बिजनेस स्टैंडर्ड - क्या भू-राजनीतिक घटनाक्रम से बेपरवाह रह सकता है रिजर्व बैंक?
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, May 24, 2022 03:00 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

क्या भू-राजनीतिक घटनाक्रम से बेपरवाह रह सकता है रिजर्व बैंक?

बैंकिंग साख
तमाल बंद्योपाध्याय /  March 16, 2022

मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की फरवरी में हुई बैठक में रीपो रेट और रिवर्स रीपो रेट अपरिवर्तित रखी गई थीं। एमपीसी ने यह भी कहा था कि जरूरत महसूस होने तक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) उदार एवं लचीला रुख जारी रखेगा। दुनिया के दूसरे केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरों में इजाफा शुरू कर दिया है। भारत में खुदरा महंगाई दर वित्त वर्ष 2023 में 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। सभी जोखिमों को ध्यान में रखते हुए विस्तृत विश्लेषण और व्यापक चर्चा के बाद यह अनुमान व्यक्त किया गया था। मगर यह अनुमान तब जारी किया गया था जब कच्चे तेल के दाम 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब थे। पिछले एक पखवाड़े में कच्चा तेल 147.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया और बाद में घट कर 111.20 डॉलर प्रति बैरल रह गया। क्या आरबीआई उदार रवैया जारी रख सकता है और अगले महीने नीतिगत दरें बढ़ाने से दूर रह सकता है?  पिछले दिनों आरबीआई ने 5 अरब डॉलर का 'स्वैप ऑक्शन' (डॉलर की बिक्री और निश्चित अवधि के  बाद इसकी खरीद) किया था। जब 21 फरवरी को इस बात की घोषणा हुई थी तो विश्लेषक कयास लगा रहे थे कि आखिर इस 'स्वैप ऑक्शन' का उद्देश्य क्या है। कई लोगों को लगा कि केंद्रीय बैंक सरकार को रकम

अंतरित करने के लिए अपने बहीखाते का आकार छोटा कर रहा है जबकि कुछ को लगा कि भारतीय जीवन बीमा निगम (आरबीआई) के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) से बड़ी मात्रा में विदेशी रकम आएगी इसलिए स्थानीय मुद्रा में संभावित तेजी रोकने का यह एक उपाय है। मगर तब से परिस्थितियां काफी बदल गई हैं। 7 मार्च को डॉलर की तुलना में रुपया 76.97 के नए निचले स्तर पर पहुंच गया। 8 मार्च तक दस दिनों के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) 53,000 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों की बिकवाली कर चुके थे। मार्च के पहले सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मध्य नवंबर 2021 के 640.40 अरब डॉलर के स्तर से कम होकर 631.90 लाख करोड़ डॉलर रह गया।

5 अरब डॉलर 'स्वैप ऑक्शन' के लिए 13.56 अरब डॉलर मूल्य की बोलियां आईं। आरबीआई ने दो वर्ष के स्वैप सौदे के लिए 5.13 अरब डॉलर स्वीकार किए। इसका मतलब हुआ कि वित्तीय प्रणाली से लगभग 40,000 करोड़ रुपये निकाले जाएंगे। प्रत्येक डॉलर के लिए उतनी ही मात्रा में वित्तीय प्रणाली से रुपये की निकासी करनी पड़ती है। इस समय वित्तीय प्रणाली में नकदी की कोई कमी नहीं है इसलिए किसी को शिकायत नहीं होगी।

मगर यह तो कहानी का एक हिस्सा है। कच्चे तेल के दाम अचानक बढऩे से पूरा मामला बिगड़ सकता है। बजट अनुमान इस बात पर आधारित हैं कि इस वर्ष कच्चे तेल का दाम 75 डॉलर प्रति बैरल रहेगा। अगर सरकार तेल के बढ़े दाम का वहन करेगी तो इसका असर राजकोषीय स्थिति पर दिखेगा और आरबीआई को सरकार की भारी भरकम उधारी कार्यक्रम को अंजाम तक पहुंचाना होगा। वित्त वर्ष 2023 में सरकार ने बाजार से 14.31 लाख करोड़ रुपये उधार लेने की बात कही है। समायोजन के बाद यह आंकड़ा 11.186 लाख करोड़ रुपये रहेगा जो चालू वित्त वर्ष के 9.348 लाख करोड़ रुपये से फिर भी काफी अधिक होगा। राज्यों की उधारी भी जोड़ दें तो सकल उधारी वित्त वर्ष 2023 में 22.5 लाख करोड़ रुपये रहेगी।

