बिजनेस स्टैंडर्ड - करीब 7.5 प्रतिशत की दर से आर्थिक वृद्धि पर्याप्त नहीं
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, May 26, 2022 04:54 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

करीब 7.5 प्रतिशत की दर से आर्थिक वृद्धि पर्याप्त नहीं

श्रम-रोजगार
महेश व्यास /  04 29, 2022

वर्ष 2020-21 की कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था और इसके श्रम बल को बड़ा झटका लगा है। हालांकि अब दोनों में सुधार दिख रहा है लेकिन इसमें पूरी समानता नहीं है। अर्थव्यवस्था और श्रम बल की बात करना दो अलग-अलग चीजें हैं। हैरानी की बात यह है कि इसी तरीके से हम आमतौर पर भारत में दोनों पहलुओं को देखते और समझते हैं। अर्थव्यवस्था को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और इसके घटकों के संदर्भ में समझा जाता है। श्रम को ऊपरी तौर पर जीडीपी से अलग समझा जाता है। हाल तक श्रम से जुड़े आंकड़ों की कमी मुश्किलें बढ़ा रही थी। लेकिन अब जीडीपी और रोजगार में वृद्धि साथ-साथ देखी जा सकती है।

वास्तविक जीडीपी में 2020-21 में 6.6 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है और 2021-22 में इसमें 8.95 प्रतिशत की तेजी आई है। सकल घरेलू उत्पाद (2011-12 के कीमतों के संदर्भ में) 2021-22 में 147.7 लाख करोड़ रुपये के दायरे में था जो महामारी से पहले 2019-20 में 145.2 लाख करोड़ रुपये था। इसीलिए महामारी की व्यापक स्तर पर शुरुआत होने से पहले वर्ष 2021-22 में वास्तविक जीडीपी, स्थिर कीमतों में लगभग 1.7 प्रतिशत अधिक थी। इसके विपरीत 2021-22 में रोजगार, 40.18 करोड़ के स्तर पर था जो महामारी से पहले के वर्ष 2019-20 में 40.89 करोड़ के रोजगार स्तर की तुलना में 1.7 प्रतिशत कम था। अब अर्थव्यवस्था और श्रमिकों की तादाद बिल्कुल विपरीत दिशाओं में है। आशावादी कह सकते हैं कि श्रम के उपयोग के लिहाज से अर्थव्यवस्था अधिक सक्षम हो गई है। लेकिन रोजगार का दायरा कम हुआ है और बेरोजगारों की संख्या 2019-20 में 3.29 करोड़ से बढ़कर 2021-22 में 3.33 करोड़ हो गई। लेकिन यह रोजगार में गिरावट के अनुरूप नहीं बढ़ी है। दूसरी तरफ रोजगार के मौके में 71 लाख की कमी आई लेकिन बेरोजगारों की संख्या में महज 4 लाख की बढ़ोतरी हुई। महामारी के बाद अपनी नौकरी खोने वाले शेष 67 लाख कामगारों ने रोजगार के अवसरों की उपलब्धता की कमी के कारण निराशा में नौकरी ढूंढना ही छोड़ दिया। श्रम बल के दायरे में 1.5 प्रतिशत तक की कमी आई लेकिन यह 2019-20 के 44.18 करोड़ से 2021-22 में 43.52 हो गया।

वास्तविक जीडीपी वृद्धि और रोजगार वृद्धि में अंतर वर्ष 2022-23 में जारी रह सकता है, हालांकि यह अंतर कम हो सकता है। पेशेवर तरीके से पूर्वानुमान लगाने वालों के बीच इस बात को लेकर आम सहमति (औसत मूल्य) यह है कि वास्तविक जीडीपी वृद्धि, वर्ष 2021-22 में दर्ज लगभग नौ प्रतिशत की वृद्धि के मुकाबले 7.5 प्रतिशत तक रहेगी।

ऐसे में सवाल यह है कि अर्थव्यवस्था के नई ऊंचाइयों पर पहुंचने पर श्रम क्षेत्र की स्थिति क्या हो सकती है? भारत में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि और रोजगार वृद्धि के बीच संबंध मजबूत नहीं रहे हैं। वर्ष 1993-94 से 2011-12 की अवधि में रोजगार में फीसदी बदलाव में वृद्धि 0.18 और 0.2 के बीच रहने का अनुमान लगाया गया है।

