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शेयरधारकों के लिए कितना मुफीद है विलय

निकिता वशिष्ठ / नई दिल्ली April 04, 2022

एचडीएफसी और एचडीएफसी बैंक के विलय को भारत के सबसे बड़े कॉरपोरेट विलय के तौर पर देखा जा रहा है और यही वजह है कि इन दोनों कंपनियों के शेयरों में अच्छी तेजी देखने को मिली है। हाउसिंग फाइनैंस डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एचडीएफसी) का शेयर 9 प्रतिशत चढ़ गया जबकि एचडीएफसी बैंक में 10 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली। तुलनात्मक तौर पर सोमवार को बीएसई का सेंसेक्स 2.2 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ।

हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों को अपनी उम्मीदें कुछ कम रखने की जरूरत है, क्योंकि इस विलय को नियामकीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

ऐक्सिस बैंक-मैक्स फाइनैंशियल सौदे से रुझानों को ध्यान में रखते हुए विश्लेषकों का कहना है कि बैंकिंग नियामक ने ऐक्सिस बैंक को जीवन बीमा कंपनी में स्वयं बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने की अनुमति नहीं दी है। उनका मानना है कि यह बदलाव एचडीएफसी-एचडीएफसी बैंक विलय के लिए भी सही साबित हो सकता है।

एक स्वतंत्र बाजार विश्लेषक अजय बोडके ने कहा, 'एचडीएफसी की एचडीएफसी लाइफ में पहले से ही करीब 48 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसे देखते हुए संयुक्त कंपनी की स्वयं बड़ी हिस्सेदारी होने की संभावना है। हालांकि यह आरबीआई की तय 20 प्रतिशत सीमा से ऊपर है। इस वह से निवेशकों को इन मोर्चों से संबंधित घटनाक्रम पर नजर रखने की जरूरत होगी। भले ही एचडीएफसी-एचडीएफसी बैंक ने अगले 18 महीनों के दौरान अपनी हिस्सेदारी घटाने का निर्णय लिया है, लेकिन निवेशकों को यह समझने की जरूरत होगी कि क्या बाजार में एचडीएफसी लाइफ के शेयरों की इस तरह की भारी आपूर्ति को खपाने की क्षमता है या नहीं।'

वर्ष 2020 में, आरबीआई ने मैक्स लाइफ इंश्योरेंस में प्रत्यक्ष रूप से हिस्सेदारी खरीदने के ऐक्सिस बैंक के अनुरोध को ठुकरा दिया था। निजी क्षेत्र के इस ऋणदाता ने अपनी सहायक इकाइयों ऐक्सिस कैपिटल लिमिटेड और ऐक्सिस सिक्योरिटीज लिमिटेड के साथ मिलकर मैक्स लाइफ में 19 प्रतिशत हिस्सा खरीदने को कहा था। इन्वेसक्यू इन्वेस्टमेंट एडवायजर्स में मुख्य अधिकारी एवं फंड प्रबंधक सिद्घार्थ पुरोहित ने भी कहा कि आरबीआई द्वारा मामले के प्रबंधन के तरीके पर नजर रखे जाने की जरूरत होगी।

विदेशी निवेशक की हिस्सेदारी

विश्लेषकों का यह भी कहना है कि निवेशकों को इस पर भी ध्यान देने की जरूरत होगी कि विदेशी निवेशकों की कितनी पूंजी विलय वाली इकाई में शामिल की जाएगी, और यदि क्या इसकी वजह से घरेलू म्युचुअल फंडों द्वारा हिस्सेदारी में किसी तरह की कमी आएगी।

बोडके ने कहा, 'घरेलू म्युचुअल फंड अपनी पूरी राशि का 10 प्रतिशत हिस्सा एक इकाई में रख सकते हैं। हालांकि विलय वाली इकाई यह निर्धारित करेगी कि प्रतिशत संबंधित सीमा का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है। इसे देखते हुए कितनी हिस्सेदारी एमएफ इसमें घटाएंगे, और एफपीआई प्रवाह पर्याप्त होगा, इन सब पर निवेशकों को नजर रखे जाने की जरूरत होगी।'

दिसंबर 2021 तक, एचडीएफसी में एफपीआई हिस्सेदारी 72 प्रतिशत पर पहले से ही थी, जबकि एचडीएफसी बैंक का हिसा 37.5 प्रतिशत था। एचडीएफसी बैंक और एचडीएफसी द्वारा जारी संयुक्त बयान के अनुसार, इस विलय के बाद एफपीआई शेयरधारिता के लिए 7 प्रतिशत की गुंजाइश पैदा हुई है, क्योंकि ट्रेजरी स्टॉक रद्द हो जाएगा।


छोटे निवेशकों के लिए

स्थिति कैसी रहेगी

इस सौदे की वजह से, एचडीएफसी लिमिटेड के शेयरधारकों को 25 शेयरों के लिए एचडीएफसी बैंक के 42 शेयर मिलेंगे। ऋणदाता में आवास वित्त कंपनी द्वारा धारित शेयर समाप्त हो जाएंगे, जिससे एचडीएफसी बैंक एक संपूर्ण सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी बन जाएगी।

एचडीएफसी बैंक पर सार्वजनिक शेयरधारकों का 100 प्रतिशत स्वामित्व होगा और एचडीएफसी लिमिटेड के मौजूदा शेयरधारकों का 41 प्रतिशत हिस्सा।

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