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शहनाई की आए बारी तो वित्तीय योजना बनाना है समझदारी

बिंदिशा सारंग /  May 03, 2022

पुरानी कहावत है कि शादी को सही ढंग से चलाने में बहुत मेहनत करनी पड़ती है। सबसे पहले तो शादी सही ढंग से हो जाए, इसी के लिए मेहनत करनी पड़ती है। इस समय शादी-ब्याह का दौर पूरे जोर पर है मगर विवाह बंधन में बंधने से पहले वित्तीय पहलुओं पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।
शादी से पहले
ब्याह होने से पहले ही अपने होने वाले जीवन साथी की वित्तीय हालत के बारे में जान लेना अच्छा होगा। मुंबई में प्रमाणित वित्तीय योजनाकार और 'माइंडफुल रिटायरमेंट' तथा 'मनीवाइज-पर्सपेक्टिव्स फॉर वीमन' की लेखक किरण तैलंग कहती हैं, 'विवाह करने से पहले वित्तीय नजरियों पर बातचीत करना अच्छा रहेगा, जिसमें खर्च करने तथा निवेश करने की आदतों पर चर्चा की जानी चाहिए। यदि इस मामले में दोनों की आदतें अलग-अलग हुईं तो बाद में मतभेद और विवाद खड़े हो सकते हैं। 
इसलिए शादी से पहले यह जानना जरूरी है कि आपका होने वाला जीवनसाथी रुपये-पैसे को कैसे बरतता है। हो सकता है कि दोनों में से एक जमकर बचत करने वाला हो और दूसरा खुले हाथ से पैसे उड़ाने वाला। शोध बताते हैं कि रुपये-पैसे का मसला तलाक का सबसे बड़ा कारण  बनता है।'
विवाह के लिए ऋण
ये बिना जमानत के कर्ज होते हैं, जिनका इस्तेमाल विवाह स्थल बुक कराने, खानपान और केटरिंग के लिए बुकिंग करने, मेहमानों के रुकने की जगह बुक करने, वाहन बुक करने, जेवरात खरीदने, दुल्हन का साजोसामान लेने तथा हनीमून पैकेज खरीदने में किया जाता है। बैंकबाजार डॉट कॉम के मुख्य कारोबार अधिकारी पंकज बंसल कहते हैं, 'विवाह ऋण लेने के बजाय अगर आप किसी अन्य ऋणदाता से उसी अवधि के लिए उतनी ही रकम बतौर पर्सनल लोन उधार लेते हैं तो शायद आपको कुछ कम ब्याज दर चुकानी पड़े। इसलिए जरूरी है कि आप कर्ज लेने से पहले अलग-अलग बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) से मिल रहे विकल्पों पर विचार करें और उनकी तुलना कर फैसला करें।' बहरहाल ज्यादातर विशेषज्ञ शादी के लिए कर्ज लेने से बचने की सलाह देते हैं। मुंबई में प्रमाणित वित्तीय योजनाकार पंकज मालडे कहते हैं, 'हमने यह भी देखा है कि जब माता-पिता शादी का पूरा खर्च करते हैं तो आलीशान बैचलर पार्टी देने या दूसरे समारोहों पर खर्च करने के लिए वे ही पर्सनल लोन लेते हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए। जब आप अपनी नई जिंदगी शुरू कर रहे हैं तो कर्ज में क्यों फंसना?' अगर आपके पास शादी के खर्चों के लिए पर्याप्त रकम नहीं है तो आप अपने परिजनों या दोस्तों से उधार ले सकते हैं। अगर आपको वहां से उधार मिला तो यह भी कर्ज होगा मगर इस पर आपको कोई ब्याज नहीं देना पड़ेगा। अगर यह विकल्प आपके पास नहीं है तो भारी-भरकम कर्ज लेने से बेहतर है कि आप अपने निवेश का कुछ हिस्सा निकालकर खर्च के लिए रकम जुटा लें।
 विवाह के बाद