रोजगार के उपभोक्ता पिरामिड घरेलू सर्वेक्षण (सीपीएचएस) के अनुमानों से 2017-18 और 2021-22 के बीच रोजगार में फीसदी बदलाव वृद्धि बहुत अस्थिर है। ऐसा इसलिए है कि इस अवधि में लॉकडाउन के कारक पर भी गौर करना होगा। इस अवधि के दौरान औसत प्रतिशत बदलाव 0.23 तक रहा। पहले के इन आंकड़ों पर गौर करते हुए हम यह मान सकते हैं कि जीडीपी वृद्धि के रोजगार में फीसदी बदलाव 0.2 है। इसका अर्थ यह है कि अगर अर्थव्यवस्था 2022-23 में 7.5 प्रतिशत तक बढ़ जाती है तब रोजगार में 1.5 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद की जा सकती है। रोजगार 2021-22 के 40.18 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में 40.78 करोड़ हो सकता है। वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद में 7.5 प्रतिशत की वृद्धि से 2022-23 में 60 करोड़ अतिरिक्त नौकरियों के मौके तैयार हो सकते हैं।

जनसंख्या की प्रकृति को देखते हुए हम यह उम्मीद करते हैं कि वर्ष 2022-23 में कामकाजी उम्र वाली आबादी में लगभग 2.5 करोड़ की वृद्धि और होगी। अगर हम श्रम बल की भागीदारी दर को 2021-22 के 40.1 प्रतिशत के स्तर पर भी स्थिर रखते हैं तब 2022-23 में श्रम बल में लगभग 1.05 करोड़ का विस्तार हो सकता है। वर्ष 2022-23 में अतिरिक्त नौकरियों की मांग लगभग 1.05 करोड़ होने की संभावना है। यह 7.5 प्रतिशत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर के मुकाबले रोजगार में 60 लाख के अनुमानित विस्तार से 75 प्रतिशत अधिक है।

इसका मतलब यह है कि वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद में 7.5 प्रतिशत की अपेक्षित वृद्धि से बेरोजगारों की वर्तमान संख्या में 49 लाख और जुड़ जाएंगे। वर्ष 2021-22 में बेरोजगारों की संख्या 3.33 करोड़ थी जो अब बढ़कर 3.82 हो सकती है। इसका अर्थ यह है कि 2022-23 में बेरोजगारी दर 8.6 प्रतिशत थी।

बेरोजगारी में अनुमानित वृद्धि और बेरोजगारी दर काफी अधिक है। किसी भी वर्ष में 3.82 करोड़ बेरोजगारों की संख्या सबसे अधिक होगी। यह 2020-21 के महामारी वर्ष की तुलना में भी अधिक होगी। इसी तरह किसी भी वर्ष के लिहाज से देखें तो रिकॉर्ड की गई बेरोजगारी की दर सबसे अधिक होगी। रोजगार दर 2022-23 में 37 प्रतिशत से घटकर 36.7 प्रतिशत तक रह सकती है।

8.9 प्रतिशत की वृद्धि के बलबूते वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद में 7.5 प्रतिशत की वृद्धि आकर्षक है क्योंकि इसमें गिरावट के बाद 8.9 फीसदी की वृद्धि देखी गई थी। हालांकि इस वृद्धि से परेशानी यह है कि यह अतिरिक्त श्रम बल के लिए रोजगार के मौके तैयार नहीं करता जो साल भर में तैयार होती है। अब ऐसे में रोजगार वृद्धि में फीसदी बदलाव के दायरे को बढ़ाने की जरूरत है। इस बात पर ध्यान दिया जा सकता है कि 2022-23 की 40.78 करोड़ नौकरियों की तुलना में यह अब भी 2019-20 के 40.8 के आंकड़े से लगभग 11 लाख कम है।

Keyword: आर्थिक वृद्धि, रोजगार, लॉकडाउन, श्रम बल, जीडीपी, श्रमिक, बेरोजगार,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या सरकार को उधारी लक्ष्य बढ़ाने की जरूरत पड़ेगी?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.