बिजनेस स्टैंडर्ड - बिजली संकट की उद्योग पर भी मार
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बिजली संकट की उद्योग पर भी मार

रामवीर सिंह गुर्जर /  05 11, 2022

देश में इस साल भीषण गर्मी पड़ रही है। ऐसे में बिजली संयंत्रों में कोयले की किल्लत के कारण बत्ती गुल हो रही है। एक दर्जन से ज्यादा राज्य बिजली कटौती से जूझ रहे हैं। बत्ती गुल होने से जहां आम आदमी के पसीने छूट रहे हैं, वहीं उद्यमियों पर बत्ती गुल होने पर जेनरेटर से कारखाना चलाने पर लागत का भार पड़ रहा है। गर्मी के कारण देश में बिजली की मांग काफी बढ़ गई है, जबकि कोयले की किल्लत के कारण इसकी पूर्ति लायक बिजली संयंत्रों में उत्पादन नहीं हो पा रहा है। अप्रैल महीने में 29 तारीख को बिजली की अधिकतम आपूर्ति 207.11 गीगावॉट रही, जो पिछले साल 7 जुलाई को रिकॉर्ड अधिकतम आपूर्ति 200.53 गीगावॉट से करीब 16.50 फीसदी ज्यादा है। 28 अप्रैल को बिजली की सबसे ज्यादा 19.21 करोड़ यूनिट की कमी रही, जबकि 456.70 करोड़ यूनिट की पूर्ति हुई। मई-जून में पीक मांग 215 से 220 गीगावॉट तक पहुंचने की संभावना है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक ही देश भर में बिजली की अधिकतम कमी 10 हजार मेगावॉट तक पहुंच गई थी। हालांकि बीते कुछ दिनों में बिजली कटौती में कमी आई है। कोयला आधारित 173 बिजली संयंत्रों में से करीब 100 के पास मानक औसत का शून्य से लेकर 25 फीसदी तक कोयले का स्टॉक बचा है। 100 फीसदी स्टॉक होने पर संयंत्र 26 दिन चल सकता है। इस तरह इन संयंत्रों के पास ज्यादा से ज्यादा सप्ताह भर बिजली पैदा करने लायक ही कोयले का स्टॉक बचा है। कोल इंडिया बिजली संयंत्रों के लिए रोजाना करीब 16.40 लाख टन कोयले की आपूर्ति कर रहा है, जबकि मांग 22 लाख टन पहुंच चुकी है। रेलवे ने कोयले की ढुलाई को प्राथमिकता देने के लिए 750 ट्रेनों के फेरे अनिश्चितकाल के लिए रद्द कर दिए हैं।

इस बीच, दिल्ली में 11 मई को इस साल बिजली की अधिकतम मांग 6,572 मांग दर्ज की गई। दिल्ली में इस साल एक दिन में अधिकतम मांग 8,200 मेगावॉट पहुंचने का अनुमान है, जो अब तक की सर्वोच्च मांग 7,409 से करीब 10 फीसदी ज्यादा है। बीएसईएस डिस्कॉम के एक अधिकारी ने बताया कि दोनों डिस्कॉम ने लंबी व छोटी अवधि के समझौतों के माध्यम से करीब 5,300 मेगावॉट बिजली का इंतजाम किया है, जो पिछले साल के इंतजाम 4,750 मेगावॉट से 11.50 फीसदी अधिक है।  

बत्ती गुल होने से मुश्किल में उद्यमी

बत्ती गुल होने से आम उपभोक्ताओं के पसीने तो छूट ही रहे हैं। उद्यमियों पर भी बिजली कटौती की मार पड़ रही है। घंटों बिजली कटौती से कारखानों में माल बनाना बंद करना पड़ता है या फिर जेनरेटर से माल बनाने पर लागत काफी बढ़ जाती है। जिससे पहले से ही बढ़ती लागत से जूझ रहे उद्योग की मुसीबत और बढ़ जाती है। हरियाणा के कुंडली औद्योगिक क्षेत्र के जूतों की पॉलिश के लिए ब्रश बनाने वाले तरुण मेहदीरत्ता कहते हैं कि कोरोना के दौरान हुए घाटे की भरपाई के लिए कारखाने में उत्पादन दिन-रात जोरों से हो रहा था। लेकिन घोषित व अघोषित बिजली कटौती से उत्पादन की रफ्तार थम गई है। जेनरेटर से कारखाना चलाने पर बिजली दोगुनी से अधिक महंगी पड़ती है। इसके साथ बार-बार बिजली जाने से कच्चे माल की बरबादी, मशीन को नुकसान, कारीगरों की कार्यदक्षता आदि प्रभावित होने से भी लागत बढ़ती है। बीते दो-तीन सप्ताह से बिजली कटौती के कारण ऑर्डर की पूर्ति समय पर नहीं कर पा रहे हैं। समय पर आपूर्ति न कर पाने के कारण अब माल लेने वालों को भाड़े की रकम व जुर्माना देना पड़ रहा है। बिजली कटौती से 5 से 7 लाख रुपये की चपत लग चुकी है।

