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इंडोनेशियाई पाबंदी से और खौलेगा खाद्य तेल!

संजीव मुखर्जी, शर्लीन डिसूजा और एजेंसियां / नई दिल्ली/मुंबई April 28, 2022

इंडोनेशिया द्वारा पाम तेल के निर्यात पर रोक लगाए जाने से भारतीय बाजार में खाद्य तेल के दामों में तेज इजाफा हो सकता है। मगर इस बात पर राय बंटी हुई है कि कीमतें कितने समय तक चढ़ी रहेंगी क्योंकि इंडोनेशिया के पास पाम तेल का काफी भंडार है और उसे स्टॉक घटाने की जरूरत होगी।

भारत सहित दुनिया भर में पाम तेल का का इस्तेमाल खाद्य तेलों से लेकर कॉस्मेटिक्स उत्पादन और उत्पादों की साफ-सफाई में बड़े पैमाने पर किया जाता है। दुनिया के वनस्पति तेल की कुल आपूर्ति में इसकी हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी है और दुनिया के कुल वनस्पति तेल का एक-तिहाई निर्यात इंडोनेशिया द्वारा किया जाता है।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने बुधवार को खबर दी थी कि भारत आ रही करीब 2.90 लाख टन पाम तेल की खेप निर्यात पर रोक के कारण अटक गई है। इससे मई में घरेलू बाजार में खाद्य तेलों के दाम और बढ़ सकते हैं। रूस-यूक्रेन युद्घ के कारण पहले से ही खाद्य तेल के दाम में उबाल बना हुआ है।

जेमिनी एडबिल्स ऐंड फैट्स इंडिया के प्रबंध निदेशक प्रदीप चौधरी के हवाले से रॉयटर्स ने लिखा है, '16,000 टन की हमारी खेप इंडोनेशिया के कुमाई बंदरगाह पर अटक गई है।' कंपनी हर महीने इंडोनेशिया से करीब 30,000 टन पाम तेल खरीदती है।

चौधरी ने कहा, 'हमें नहीं पता कि इंडोनेशिया प्रतिबंध कब हटाएगा और अटकी खेप कब तक आ पाएगी।' भारत पाम तेल का दुनिया का सबसे बड़ा आयातक है और करीब आधी आपूर्ति के लिए वह इंडोनेशिया पर निर्भर है। इंडोनेशिया से भारत हर महीने करीब 7 लाख टन पाम तेल खरीदता है। भारत ही साल में 1.3 से 1.35 करोड़ टन खाद्य तेलों का आयात करता है, जिसमें पाम तेल की हिस्सेदारी करीब 80 से 85 लाख टन है। वनस्पति तेल ब्रोकर और सलाहकार फर्म सनविन समूह के मुख्य कार्याधिकारी संदीप बाजोरिया ने कहा कि खरीदार अब मलेशिया का रुख कर रहे हैं लेकिन वहां से मांग पूरी नहीं हो पाएगी।

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रबंध निदेशक बी वी महेता ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, 'मलेशिया हर साल करीब 1.9 करोड़ टन पाम तेल का उत्पादन करता है, जिसमें से 1.6 करोड़ टन निर्यात किया जाता है। ऐसे में अगर अन्य देश भी मलेशिया से खरीद शुरू कर देंगे तो हमारी सालाना 85 लाख टन की मांग पूरी करने के लिए वह तेल कहां से लाएगा।' टे्रडिंग फर्म जी जी पटेल ऐंड निखिल रिसर्च कंपनी के प्रबंध निदेशक गोविंदभाई पटेल ने कहा, 'बाजार में पाम तेल की किल्लत हो सकती है और आपूर्ति बढ़ाने का कोई तरीका नहीं है।'

पटेल ने कहा कि सीमित आपूर्ति के बीच अगले महीने शादी-विवाह और त्योहारों के कारण मांग भी तेज होगी जिससे कीमतों में इजाफा हो सकता है।मेहता ने कहा, 'पिछले कुछ दिनों में कच्चे पाम तेल के दाम 100 डॉलर प्रति टन बढ़कर 1,900 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गए है। आरबीडी पामोलीन भी 100 डॉलर बढ़कर 1,980 डॉलर प्रति टन हो गया है।'हालांकि अधिकतर व्यापारी और बाजार पर नजर रखने वालों का मानना है कि इंडोनेशिया लंबे समय तक रोक लगाकर नहीं रख सकता। मेहता ने कहा, 'इंडोनेशिया को 25 लाख टन पाम तेल का निर्यात करना होगा नहीं तो इसकी किल्लत होगी। मेरी समझ में घरेलू बाजार में इसकी कीमत 1,800 डॉलर प्रति टन तक पहुंच सकती है। प्रतिबंध हटाए जाने के बाद कीमतें स्थिर हो सकती हैं।'

क्रिसिल रिसर्च ने एक नोट में कहा है कि इंडोनेशिया में 2022 में पाम तेल का उत्पादन करीब 4.7 करोड़ टन रहने की उम्मीद है, जो पिछले साल के मुकाबले 5 फीसदी अधिक है। इनमें से कुल निर्यात करीब 2.8 करोड़ टन रह सकता है, जो कुल उत्पादन का 60 फीसदी से अधिक होगा।

उद्योग से बातचीत में क्रिसिल ने कहा कि मई 2022 में इंडोनेशिया में पाम तेल का उत्पादन करीब 40 लाख टन कम रह सकता है। मई में निर्यात नहीं होने और 15 लाख टन घरेलू खपत के साथ इंडोनेशिया में इसका भंडार करीब 60 से 65 लाख टन रहेगा जबकि सालाना औसत भंडार 35 लाख टन रहेगा।क्रिसिल ने कहा कि इंडोनेशिया के तेलशोधकों के पास ज्यादा भंडारण क्षमता नहीं है जिससे पाम तेल का दाम घरेलू बाजार 14,000 रुपैया (इंडोनेशियाई मुद्रा) प्रति लीटर हो सकती है। इसके बाद सख्त नियमन के साथ निर्यात से पाबंदी हटाई जा सकती है। इससे भारतीय बाजार में भी तेल के दाम घट सकते हैं।

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