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पोर्टफोलियो में शेयर हैं कम तो ईएलएसएस में लगाएं रकम

सर्वजीत के सेन /  March 20, 2022

वित्त वर्ष 2021-22 में आयकर बचाने के लिए निवेश करने की आखिरी तारीख 31 मार्च है और इसमें अब चंद दिन ही बचे हैं। अगर आपने अभी तक कर बचत के लिहाज से निवेश नहीं किया है या समय की कमी से ऐसा नहीं कर पाएं हैं तो आपके पास बहुत कम वक्त बचा है। मगर शेयर बाजार आपके लिए नियामत बन सकते हैं। पिछले कुछ दिनों में शेयर बाजार में जिस तरह की तेज गिरावट आई है, वह उन लोगों के लिए काम की है, जो कर बचाने वाले फंडों में निवेश करने की चाहत रखते हैं।

राइट होराइजन्स के संस्थापक और मुख्य कार्य अधिकारी (सीईओ) अनिल रेगो भी ऐसी ही सलाह देते हैं। वह कहते हैं, 'इस बार की गिरावट निवेशकों को इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ईएलएसएस) में निवेश शुरू करने का अच्छा मौका दे रही है। इक्विटी फंडों का शुद्घ परिसंपत्ति मूल्य (एनएवी) नीचे आ गया है, इसलिए निवेशकों को इस समय निवेश की गई रकम से ज्यादा संख्या में यूनिट मिल जाएंगी। शेयरों की कीमत भी इस समय काफी आकर्षक है।'


जांचिए संपत्ति आवंटन

ईएलएसएस कम से कम 80 फीसदी रकम शेयरों में लगाते हैं। इन फंडों में आप जितनी चाहें रकम लगाएं मगर उसमें से अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर आपको आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत कर छूट का फायदा मिल सकता है।

जीवन बीमा पॉलिसी में आपको हर साल प्रीमियम भरना पड़ता है और लोक भविष्य निधि (पीपीएफ) में भी हर साल रकम डालना जरूरी होता है। मगर ईएलएसएस में हर साल निवेश करने की बाध्यता नहीं है। बस एक शर्त है - संपत्ति मूल्य और प्रतिफल में आने वाले उतार-चढ़ाव को बरदाश्त करने की कुव्वत आपके भीतर होनी चाहिए क्योंकि इक्विटी फंड में निवेश करने पर यह सब झेलना ही पड़ता है।

धारा 80सी के तहत कर योग्य आय में कटौती की सुविधा आपको निवेश की कई अन्य योजनाओं में भी मिलती है मसलन यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (यूलिप), पीपीएफ, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस), कर बचाने के लिए 5 साल का फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी), जीवन बीमा योजना, राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी) और वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (एससीएसएस)।

निवेशक को सबसे पहले देख लेना चाहिए कि उसके पास पर्याप्त जीवन बीमा कवर है या नहीं। अगर जीवन बीमा कवर में कुछ कमी लग रही है तो सबसे पहले टर्म बीमा खरीदना उचित है। अगर जीवन बीमा में किसी तरह की कसर नहीं रह गई है तब अपना पैसा निवेश के किसी विकल्प में लगाना ठीक रहता है। मगर इसमें भी सवाल आता है कि इक्विटी योजना में निवेश करें या डेट योजना में। इसका जवाब तब मिलेगा, जब निवेशक अपने संपत्ति आवंटन पर नजर दौड़ाएगा। निवेशक को महसूस होता है कि इक्विटी में उसका आवंटन कुछ कम है तो ईएलएसएस उसके लिए अच्छा विकल्प है।

माईवेल्थग्रोथ डॉट कॉम के सह-संस्थापक हर्षद चेतनवाला कहते हैं, 'आप 80सी के तहत मिलने वाली 1.5 लाख रुपये की समूची निवेश सीमा ईएलएसएस में लगा सकते हैं। अगर आप निवेश में विविधता चाहते हैं तो आप ईएलएसस के साथ पीपीएफ पर भी विचार कर सकते हैं।'


लॉक-इन का फायदा

ईएलएसएस की लॉक-इन अवधि तीन साल होती है यानी उसमें निवेश करने पर कम से कम तीन साल के लिए रकम फंस जाती है। यह सबसे कम लॉक-इन अवधि है। 80 सी के तहत कर छूट का फायदा दूसरी जिन भी निवेश योजनाओं में मिलता है, उन सबमें और भी लंबे अरसे के लिए रकम फंसानी पड़ती है।

