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एचडीएफसी का बैंक में विलय

मनोजित साहा और सुब्रत पांडा / मुंबई April 04, 2022

देश की सबसे बड़ी आवास वित्त कंपनी एचडीएफसी लिमिटेड और निजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक एचडीएफसी बैंक ने आज ऐलान किया कि उनके निदेशक मंडलों ने दोनों कंपनियों के विलय प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। योजना के तहत एचडीएफसी बैंक में एचडीएफसी का विलय होगा और यह एकीकरण पूरी तरह से शेयरों में किया जाएगा। एकीकृत इकाई का बाजार मूल्य करीब 40 अरब डॉलर होगा। अभी एचडीएफसी बैंकिंग कंपनी की प्रवर्तक इकाई है।

विलय दो चरण में होगा। एचडीएफसी के पूर्ण स्वामित्व वाली इकाइयों एचडीएफसी इन्वेस्टमेंट्स और एचडीएफसी होल्डिंग्स का विलय पहले एचडीएफसी में किया जाएगा। उसके बाद एचडीएफसी का एचडीएफसी बैंक में विलय किया जाएगा। फिलहाल एचडीएफसी बैंक में एचडीएफसी की सहायक इकाइयों के साथ 21 फीसदी हिस्सेदारी है। विलय की समूची प्रक्रिया को दोनों फर्मों के शेयरधारकों, भारतीय रिजर्व बैंक, स्टॉक एक्सचेंजों, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) तथा अन्य नियामकों से मंजूरी लेनी होगी, जिसमें 15 से 18 महीने का वक्त लगेगा। मंजूरी मिलने तक एचडीएफसी और एचडीएफसी बैंक का परिचालन पहले की तरह अलग-अलग होता रहेगा। आरबीआई के अनुसार एचडीएफसी बैंक घरेलू स्तर पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बैंक है।

एचडीएफसी के एचडीएफसी बैंक में विलय के लिए शेयरों की अदला-बदली का अनुपात भी तय हो चुका है। एचडीएफसी के 2 रुपये अंकित मूल्य वाले प्रत्येक 25 पूर्ण चुकता शेयरों पर एचडीएफसी बैंक के 1 रुपये अंकित मूल्य वाले 42 शेयर दिए जाएंगे। विलय के बाद एचडीएफसी बैंक शत-प्रतिशत आम शेयरधारकों की कंपनी बन जाएगी और एचडीएफसी के मौजूदा शेयरधारकों के पास एचडीएफसी बैंक के 41 फीसदी शेयर होंगे।

एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख ने कहा, '45 वर्षों के दौरान 90 लाख से अधिक ग्राहकों को आवास ऋण मुहैया कराने वाली कंपनी के लिए नया घर तलाशने का यह सही समय है। हमारा नया घर हमारे परिवार और अपने लोगों के साथ होगा, लेकिन यह बड़ा, बेहतर और ज्यादा भरोसमंद होगा।'

नियामक द्वारा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और बैंकों के संचालन के लिए समान नियमन लागू करने के निर्णय ने एचडीएफसी को इस सौदे के लिए प्रेरित किया क्योंकि नए कायदों से एनबीएफसी के लिए अतीत की तरह परिचालन करना और मुनाफा कमाना कठिन हो जाएगा।

विलय की एक वजह यह भी रही कि दोनों कंपनियों के प्रबंधन को लगा कि ब्याज दरें अभी अनुकूल हैं और अतिरिक्त तरलता संबंधी जरूरतों के लिए बैंक को पूंजी की लागत  कम आएगी।

एचडीएफसी के वाइस चेयरमैन और मुख्य कार्याधिकारी केकी मिस्त्री ने कहा, 'हम इसका कई वर्षों से मूल्यांकन कर रहे थे। अतीत में ऐसा नहीं करने के पीछे कई कारण थे। उस समय नकद आरक्षित अनुपात और सांविधिक तरलता अनुपात वर्तमान स्तर से काफी अधिक था। इसके साथ ही अभी ब्याज दर भी काफी कम है।' मिस्त्री ने कहा कि आज विलय की वित्तीय लागत सीमित है। विलय के बाद हमारा ईपीएस पहले दिन से ही सकारात्मक होगा क्योंकि एचडीएफसी बैंक में हमारी 21 फीसदी शेयरधारिता खत्म हो जाएगी।

पारेख ने कहा कि एचडीएफसी बैंक ने बैंकिंग नियामक से सीआरआर और एसएलआर, एचडीएफसी ऋण के लिए प्राथमिक क्षेत्रों को उधारी देने के अनुपालन के लिए चरणबद्घ दृष्टिकोण अपनाने का अनुरोध किया है।

मैक्वायरी की रिपोर्ट के अनुसार बैंक को एसएलआर-सीआरआर के लिए करीब 70,000 से 80,000 करोड़ रुपये की जरूरत होगी और प्राथमिक क्षेत्र के उधारी नियमों को पूरा करने के लिए कृषि पोर्टफोलियो में 90,000 करोड़ रुपये का इजाफा करना होगा। हालांकि विलय से बैंक के उत्पाद का पोर्टफोलियो बढ़ जाएगा। इसके साथ ही आवास ऋण बाजार में तेजी आने से एचडीएफसी बैंक के उत्पाद का आधार भी बढ़ जाएगा क्योंकि उसके प्रतिस्पर्धी ऋणदाताओं के पास इतना अधिक मॉर्गेज ऋण पोर्टफोलियो नहीं है।

एचडीएफसी बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी शशिधर जगदीशन ने कहा, 'आवास ऋण में हमने पिछले पांच साल में 25 फीसदी सालाना चक्रवृद्घि दर से विकास किया है, इसके बावजूद हमारे खाते में इसकी हिस्सेदारी केवल 11 फीसदी है। नियामक से मंजूरी मिलने के बाद हमारे पास अपने सभी वितरण नेटवर्क में मॉर्गेज उत्पादों का विस्तार करने का मौका होगा।'

जहां तक नेतृत्व की बात है तो जगदीशन बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी के तौर पर एकीकृत इकाई की अगुआई करेंगे। हालांकि विलय के बाद एचडीएफसी के वाइस चेयरमैन और प्रबंध निदेशक केकी मिस्त्री की भूमिका क्या होगी, उसके बारे में अभी स्पष्टता नहीं है। पारेख ने अपनी मंशा स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी उम्र अब बैंक के बोर्ड में शामिल होने की नहीं रही।

पारेख ने कहा, 'आरबीआई के नियम के मुताबिक 75 साल से अधिक उम्र का कोई भी व्यक्ति बैंक के बोर्ड में शामिल नहीं हो सकता है। मैं इस सीमा को पहले ही पार कर चुका हूं, इसलिए मैं बैंक के बोर्ड में नहीं रह सकता। जहां तक केकी मिस्त्री की बात है तो वह अभी 67 साल के हैं। ऐसे में वह एक-डेढ़ साल बैंक के बोर्ड के निदेशक रह सकते हैं।'

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