बिजनेस स्टैंडर्ड - एक लंबा विवाद और वैश्वीकरण को झटका
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एक लंबा विवाद और वैश्वीकरण को झटका

टीटी राममोहन /  March 14, 2022

यूक्रेन मामले के बाद दुनिया बदल गई है। हम पर जो बदलाव होने जा रहा है, उसके पूरे आयामों को समझना अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन दो चीजें काफी साफ हैं। यूक्रेन पर रूस के सैन्य अभियान से अंतरराष्ट्रीय संबंधों की व्यवस्था में आने वाला बदलाव दीर्घकालिक होने के आसार हैं। दूसरा, वैश्वीकरण का रुझान यूक्रेन संकट से पहले ही पलटने लगा था, लेकिन अब इसे तगड़ा झटका लगा है।

इन बदलावों को समझने के लिए हमें सबसे पहले यूक्रेन पर पश्चिम के बयानों को अलग रखना होगा। पश्चिम मीडिया चाहता था कि हम यह मानें कि यूक्रेन संकट इसलिए पैदा हुआ है कि राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन दोबारा सोवियत साम्राज्य खड़ा करना चाहते हैं। रूस की सेना का सैन्य अभियान बहुत बड़ी गलती है और यह पुतिन पर भारी पड़ेगा। पुतिन ने रूस की आक्रामकता से निपटने के पश्चिम के संकल्प को कम आंका है। पश्चिम के प्रतिबंधों से रूस घुटनों पर आ जाएगा। भारतीय मीडिया का एक बड़ा हिस्सा और भारतीय बुद्धिजीवी भी इसे सही मान रहे हैं।

एक अन्य वैकल्पिक मत है, जिस पर गंभीरता से लिए जाने की जरूरत है ताकि नीति निर्माता आगामी मुश्किल महीनों के लिए सही योजना बना सकें। पुतिन नाटो में यूक्रेन के शामिल होने को अपने वजूद के खतरे और यूक्रेन में दखल को निकट भविष्य में परमाणु युद्ध रोकने लिए आवश्यकता के रूप में देखते हैं। इसके खातिर रूस के लिए कोई भी कीमत बहुत अधिक बड़ी नहीं है।

पुतिन एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्होंने नाटो के पूर्व में विस्तार को लेकर पश्चिम को चेताया है। जॉर्ज केनन, हेनरी किसिंजर और स्टीफन कोहेन जैसे बड़े अमेरिकी विचारकों ने चेताया था कि अगर विस्तार जारी रहा तो रूस के साथ टकराव तय है। अब पुतिन यूक्रेन में रूसी अभियान को रूस की सीमाओं से नाटो की मौजूदगी को पीछे धकेलने की शुरुआत के रूप में देख सकते हैं। पश्चिम अपने स्तर पर पुतिन को अपने दुस्साहस के लिए दंडित करने के लिए संकल्पित है। इसके नतीजतन रूस और पश्चिम के बीच विवाद जल्द खत्म नहीं होगा। यहां तक कि कुछ यूक्रेन के नतीजे को लेकर ही संदेह रखते हैं। यूक्रेन में युद्ध उस तरह से खत्म नहीं होने के आसार हैं, जिस तरह पश्चिम चाहता है। पश्चिमी विश्लेषक रूस के त्वरित जीत हासिल नहीं करने में नाकाम रहने पर खुश हो रहे हैं। उनका मानना है कि रूस का अभियान एक पेचीदा स्थिति में खत्म होगा। यह एक खयाली पुलाव है। बहुत से स्वतंत्र विश्लेषकों ने संकेत दिया है कि रूसी सेना इसलिए धीरे बढ़ रही है क्योंकि वह बड़े पैमाने पर नागरिकों की मौत से बचने के आदेशों का पालन कर रही है। रूसी सेना यह भी मानती है कि उसके मकसद सीधे टकराव के बजाय यूक्रेन की सेना की घेराबंदी कर और आपूर्ति को रोककर भी पूरे हो सकते हैं।

