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भारतीय बाजारों पर ध्यान केंद्रित करेंगे एफपीआई

पुनीत वाधवा / नई दिल्ली March 20, 2022

जेफरीज में इक्विटी रणनीति के वैश्विक प्रमुख क्रिस्टोफर वुड का मानना है कि अक्टूबर से भारतीय इक्विटी में पैसा लगाने के बाद बिकवाली करने विदेशी निवेशकों द्वारा फिर से अपने रुख बदलाव किए जाने की संभावना है, क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था कई समस्याओं को देखते हुए मजबूत होती दिख रही है।

वुड ने निवेशकों को लिखी अपनी ताजा रिपोर्ट 'ग्रीड ऐंड फियर' में कहा है, 'डेल्टा लहर के बाद गैर-तेल एवं गैस आयात में मजबूत सुधार का असर आर्थिक सुधार पर दिखा है। यदि तेल करीब 100 डॉलर प्रति बैरल पर भी बना रहता है तो भी भारत अगले वित्त वर्ष 7 प्रतिशत वृद्घि दर हासिल करने के करीब दिख रहा है, क्योंकि उसे आवासीय संपत्ति चक्र में सुधार से मदद मिली है। कई विदेशी निवेशकों ने ऊंची दरों के बीच आर्थिक चक्र की मजबूती को समझा है और भारतीय इक्विटी में विदेशी प्रवाह फिर से तेज होने की अच्छी संभावना है।'

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) भारत से बिकवाली कर निकल गए और उन्होंने अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा उम्मीद से पहले दर वृद्घि की आशंकाओं के बीच अक्टूबर से शेयर बिक्री पर जोर दिया। यूक्रेन पर रूसी हमले ने भी उनकी चिंताएं बढ़ा दी हैं।

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज द्वारा कराए गए ताजा विश्लेषणों से पता चलता है कि एफपीआई द्वारा पिछले 12 महीने की 36 अरब डॉलर की बिकवाली दर्ज की जो 2008 वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान दर्ज 28 अरब डॉलर के मुकाबले ज्यादा है। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की रिपोर्ट में कहा गया कि 2008 संकट के दौरान एफपीआई बिक्री का प्रभाव ज्यादा भयंकर था और उस वजह से सेंसेक्स जनवरी 2008 के 20,800 के ऊंचे स्तरों से करीब 70 प्रतिशत टूटकर अक्टूबर 2008 में 8,500 रह गया।

वुड ने लिखा है, 'भारतीय शेयर बाजार को संकटग्रस्त समय का सामना करना पड़ा है और साल में अब तक के आधार पर ज्यादा गिरावट दर्ज की, क्योंकि उसे घरेलू पूंजी प्रवाह से शुद्घ विदेशी बिकवाली दबाव की भरपाई करने में पूरी तरह मदद नहीं मिली। रुपये के संदर्भ में दबाव पहले ही दिखा है, जो 7 मार्च के निचले स्तर पर पहुंच गया। गैर-तेल एवं गैर-स्वर्ण आयात यूक्रेन संकट की वजह से आई तेल में तेजी से पहले ही फरवरी में 20 प्रतिशत की दो वर्षीय सालाना दर से पहले ही बढ़ चुका है। वित्त वर्ष 2023 में  डॉलर प्रति बैरल की औसत तेल कीमत को ध्यान में रखते हुए चालू खाता घाटा जीडीपी के 2.8 प्रतिशत की 10 वर्षीय ऊंचाई पर पहुंच सकता है।'


पूंजी प्रवाह

मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज (एमओएफएसएल) की रिपोर्ट के अनुसार, डीआईआई ने मार्च 2020 से भारतीय इक्विटी में फरवरी में 5.6 अरब डॉलर का अपना सर्वाधिक पूंजी प्रवाह दर्ज किया, जब एफआईआई ने लगातार पांचवें महीने 5 अरब डॉलर की निकासी की।

एमओएफएसएल की रिपोर्ट में कहा गया है, 'निवेशक म्युचुअल फंडों में लगातार निवेश कर रहे हैं और फरवरी 2022 में उन्होंने एसआईपी में लगातार निवेश किया और।'

एमओएफएसएल की रिपोर्ट में कहा गया है कि फरवरी में वैल्यू में सर्वाधिक गिरावट दर्ज करने वाले शीर्ष-5 में से 4 शेयर बैंकिंग क्षेत्र से थे। आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एचडीएफसी बैंक, ऐक्सिस बैंक, लार्सन ऐंड टुब्रो, एनटीपीसी, भारती एयरटेल, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड, और एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस ने मासिक आधार पर वैल्यू के संदर्भ में कमजोरी दर्ज की।

वहीं दूसरी तरफ, मासिक आधार पर वैल्यू में सर्वाधिक वृद्घि वाले शेयर थे इन्फोसिस, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा स्टील, एवेन्यू सुपरमाट्र्स, चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट ऐंड फाइनैंस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, सिप्ला, दिवीज लैब्स और टाइटन।

Keyword: भारतीय बाजार, एफपीआई, जेफरीज, इक्विटी, रणनीति, क्रिस्टोफर वुड,
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