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केंद्र राज्य टकराव में बनी आपसी विनाश की दशा

राष्ट्र की बात
शेखर गुप्ता /  May 02, 2022

इन दिनों स्कूली बच्चे बेहद स्मार्ट हैं लेकिन अगर वे नहीं भी होते तो भी वे आपको बता देते कि अंतरराष्ट्रीय सामरिक मामलों में एमएडी सिद्धांत का क्या अर्थ है। यह है म्युचुअली एश्योर्ड डिस्ट्रक्शन (आपसी विनाश की सहमति)। यानी अगर एक देश दूसरे के खिलाफ परमाणु हथियार का इस्तेमाल करे तो तो जवाब में तीन हमले किए जाएंगे। क्योंकि दोनों युद्धरत पक्षों को यकीन होगा कि तबाही दोतरफा होगी, इसलिए शांति बहाल रहेगी। इस दलील ने बीते 75 वर्षों से बड़ी वैश्विक ताकतों के बीच शांति कायम रखी है। हालांकि अब व्लादीमिर पुतिन उस संयम को आजमा रहे हैं। भारतीय राजनीति में एमएडी का नया उभरता सिद्धांत क्या है? करीब दो साल से अधिक पहले हमने इस स्तंभ में यह समझाया था कि मोदी-शाह की भाजपा जिन्हें पसंद नहीं करती उनके खिलाफ कैसे उसने तीन तरह के हथियारों से हमला किया।

ये तीन हथियार हैं: पहला, पुलिस और जांच/कर एजेंसियां तथा ईडी-आगे इन्हें हम केवल एजेंसियां कहेंगे। दूसरा सरकार के साथ मैत्रीपूर्ण रिश्तों वाले टेलीविजन चैनल और तीसरा, सोशल मीडिया पर अभियान।

आपके पास एजेंसी है तो चाहे किसी पर चाहे जितना काल्पनिक और अजीब आरोप लगा दीजिए। तमाम समाचार चैनल प्राइम टाइम में चीख-चीख कर उसे अपराधी ठहरा देंगे और फिर सोशल मीडिया, खासकर ट्विटर पर उन्हें चोर, हत्यारा, बलात्कारी, आतंकवादी, दाऊद का गुर्गा, आईएसआई एजेंट, रिश्वतखोर आदि घोषित कर दिया जाएगा। लेकिन अब यह कारगर नहीं है।

ममता बनर्जी के भतीजे और संभावित वारिस अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी को देखिए जो मुश्किलों में घिरे रहे या फिर महाराष्ट्र के उद्धव ठाकरे को जिन्हें उन पर इन तीनों हथियारों से हमला किया गया और उनके युवा बेटे जो मंत्री भी है पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की हत्या की साजिश रची। कई दिनों तक भाजपा समर्थक प्राइम टाइम योद्धा और सोशल मीडिया सेल ने लंबे समय तक अभियान चलाया। महाराष्ट्र में तो दो मंत्री कुछ समय से जेल में भी हैं। इसके बाद हालात बदलने लगे। मानो किसी ने गैर भाजपायी मुख्यमंत्रियों को याद दिलाया कि वे भी ऐसा कर सकते हैं क्योंकि हमारी संवैधानिक व्यवस्था में राज्य सरकारों को कानून व्यवस्था संभालने का अधिकार है। धीरे-धीरे दो वर्ष पहले उन्होंने जवाब देना शुरू किया और अब हालात और गहन होते जा रहे हैं। पिक्चर अभी शुरू हुई है... यह कहना मुश्किल है कि इसकी शुरुआत किसने की लेकिन इसका श्रेय वरिष्ठ नेता शरद पवार को दिया जा सकता है। पश्चिम बंगाल ने भी एक हद तक प्रतिरोध दर्शाया लेकिन असली प्रतिक्रिया महाराष्ट्र विकास आघाडी गठबंधन ने दी। जून 2020 में सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद उसे आत्महत्या के बजाय हत्या कहकर प्रचारित किया गया और उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे को षडयंत्रकर्ता बताते हुए मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। यह तीन तरफा हमले का सटीक उदाहरण था। एक एजेंसी, मित्रवत समाचार चैनल और सोशल मीडिया सेल यानी इस युद्ध की थलसेना, नौसेना और वायुसेना ने जमकर हमला बोला। तब राज्य सरकार की ओर से प्रतिकार के पहले संकेत सामने आए। हमने ऐसे उदाहरण जुटाए हैं:

