आपका भी परेशान होना लाजिमी है और उससे निपटने के तरीके भी आप ढूंढ रहे होंगे। इससे राहत पानी है तो सबसे पहले आपको समझना होगा कि आपके बजट पर इसका क्या असर पड़ रहा है। ऑप्टिमा मनी मैनेजर के प्रबंध निदेशक पंकज मठपाल कहते हैं, 'महंगाई की आधिकारिक दर महत्त्वपूर्ण होती है मगर उसमें उन उत्पादों तथा सेवाओं की बढ़ती कीमत को शामिल नहीं किया जाता है, जिन्हें आप इस्तेमाल करते हैं। इसलिए अपने बजट में कतरब्योंत करने से पहले आपको समझना होगा कि आपकी निजी महंगाई दर किस तरह बदली है।' एमबी वेल्थ फाइनैंशियल सॉल्यूशंस के संस्थापक एम बरवे कहते हैं, 'आप कहां रहते हैं, आप दफ्तर जाते हैं या अपने घर से ही काम करते हैं, आप क्या खाते-पीते हैं, इन सबका आपकी निजी महंगाई दर पर असर पड़ता है।' फिर क्या किया जाए? सबसे पहले आप कागज उठाइए और किसी भी महीने में आप जो कुछ खर्च करते हैं, उसकी फेहरिस्त तैयार कर लीजिए। अब हिसाब लगाइए कि आपका कुल खर्च पिछले साल के उसी महीने की तुलना में कितना बढ़ गया है।


गैर जरूरी खर्च घटाइए

जब आप अपनी निजी महंगाई दर का हिसाब-किताब कर लेते हैं तो आपको पता लग जाता है कि खर्च करने का आपका तरीका क्या है या किस पर ज्यादा और किस पर कम खर्च करते हैं। अगर आपके पास मासिक खर्च का ब्योरा नहीं है तो एक महीने का समय लेकर एक-एक खर्च अपने पास लिखें। महीने भर में ब्योरा तैयार हो जाएगा। एलएक्सएमई की संस्थापक प्रीति राठी गुप्ता कहती हैं, 'चाहे तो डायरी ले लीजिए या ऑनलाइन स्प्रेडशीट बना लीजिए और उसमें हरेक स्रोत से होने वाली अपनी आय तथा हरेक मद पर होने वाले खर्च को दर्ज कर लीजिए।' एक बार यह ब्योरा आपके पास आ गया तो आप आसानी से देख लेंगे कि आपको कहां खर्च घटाने की जरूरत है या कहां खर्च घटाया जा सकता है।

जरूरी या तयशुदा खर्च और गैर जरूरी खर्च को अलग-अलग करना बहुत फायदेमंद होता है। एसोसिएशन ऑफ रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स के निदेशक मंडल के सदस्य विशाल धवन कहते हैं, 'अपने जरूरी और गैर जरूरी खर्चों को अलग-अलग करें तथा उसके बाद गैर जरूरी खर्चों में अधिक से अधिक कमी करने की कोशिश करें।' महंगाई बढ़े तो ब्याज दरें भी आम तौर पर बढ़ती ही हैं। ऐसी सूरत में मोटी रकम वाले बड़े कर्ज आपके बजट पर और हमला कर सकते हैं। अगर आप पर कोई बड़ा कर्ज जैसे होम लोन है तो आपको ब्याज में जाने वाली रकम घटाने की कोशिश करनी चाहिए। इसके लिए आप अपने पास मौजूद नकद का इस्तेमाल कर सकते हैं या कहीं से अचानक मिली रकम भी इसमें इस्तेमाल हो सकती है। उस रकम से मूलधन का एक हिस्सा अदा कर दीजिए ताकि ब्याज कम हो जाए। धवन समझाते हैं, 'अगर महंगाई आपके लिए मुसीबत बन रही है तो कुछ समय के लिए अपने कर्ज की अवधि बढ़वा लीजिए। इससे आपकी मासिक किस्त घट जाएगी। जैसे ही आपके पास ज्यादा नकदी आनी शुरू होती है, किस्त बढ़वा लीजिए और आपके कर्ज की अवधि घट जाएगी।'


आय बढ़ाने की करें कोशिश

महंगाई से निपटने के लिए खर्च पर अंकुश जरूरी है मगर यह एक सीमा तक ही लगाया जा सकता है। इसलिए आपके पास दूसरा रास्ता है आय में इजाफा। जितनी जल्दी हो सके, अपनी आय बढ़ाने के रास्ते तलाशिए। ऑप्टिमा मनी मैनेजर के प्रबंध निदेशक पंकज मठपाल की राय है, 'आज के माहौल में आय का दूसरा जरिया होना सामान्य बात है और हर किसी के पास दूसरी आय होनी ही चाहिए। दफ्तर के अलावा काम करने से, किराये से या लाभांश से आपको यह कमाई हो सकती है।' इसके लिए आपको कोई दूसरा कौशल अर्जित करना पड़े या अपने कौशल में सुधार करना पड़े तो देर मत कीजिए। और अगर आपको लगता है कि आपका काम बहुत अच्छा है या दफ्तर के लिए आप बहुत जरूरी हैं तो आप अपने कंपनी या नियोक्ता से वेतन बढ़ाने की मांग भी कर सकते हैं।


इक्विटी में रकम नहीं करें कम

शेयर बाजार भी इस समय जबरदस्त उतारा-चढ़ाव से गुजर रहे हैं। आम तौर पर छोटा निवेशक इससे घबराकर या तो शेयरों में निवेश कर देता है या म्युचुअल फंड आदि में भी अपना इक्विटी आवंटन घटाकर उसे डेट में लगवा देता है। मगर विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में कितना भी उतार-चढ़ाव हो, आपको इक्विटी में अपना आवंटन कम नहीं करना चाहिए। एलएक्सएमई की संस्थापक प्रीति राठी गुप्ता कहती हैं, 'जोखिम लेने की अपनी क्षमता के मुताबिक इक्विटी में निवेश करने से ही आप लंबी अवधि में महंगाई को मात देने वाला प्रतिफल हासिल कर सकते हैं।'


जितनी लंबी चादर उतने पांव पसारें

महंगाई में जिस तरह का इजाफा हुआ है, उसने कई लोगों को अपने बजट से दाएं-बाएं जाने पर मजबूर कर दिया है। राठी गुप्ता ही बताती हैं, 'एलएक्सएमई द्वारा कराए गए विमेन ऐंड मनी पावर सर्वे में शामिल 73 फीसदी महिलाओं ने बताया कि उनकी आय का 20 फीसदी से भी कम हिस्सा बचत में जा रहा है।'

राठी गुप्ता बचत को जितना जरूरी बताती हैं, उसके लिए उतना ही आसान समीकरण भी देती हैं। उनका कहना है कि हरेक व्यक्ति को खर्च और बचत के मामले में 50:30:20 के समीकरण पर टिके रहना चाहिए। इसके हिसाब से आपकी आय का 50 फीसदी हिस्सा आपकी जरूरतें यानी घर का खर्च पूरा करने पर खर्च होना चाहिए। 30 फीसदी हिस्सा आपके अरमान या ख्वाहिशें पूरी करने के लिए होना चाहिए और 20 फीसदी हिस्सा बचत तथा निवेश के नाम होना चाहिए। आपको इसी लक्ष्य की तरफ काम करना चाहिए।


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