बिजनेस स्टैंडर्ड - आरकैप के पुनर्गठन में होगी देरी
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आरकैप के पुनर्गठन में होगी देरी

देव चटर्जी / मुंबई April 10, 2022

रिलायंस कैपिटल के ऋण समाधान में काफी देरी हो गई है क्योंकि रिलायंस कैपिटल की सहायक इकाइयों की समाधान प्रक्रिया को लेकर लेनदारों और प्रशासकों के बीच मतभेद पैदा हो गया है। ऐसी करीब 50 कंपनियों को समाधान योजना संबंधी दस्तावेज जारी नहीं किए गए हैं जिन्होंने मार्च में अभिरुचि पत्र जमा कराए थे।

एक बैंकिंग सूत्र ने कहा कि प्रशासक की ओर से 5 अप्रैल को आवेदकों को समाधान योजना के लिए आग्रह पत्र जारी किए गए थे लेकिन कुछ मुद्दों पर मतभेद पैदा हो गया है जैसे क्या विकल्प 2 के तहत व्यक्तिगत क्लस्टर के लिए मूल्य बोली आमंत्रित की जानी चाहिए और विकल्प 2 के तहत कलस्टर स्तर के तहत बोलीदाता ऋण शोधन 

अक्षमता एवं दिवालिया संहिता के अनुरूप समाधान योजना कैसे जमा करा सकता है?

इस प्रक्रिया के तहत प्रशासक ने दो विकल्पों के तहत अभिरुचि पत्र आमंत्रित किए थे। पहले विकल्प के तहत रिलायंस कैपिटल स्तर पर समेकित समाधान के लिए योजना प्रस्तुत करना था जबकि दूसरे विकल्प के तहत आठ कारोबारी क्लस्टरों/ सहायक इकाइयों के लिए अलग-अलग समाधान योजना जमा करने की बात कही गई थी। रिलायंस कैपिटल के प्रमुख कलस्टरों में रिलायंस जनरल इंश्योरेंस, रिलायंस हेल्थ इंश्योरेंस, रिलायंस निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस, रिलायंस ऐसेट रीकंस्ट्रक्शन और रिलायंस सिक्योरिटीज शामिल हैं। इस मामले से अवगत एक सूत्र ने बताया कि आईबीसी 2016 के तहत विकल्प 2 (व्यक्तिगत कारोबारी क्लस्टर) के तहत कोई अनुपालन योजना जमा नहीं कराई जा सकती है। दरअसल ये कंपनियां अच्छी तरह परिचालन में है और इसलिए इनके लिए पुनरुद्धार की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि मौजूदा परिस्थिति में केवल विकल्प 1 के तहत समाधान योजना को रिलायंस कैपिटल के स्तर पर मंजूरी दी जा सकती है।

लेनदारों की समिति और प्रशासक के बीच इस मुद्दे पर भी मतभेद बना हुआ है कि समेकित स्तर पर समाधान योजना जमा कराने के लिए क्लस्टर स्तर पर बोलीदाओं का कंसोर्टियम बनाया जाए। प्रशासक ने इसका विरोध किया है। क्लस्टर स्तर के बोलीदाताओं का कंसोर्टियम बनाने के ढांचे पर भी लेनदारों और प्रशासक के बीच बातचीत जारी है।

लेनदारों और प्रशासक के बीच मतभेद का एक अन्य मुद्दा यह भी है कि समाधान योजना का उपयुक्त प्रदर्शन न होने पर किसी जिम्मेदारी होगी। क्या इसके लिए  कंसोर्टियम के सभी भागीदारों की संयुक्त देनदारी होगी जिसके लिए लेनदारों की समिति जोर दे रही है। प्रशासक परिसंपत्तियों की बिक्री प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अदालत से तीन महीने का अतिरिक्त समय लेने की योजना बना रहा है।

रिलायंस कैपिटल द्वारा ऋण की अदायगी में चूक के बाद पिछले साल 29 नवंबर को भारतीय रिजर्व बैंक ने ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता 2016 के तहत रिलायंस कैपिटल के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू की थी। पिछले साल 6 दिसंबर को नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने आरबीआई की याचिका को स्वीकर करते हुए ऋण समाधान की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके तहत वाई नागेश्वर राव को रिलायंस कैपिटल का प्रशासक नियुक्त किया गया था।

रिलायंस कैपिटल की मुनाफा कमाने वाली बीमा इकाई के लिए अभिरुचि पत्र जमा कराने वाली कंपनियों में टाटा एआईजी, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड और निप्पॉन लाइफ भी शामिल हैं।
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