  • राजपूत की मौत का मामला सीबीआई को सौंपे जाने के बाद राज्य ने सीबीआई के वहां मामले की जांच करने को लेकर अपनी सहमति वापस ले ली। जल्दी ही अन्य गैर भाजपा शासित राज्यों ने भी ऐसा ही किया। महाराष्ट्र सरकार ने राजपूत मामले पर मुखर टेलीविजन चैनल एंकर अर्णव गोस्वामी को खास निशाना बनाया। उन्हें कई आरोपों में गिरफ्तार किया गया।
  • अंबानी के आवास एंटीलिया वाले प्रकरण के बाद केंद्र ने पुन: राज्य की पुलिस पर नाकामी का आरोप लगाया और राष्ट्रीय जांच एजेंसी को बुलाया। राज्य ने दादरा एवं नगर हवेली के सांसद मोहन डेलकर की मौत के लिए विशेष जांच टीम का गठन करके जवाब दिया। आरोप लगाया गया कि इसमें भाजपा शामिल हो सकती है।
  • अब मामला और गंभीर हो रहा है। भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला द्वारा फोन टैपिंग के आधार पर राज्य के अधिकारियों और मंत्रियों के खिलाफ पदस्थापना और तबादलों में रिश्वतखोरी के इल्जाम की जांच की मांग की। राज्य सरकार ने उन पर अवैध ढंग से फोन टैपिंग का आरोप लगाया है। राज्य की पुलिस ने उनके खिलाफ 700 पन्नों का आरोप पत्र दाखिल किया है।
  • सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने अब महाराष्ट्र के मंत्रियों अनिल देशमुख और नवाब मलिक को निशाना बनाया है और राज्य की पुलिस ने कुछ समय के लिए पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे को गिरफ्तार भी किया क्योंकि उन्होंने कथित रूप से उद्धव ठाकरे को थप्पड़ मारने की धमकी दी थी। कुछ समय बाद शिवसेना के एक सदस्य की शिकायत पर राणे के विधायक बेटे नितेश के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया।
  • ताजा घटना है भाजपा की वफादार सांसद नवनीत राणा और उनके विधायक पति रवि राणा की राजद्रोह के इल्जाम में गिरफ्तारी। उन्होंने धमकी दी थी कि वे मुख्यमंत्री आवास के सामने हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। इस बीच महाराष्ट्र में काफी कुछ और घटित हुआ जिसमें शाहरुख खान के बेटे की हास्यास्पद गिरफ्तारी शामिल है। परंतु यह सिलसिला एक राज्य तक सीमित नहीं है। आइए पश्चिम बंगाल का रुख करते हैं।
  • दिनेश त्रिवेदी को हराने वाले भाजपा सांसद अर्जुन सिंह पर भटपारा नैहाटी सहकारी बैंक के चेयरमैन के रूप में फर्जी कार्य अनुबंधों के आधार पर ऋण बांटने के लिए भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत आरोप लगा।
  • सितंबर 2020 में पश्चिम बंगाल सीआईडी ने भाजपा के सांसद जगन्नाथ सरकार के खिलाफ कथित रूप से 2019 में तृणमूल कांग्रेस विधायक सत्यजित विश्वास की हत्या का मामला दर्ज किया। इसके बाद पूरक आरोप पत्र में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल रॉय पर भी सह-षडयंत्रकारी होने का इल्जाम लगाया गया।
  • सितंबर 2021 में राज्य सीआईडी ने नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी (जिन्होंने विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को हराया था) को अपने ही अंगरक्षक सुब्रत चकवर्ती की हत्या के मामले में तलब किया। ऐसा चक्रवर्ती की पत्नी की शिकायत पर किया गया। आईपीसी की धारा 302 और 120 बी (षडयंत्र) के तहत मामला दर्ज किया गया।
  • मार्च 2018 में पश्चिम बंगाल पुलिस ने शीर्ष भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय को बच्चों की तस्करी के मामले में तलब किया था। फरवरी 2019 में राज्य की पुलिस ने वरिष्ठ सीबीआई अधिकारी पंकज श्रीवास्तव के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की।
  • पांच अप्रैल, 2021 को अभिषेक बनर्जी ने शिकायत दर्ज कराई कि समाचार चैनल टाइम्स नाउ और प्रवर्तन निदेशालय मिलकर उन्हें बदनाम कर रहे हैं। पुलिस ने प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों को तीन बार तलब किया।
  • मई 2021 में भाजपा नेता राकेश सिंह पर कोलकाता पुलिस ने कोकीन का मामला बनाया। पार्टी की एक अन्य सदस्य पामेला गोस्वामी को मादक पदार्थों के मामले में जेल भेजा गया और उन्हें 292 दिन बाद जमानत मिली। राजस्थान में कांग्रेस सरकार 2020 में लगभग दलबदल जैसे हालात बनने के बाद जागी। पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने दो भाजपा नेताओं पर कांग्रेस विधायकों को लुभाने के आरोप में राजद्रोह का आरोप लगाया। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत पर भी यही आरोप लगा, हालांकि बाद में ये आरोप वापस ले लिए गए। एक चिकित्सक की आत्महत्या के बाद भाजपा नेता जितेंद्र गोठवाल पर आत्महत्या के दुष्प्रेरण का आरोप लगा। महिला चिकित्सक ने आत्महत्या की क्योंकि उन्होंने चिकित्सक पर एक मरीज की जान लेने का झूठा आरोप लगाया था। अप्रैल 2022 में नेटवर्क18 के एंकर अमन चोपड़ा पर भी कथित राजद्रोह तथा समुदायों के बीच नफरत फैलाने के लिए प्राथमिकी दर्ज की गयी। तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी ऐसी कई घटनाएं हुईं।

ताजा मामले में पंजाब की आप सरकार अपनी पुलिस को कांग्रेस की अलका लांबा, भाजपा नेता तेजिंदर सिंह बग्गा और आप के पुराने सहयोगी और कवि कुमार विश्वास के पीछे लगा रही है। यहां पूरा मनोरंजन तय है क्योंकि काल्पनिक प्राथमिकी और आरोप पत्र में हर राज्य की पुलिस को महारत है लेकिन पंजाब जैसा रचनात्मक कोई नहीं।

गैर भाजपाशासित राज्य अब केंद्र को जैसे का तैसा जवाब दे रहे हैं। इसीलिए भारतीय राजनीति में एमएडी सिद्धांत उभर रहा है।

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