ब्याह के बंधन में बंधने के बाद सबसे जरूरी है कागजात को अपडेट करना। उदाहरण के लिए आपको अपने निवेश और बैंक खातों में पता बदलवाना। तैलंग कहती हैं, 'पैसा बहुत संवेदनशील मसला होता है। इसलिए आपको एक साल बाद या वैवाहिक जीवन में पूरी तरह रम जाने के बाद साल भर में यह काम शुरू कर देना चाहिए। याद रखिए कि अभी तक आपने अपने निवेश या रुपये-पैसे के बारे में किसी से भी बात नहीं की है, इसलिए अपने जीवनसाथी के सामने भी एकाएक इसका खुलासा करना आपके लिए आसान नहीं होगा।' यदि दंपती में से भी किसी ने भी शादी के बाद अपना नाम बदला है तो यह बदलाव सभी वित्तीय दस्तावेजों में कराना होगा। आप सबसे पहले अपनी स्थायी लेखा संख्या (पैन) और पासपोर्ट में यह बदलाव करा सकते हैं। विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि शादी के फौरन बाद पति और पत्नी को पर्याप्त स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा भी खरीद लेना चाहिए।
 करें सही शुरुआत
शादी होने पर पारंपरिक समारोह होते हैं और कुछ समारोह पश्चिमी संस्कृति वाले भी होते हैं, जैसे बैचलर पार्टी। आजकल बैचलर पार्टी जैसे आयोजन खूब प्रचलन में हैं। ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के संस्थापक और प्रबंध निदेशक पंकज मठपाल समझाते हैं, 'शादी से पहले, शादी के दिन और हनीमून के खर्चों के लिए बजट बनाना बहुत अहम हो गया है। जरूरत से ज्यादा खर्च से बचना चाहते हैं तो कई समारोह या रस्में एक ही दिन कर लेना अच्छा रहेगा। कई लोग महल या हवेलियों जैसी महंगी जगहें किराये पर लेकर शादी से पहले तस्वीरें खिंचाते हैं, जिसे प्री-वेडिंग शूट कहा जाता है। प्री-वेडिंग शूट पर खर्च करने में बुराई नहीं है मगर यही काम शहर के किसी खूबसूरत बीच या पार्क में कम खर्च में भी किया जा सकता है।' ज्यादातर विशेषज्ञ यही कहते हैं कि अगर आप कुबेर जैसे बेहद अमीर नहीं हैं तो आपको यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि शादी असल में आपके नए जीवन की शुरुआत है और उसमें किसी भी समारोह पर आप अपनी हैसियत से ज्यादा खर्च नहीं कर सकते। आम तौर पर भारत में माता-पिता बच्चों की शादी के लिए पैसा पहले ही अलग कर देते हैं, कुछ को अपनी शादी के लिए खुद बचाना पड़ता है और कुछ मामलों में कर्ज तक लेना पड़ता है।
धन का प्रबंधन
जब धन के प्रबंधन की बात आती है तो दो तरह के विचार चलते हैं। तैलंग कहती हैं, 'यदि पति और पत्नी दोनों कमाते हैं तो वे अपनी निजी वित्तीय पहचान बरकरार रखना चाह सकते हैं। फिर भी कुछ वित्तीय पहलू दोनों को मिलकर संभालने पड़ते हैं।' मिसाल के लिए दोनों साथी अलग-अलग खाते रखते हुए और अलग-अलग निवेश करते हुए भी घर के खर्चों और परिवार की छुट्टिïयों में मिलकर योगदान कर सकते हैं। मालडे कहते हैं, 'कुछ युगल खर्चों में बराबर योगदान कर सकते हैं और कुछ अपने वेतन के हिसाब से उसमें भागीदारी कर सकते हैं।' यह तरीका उन दंपतियों के लिए एकदम सही रहता है, जो अपने वित्तीय जीवन को एक-दूसरे के साथ पूरी तरह मिलाना नहीं चाहते।