आईएमएसएमई ऑफ इंडिया के चेयरमैन और फरीदाबाद के वाहन कलपुर्जा उद्योग राजीव चावला कहते हैं कि उद्यमी 2-3 सप्ताह से बिजली कटौती की मार झेल रहे हैं। हालांकि दो-तीन दिन से बिजली की स्थिति सुधरी है। पहले ज्यादा बिजली जाने के कारण उत्पादन 40 फीसदी घटा था। जेनरेटर से कारखाना चलाने पर लागत 25 फीसदी बढ़ गई। उत्पादन घटने से ऑर्डर की पूर्ति समय से नहीं कर पाए। लेकिन अब पहले से कम बिजली जाने के कारण पहले के ऑर्डर की पूर्ति करने पर जोर दे रहे हैं। हालांकि इसके लिए अभी भी ज्यादा लागत आ रही है। फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो, स्मॉल ऐंड मीडियम इंटरप्राइजेज (फिस्मे) के अध्यक्ष और गुडग़ांव के उद्यमी अनिमेष सक्सेना कहते हैं कि जेनरेटर से कारखाने चलाने पड़ रहे हैं। जेनरेटर से कारखाना चलाने पर बिजली 25 रुपये यूनिट से ज्यादा महंगी पड़ती है, जबकि बिजली से 10 से 11 रुपये यूनिट है। बडे उद्यमी तो ऑर्डर की पूर्ति करने के लिए मजबूरी में जेनरेटर से कारखाना चला भी रहे हैं। लेकिन छोटे उद्यमियों के लिए जेनरेटर से लागत काफी बढऩे के कारण कारखाना चलाना आसान नहीं है।

सक्सेना ने कहा बिजली कटौती की स्थिति अकेले हरियाणा में नहीं है बाकी राज्यों के औद्योगिक क्षेत्रों में भी घंटों बत्ती गुल रहती है। फेडरेशन ऑफ राजस्थान ट्रेड ऐंड इंडस्ट्री कार्यकारी अध्यक्ष अरुण अग्रवाल ने कहा कि राजस्थान ने अलग-अलग संभागों में बिजली कटौती का प्लान घोषित किया था। जयपुर में शाम 6 बजे रात 10 बजे के दौरान क्षमता से आधी बिजली उपयोग करने को कहा गया है। इससे ज्यादा बिजली का उपयोग करने पर जुर्माना लगेगा। अग्रवाल कहते हैं कि बिजली कटौती के कारण उत्पादन प्रभावित होने से ऑर्डर की समय पर पूर्ति करने में दिक्कत हो रही है। अघोषित बिजली कटौती से भी उद्यमी परेशान है। ग्वालियर इंडस्ट्री एसोसिएशन के संरक्षक कमल शर्मा ने बताया कि सबसे बडी दिक्कत बिना बताए कई बार बिजली जाने से हैं। उद्योग को 2 से 3 घंटे के छोटे छोटे अंतराल में बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। नोएडा आंत्रप्रन्योर एसोसिएशन के महासचिव वीके सेठ ने कहा कि नोएडा में घोषित कटौती नहीं है। स्थानीय खराबी के कारण जरूर बत्ती गुल हो जाती है। दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्रों को अभी बिजली कटौती से राहत मिली हुई है। अपेक्स चैंबर ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री के उपाध्यक्ष रघुवंश अरोड़ा ने कहा कि दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्रों में अभी बिजली कटौती का संकट नहीं है।

Keyword: बिजली संकट, भीषण गर्मी, बिजली संयंत्र, कोयला किल्लत, बत्ती गुल, जेनरेटर,
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