बजट में राजस्व को लेकर सतर्कतापूर्ण अनुमान के बावजूद क्या हम अगले वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटा 6.4 प्रतिशत रख पाएंगे? तेल के दाम ऊंचे स्तर पर रहे तो क्या आरबीआई 10 वर्ष की अवधि के बॉन्ड पर प्रतिफल 7 प्रतिफल से नीचे रखकर उधारी कार्यक्रम का प्रबंधन कर पाएगा? अगर सरकार तेल के बढ़े दाम का बोझ उपभोक्ताओं पर डालेगी तो महंगाई बढ़ेगी। ऐक्सिस बैंक के एक अनुमान के अनुसार पेट्रोल एवं डीजल के दाम में प्रत्येक 10 प्रतिशत बढ़ोतरी से खुदरा महंगाई 50-60 आधार अंक तक बढ़ जाती है। इनमें 20-25 आधार अंक का प्रत्यक्ष असर होता है और 30-35 प्रतिशत असर अपरोक्ष रूप से होता है। 9 मार्च को आई मॉर्गन स्टैनली की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में महंगाई दर बढऩे का जोखिम सबसे अधिक है। तेल के अलावा दूसरी जिंसों के दाम भी बढ़ रहे हैं। विनिर्माण क्षेत्र में इसका असर बाद में दिखेगा। इस वजह से वित्त वर्ष 2023 के लिए महंगाई 4.5 प्रतिशत तक नियंत्रित रखना मुश्किल होगा। यह दर कितनी होगी इस बारे में केवल अनुमान ही लगाए जा सकते हैं। कई लोगों का मानना है कि यह 6 प्रतिशत के इर्द-गिर्द रहेगी।

आरबीआई को अप्रैल में क्या करना चाहिए? पिछले शुक्रवार को आरबीआई के डिप्टी गवर्नर एवं मौद्रिक नीति समिति के सदस्य माइकल पात्र ने कहा कि भू-राजनीतिक घटनाक्रम को देखते हुए अनुमानों की समीक्षा की जा सकती है। अनिश्चितता अधिक होने पर केंद्रीय बैंक स्थिति स्पष्ट होने तक महंगाई का कोई अनुमान देने से भी परहेज कर सकता है। मगर क्या आरबीआई भू-राजनीतिक घटनाक्रम से बेपरवाह रह सकता है? फिलहाल उदार रुख बरकरार रह सकता है मगर क्या यह समय रिवर्स रीपो रेट में इजाफा करने का नहीं है? रीपो रेट भले ही 4 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रहती है मगर रोजाना परिवर्तनीय रीपो रेट ऑक्शन अल्प अवधि की दर 4 प्रतिशत से नीचे रख सकती है। अगर आरबीआई बाजार को जमीनी सच्चाई का सामना करने के लिए तैयार नही करता है तो आगे चलकर और जोखिम दिख सकते हैं।

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2023 के लिए वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। एचएसबीसी इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार कच्चे तेल का दाम 10 प्रतिशत बढऩे से वृद्धि दर 20 आधार अंक कम हो जाएगी। मगर कच्चे तेल का दाम अगर 30 डॉलर बढ़ गया तो आर्थिक वृद्धि दर 90 आधार अंक तक कम हो सकती है। जेपी मॉर्गन चेज ऐंड कंपनी ने अनुमान लगाया है कि अगर रूस से तेल की आूपर्ति बाधित रही तो कच्चा तेल 185 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। अगर ऐसा वाकई हुआ तो फिर क्या होगा इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

Keyword: भू-राजनीतिक घटनाक्रम, रिजर्व बैंक, मौद्रिक नीति समिति, एमपीसी, रीपो रेट, रिवर्स रीपो,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या आरबीआई का दर में और बढ़ोतरी करना होगा सही?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.