मगर लॉक-इन अवधि निवेशक के लिए फायदे की बात हो सकती है। रेगो इसकी वजह भी बताते हैं। वह कहते हैं, 'लंबे अरसे में लॉक-इन अवधि ईएलएसएस के जरिये बेहतर प्रतिफल देने में कारगर होती है। इसके कारण ओपन-एंडेड फंड की तुलना में अधिक प्रतिफल मिलता है। ओपन-एंडेड फंड में निवेशकों को पूरी तरलता हासिल होती है क्योंकि उनमें लॉक-इन अवधि नहीं होती। इसलिए जैसे ही बाजार लुढ़कता है, इन फंडों से भारी मात्रा में रकम निकाल ली जाती है। इसी तरह जब बाजार तेजी के घोड़े पर सवार होता है तो निवेशक इनमें जमकर रकम लगाने लगते हैं। इस वजह से इन फंडों के प्रदर्शन पर भी असर पड़ता है क्योंकि फंड प्रबंधकों को कम मूल्यांकन (यूनिट भुनाए जाने के कारण) पर बिकवाली करनी पड़ती है और ज्यादा कीमत (ज्यादा आवक आने के कारण) पर लिवाली करनी पड़ती है।'

धारा 80सी के तहत कर छूट का फायदा देने वाली जो भी स्थिर आय योजनाां हैं, उनकी तुलना में लंबी अवधि में ईएलएसएस बेहतर प्रतिफल दे सकते हैं।


उचित फंड का चुनाव

निवेश करने से पहले ईएलएसएस के पोर्टफोलियो पर अच्छी तरह नजर डाल लेनी चाहिए। वेल्थ लैडर डायरेक्ट के संस्थापक और प्रिंसिपल ऑफिसर एस श्रीधरन समझाते हैं, 'जिस निवेशक में जोखिम लेने की अधिक भूख नहीं है, उसे ऐसा फंड चुनना चाहिए, जिसका ज्यादातर निवेश लार्ज-कैप शेयरों में ही होता है। जो निवेशक जोखिम लेने से बिल्कुल भी नहीं कतराता है, वह मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंडों में ज्यादा निवेश करने वाले फंडों पर दांव खेल सकता है।'

मगर एक बात जरूर ध्यार रखें। जब भी कोई योजना चुनें तो पिछले साल सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले फंड से दूरी बरतना ही बेहतर है। उसके बजाय ऐसा फंड चुनें, जो लंबे अरसे से लगातार सधा हुआ प्रदर्शन कर रहा है और जिस फंड प्रबंधन की निगरानी में उसने ऐसा प्रदर्शन किया है, वही प्रबंधक अब भी उस फंड को संभाल रहा है।

ईएलएसएस फंड से रकम निकालने में भी जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। अच्छी संपत्ति बनानी है तो धैर्य रखना सीखना चाहिए। चेतनवाला कहते हैं, 'तीन साल की लॉक-इन अवधि पूरी होने के बाद भी उसमें से रकम नहीं निकालें। अगर फंड दूसरे ईएलएसएस फंडों की तुलना में और विविधता वाले अन्य इक्विटी फंडों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है तो उसमें सात साल या उससे ज्यादा अवधि के लिए निवेश बनाए रखें। बाजार के मौजूदा माहौल में ईएलएसएस में कुछ समय के लिए उतार-चढ़ाव आएगा मगर लंबे अरसे में ये अच्छा प्रतिफल देंगे।'

मगर हर साल ईएलएसएस योजना में पैसा लगाना समझदारी नहीं है और इससे बचना चाहिए। सोच-समझकर चुनी किसी एक योजना में निवेश किए रहें ताकि आपके पोर्टफोलियो में बेजा भीड़ नहीं बढ़ जाए। अगर आप अपने पोर्टफोलियो में विविधता चाहते हैं तो कर बचत से इतर अपने निवेश को विभिन्न इक्विटी फंडों में लगाते रहें।

Keyword: पोर्टफोलियो, शेयर, ईएलएसएस, आयकर, निवेश, संपत्ति आवंटन, पीपीएफ, एनपीएस,
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