तैलंग कहती हैं, 'हमने ऐसे कई मामले देखे हैं, जहां पत्नी की पूरी तनख्वाह घर चलाने में इस्तेमाल हो जाती है और पति का वेतन निवेश में काम आता है। मगर ऐसे मामलों में किसी वजह से शादी टूटी तो पत्नी के हाथ में और खाते में कुछ नहीं रह जाएगा। अगर आपके अलग-अलग खाते हैं तो आप कागजों पर सह-स्वामित्व (को-ओनरशिप) दिखा सकते हैं।' मगर कुछ विशेषज्ञ दूसरे तरीके को बेहतर मानते हैं, जहां दोनों साथियों के वित्तीय जीवन आपस में मिला दिए जाते हैं और हरेक काम मिलकर ही किया जाता है। इसमें बचत और निवेश पूरी तरह जोड़े पर ही निर्भर करता है। अगर आपको जरूरत महसूस होती है तो आप किसी पेशेवर सलाहकार के पास जा सकते हैं। वह बजट तैयार करने, वित्तीय लक्ष्य तय करने, निवेश करने और दंपती के रूप में वित्तीय योजना और उसका रास्ता तैयार करने में आपकी मदद करेगा। 
विवाह का बीमा
कोरोना महामारी के दौरान विवाह का बीमा बहुत अहम साधन बनकर निकला। इस महामारी के कारण दो बार लॉकडाउन हो चुका है और किसी भी नई किस्म का वायरस आने पर कम से कम स्थानीय स्तर पर लॉकडाउन होने का खतरा अब भी बरकरार है। ऐसे में विवाह का बीमा कराना अच्छा रहेगा न?
पॉलिसीएक्स डॉट कॉम के संस्थापक और मुख्य कार्य अधिकारी नवल गोयल कहते हैं, 'चूंकि शादी में बहुत ज्यादा खर्च होता है और आयोजकों की ओर से कई पक्ष इसमें शामिल रहते हैं, इसलिए जोखिम तो होता ही है। इसलिए अनिश्चितता के दौर में किसी भी तरह के आर्थिक नुकसान से बचने के लिए लोग विवाह का बीमा करा सकते हैं। आम तौर पर इस बीमा पॉलिसी में शादी रद्द होने की सूरत में नुकसान से बचा जा सकता है।'
विवाह बीमा में थर्ड पार्टी दावे को भी कवर किया जाता है। ऐसा तब होता है, जब शादी में चोरी हो जाए, आग लग जाए, सेंधमारी हो जाए या दुर्घटना हो जाए। विवाह रद्द होने या कैंसलेशन की शर्त में अचानक या अज्ञात कारणों से शादी रद्द होने या टलना भी शामिल होता है। लेकिन ध्यान रहे कि दूल्हा या दुल्हन या उनमें से किसी का परिवार शादी हमेशा के लिए खत्म कर देता है तो बीमा कंपनी की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। आग लगने या भूकंप आने, सेंधमारी होने, चोरी होने आदि से संपत्ति को हुआ नुकसान भी बीमा के दायरे में आता है। व्यक्तिगत दुर्घटना के कारण रक्त संबंधी अथवा रिश्तेदारों की मौत होना, स्थायी और पूर्ण रूप से विकलांग होना अथवा आंशिक विकलांगता को भी विवाह बीमा में शामिल किया जाता है। गोयल समझाते हैं, 'ऐसी सूरत में समुचित बिलों तथा पुलिस के पास दर्ज प्राथमिकी के साथ प्रामाणिक दावा करना बहुत जरूरी है। यदि बीमा कंपनी को आपके दावे में किसी तरह की खामी नजर आती है तो उसके पास दावा खारिज करने का पूरा अधिकार है।' इस बीमा पॉलिसी का प्रीमियम निर्धारित नहीं होता और कुल बीमा राशि के 0.5 फीसदी से 2 फीसदी तक होता है।
अगर आप डेस्टिनेशन वेडिंग (किसी खास और मशहूर स्थान पर जाकर शादी करने) का इरादा कर रहे हैं या कई दिनों तक रस्मो-रिवाज चलने हैं अथवा भारी-भरकम रकम जमा करने का आपका इरादा है तो आपको यह बीमा खरीदने पर जरूर विचार करना चाहिए। लेकिन अगर आप शादी में कुछ खास लोगों को बुलाकर छोटे स्तर पर समारोह करना चाहते हैं, आपने खर्च सीमित रखे हैं तो आपको इस बीमा की जरूरत नहीं होगी।

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