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ई-खुदरा में क्रांति!

संपादकीय /  May 03, 2022

ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) के रूप में जो महत्त्वाकांक्षी पहल देश के पांच शहरों में प्रायोगिक तौर पर  की गई है वह देश में ई-कॉमर्स को पूरी तरह बदल सकती है। एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) की तरह ओएनडीसी एक ओपन डिजिटल नेटवर्क विकसित कर रहा है जिसे कुछ इस प्रकार तैयार किया गया है कि सभी प्रकार के ई-खुदरा ऐप और प्लेटफॉर्म उसी तरह एक दूसरे के साथ संवाद कर सकेंगे जैसे कि यूपीआई हर भुगतान ऐप को अबाध ढंग से पैसे का लेनदेन करने देता है। ओएनडीसी डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र और उसके डेटा प्रवाह पर कई असर डाल सकता है। यह खरीदारों और विक्रेताओं के लिए पहुंच को बराबर कर सकता है, इस व्यवस्था में डेटा प्रबंधन और डेटा संरक्षण को लेकर भी चिंता है। इसके अलावा जब ओएनडीसी बड़े पैमाने पर काम करेगा तो ई-बाजार संचालित कर रहे कई विदेशी समूहों पर अभी लगे प्रतिबंधों को हटाने की भी तार्किक वजह उत्पन्न होगी।
फिलहाल भारत के ई-खुदरा क्षेत्र में एमेजॉन और फ्लिपकार्ट की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से अधिक है। परंतु एमेजॉन की ऐप का इस्तेमाल कर रहा ग्राहक उन उत्पादों और सेवाओं को नहीं देख सकता जो फ्लिपकार्ट की ऐप पर सूचीबद्ध हैं। इसी तरह जोमैटो ऐप स्विगी पर सूचीबद्ध रेस्तरां नहीं दिखाएगा। ओएनडीसी ऐसे सभी प्लेटफॉर्म को जोड़ेगा जिससे विकल्प बढ़ेंगे और ऑनलाइन खरीदारी करने वालों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे। इससे 1.2 करोड़ छोटे किराना कारोबारियों और 4.2 करोड़ छोटे और मझोले कारोबारों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने में मदद मिलेगी और उनके लॉजिस्टिक्स की समस्या भी हल होगी। ओएनडीसी के घोषित उद्देश्य हैं नए विक्रेताओं के लिए प्रतिस्पर्धा में सुधार करना और मौजूदा ई-मार्केट का नेतृत्व करने वालों के दबदबे को नियंत्रित करना। इस विषय में जुलाई 2021 में एक सलाहकार परिषद स्थापित की गई और ओएनडीसी को यूपीआई का संचालन करने वाले भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम की तरह एक गैर लाभकारी कंपनी के रूप में पंजीकृत किया गया है। ओएनडीसी ने एक रणनीति पत्र प्रकाशित किया है जो उन चुनौतियों और समस्याओं के बारे मेंं बताता है जिन्हें वह हल करने का प्रयास करेगा। यहां उसकी बनावट के बारे मेंं कुछ विस्तृत जानकारी सामने आती है। बहरहाल इस पर्चे में डेटा की निजता और सुरक्षा के उपायों की जानकारी नहीं दी गई है।
यदि ओएनडीसी वैसे ही काम करता है जैसा बताया गया है तो वह बहुत बड़े पैमाने पर संवेदनशील निजी और वाणिज्यिक डेटा का प्रबंधन करेगा। ऐसे में डेटा सुरक्षा बहुत अहम है। इस विषय में मोटी-मोटी जानकारी दी गई है जिसे विस्तार की जरूरत है, खासकर यह देखते हुए कि डेटा संरक्षण कानून अभी लंबित है। दस्तावेज में कहा गया है कि लेनदेन संबंधी डेटा केवल खरीदार और विक्रेता की ऐप में रहेंगे और वे ओएनडीसी पर नहीं नजर आएंगे। ओएनडीसी किसी आंकड़े को न तो जमा करेगा और न ही देखेगा। डेटा नीतियां सहमति आधारित तथा सीमित उद्देश्य वाली होंगी। ओएनडीसी यह सुनिश्चित करेगा कि लेनदेन के डेटा तथा व्यक्तिगत पहचान संबंधी सूचना एवं विक्रेताओं की अहम जानकारी को सुरक्षित रखा जाए। नेटवर्क की विश्वसनीयता के लिए यह देखना अहम होगा कि ओएनडीसी इस स्तर की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेगा।
क्या अपनी ऐप बनाने, स्मार्ट लॉजिस्टिक्स प्रबंधन तथा कम लागत वाली वेयरहाउसिंग सुविधाओं पर अरबों डॉलर की राशि व्यय करने वाले बाजार के शीर्ष कारोबारी ओएनडीसी से जुडऩा चाहेंगे जबकि वह स्वैच्छिक होगा? यदि ओएनडीसी बड़े पैमाने पर काम करने में सफल होता है तो विदेशी खुदरा कंपनियों पर प्रतिबंध कम करने की बात उठेगी। ये प्रतिबंध अभी उन्हें बहु ब्रांड स्टोर बनने से रोकते हैं। यदि सब ठीक रहा तो ओएनडीसी बहुत क्रांतिकारी साबित होगा। यह न केवल छोटे कारोबारियों को बड़ा बाजार मुहैया कराएगा बल्कि बड़े पैमाने पर कारोबार लॉजिस्टिक्स को किफायती बनाएगा। लॉजिस्टिक्स की लागत में भारी कमी से अर्थव्यवस्था अधिक सक्षम बनेगी। 

Keyword: ई-खुदरा, क्रांति, ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स, ओएनडीसी, ई-कॉमर्स, यूपीआई,
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