ऐसा लगता है कि यह दांव काम भी कर रहा है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमिर जेलेंस्की ने 9 मार्च को कहा कि वह नाटो की सदस्यता लेने का इरादा त्यागने और रूस की कुछ मांगों पर विचार करने को भी तैयार हैं। यह इस बात का साफ संकेत है कि यूक्रेन को नहीं लगता कि वह लंबे समय तक डटे रह सकता है। पुतिन ने सैन्य अभियान शुरू करने से पहले 24 फरवरी को अपने भाषण में सैन्य अभियान में दखल देने के खिलाफ पश्चिम को कड़े शब्दों में चेताया था। उन्होंने कहा, 'जो कोई बाहर से दखल देने के बारे में विचार करेगा, उसे अपने इतिहास के किसी भी परिणाम से ज्यादा भयंकर नतीजे भुगतने होंगे।' ऐसा लगता है कि इस चेतावनी का आवश्यक असर पड़ा है। नाटो देशों ने यूक्रेन में अपनी सेनाओं को भेजने से इनकार किया है। नाटो द्वारा यूक्रेन पर लगाए गए 'नो फ्लाई' जोन की बात को तेजी से खत्म कर दिया गया। पोलैंड ने रूस में बने लड़ाकू विमानों को यूक्रेन भेजने के लिए अमेरिका को सौंपने का प्रस्ताव रखा, लेकिन अमेरिका ने इसे खारिज कर दिया। नाटो रूस के खिलाफ सैन्य युद्ध के बजाय आर्थिक युद्ध को वरीयता देता है।

पश्चिम ने ऐसे प्रतिबंध लगाए हैं जिन्हें किसी देश पर लगाए गए सबसे कड़े प्रतिबंध माना जा रहा है। अमेरिका ने रूस से तेल एवं गैस का आयात बंद कर दिया है। ब्रिटेन भी तेल आयात में कटौती कर रहा है। रूस को पहले कभी स्विफ्ट मेसेजिंग प्रणाली से अलग नहीं किया गया। रूस के चुनिंदा बैंकों को भुगतान प्रणाली से वंचित कर दिया गया है। रूस ने अभी तक अपने प्रतिबंधों से पलटवार नहीं किया है। लेकिन इसने रूस की कंपनियों के अन्य देशों पर विदेशी मुद्रा में भुगतान के बकाये को 'होस्टाइल' घोषित कर दिया है। इससे पश्चिम को चोट पहुंचाने की ताकत का संकेत मिलता है। अब ये भुगतान केवल रूबल में किए जा सकते हैं, जो निर्धारित रूसी बैंकों के पास जमा हैं।

इसके नतीजतन पश्चिमी बैंकों और कंपनियों को भारी नुकसान होने के आसार हैं। यूक्रेन संकट पैदा होने के बाद रूबल में भारी कमजोरी आई है। लेकिन यह साफ नहीं है कि कितनी विदेशी कंपनियां रूसी बैंकों के पास जमा रूबल में भुगतान कर सकती हैं और डॉलर में रूस के बॉन्डों के भुगतान को लेकर भी संदेह है। रूस के आपूर्ति में कटौती किए बिना ही तेल एवं गैस की कीमतें बढ़ी हैं। पश्चिम और असल में शेष दुनिया को ऊंची महंगाई और कम वृद्धि का दंश झेलना पड़ेगा।  बढ़ते संरक्षणवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंताओं ने यूक्रेन संकट से पहले ही वैश्विक व्यापार एवं निवेश प्रवाह की रफ्तार सुस्त कर दी थी। कोरोना महामारी ने दुनिया भर में फैली आपूर्ति शृंखलाओं पर अत्यधिक निर्भर देशों को लेकर संदेह पैदा किए हैं। यूक्रेन संकट से वैश्वीकरण को एक अन्य झटका लगेगा।

समस्या केवल पश्चिम और रूस के बीच व्यापार एवं निवेश संबंधों की नहीं है। यह पश्चिम और चीन तथा भारत जैसे अन्य देशों के बीच संबधों से जुड़ी है, जो रूस के साथ संपर्क बनाए रखने का रास्ता चुन सकते हैं। अगर ये प्रतिबंध रूस के साथ लेनदेन करने वाले देशों पर भी लगाए गए तो उठापटक बहुत अधिक होने के आसार हैं।

रूस को अपने केंद्रीय बैंक की पश्चिम में रखे विदेशी मुद्रा भंडारों को इस्तेमाल करने में कड़े प्रतिबंधों से जूझना पड़ रहा है। बहुत से टिप्पणीकारों ने कहा है कि इस घटनाक्रम से भारत समेत अन्य देश पश्चिम में केंद्रीय बैंकों के पास सरप्लस विदेशी मुद्रा को रखने के बारे में गंभीरता से विचार करेंगे। इससे यह बड़ा सबक मिलेगा कि बाहरी दुनिया के साथ ज्यादा जुड़ाव से अर्थव्यवस्था पर बाहरी दबाव का जोखिम बढ़ता है और इससे देश को संप्रभुता पर समझौता करना पड़ सकता है।

इस पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' के नारे का आकर्षण बढऩे के आसार हैं। इस नारे की विभिन्न लोगों ने विभिन्न तरह से व्याख्या की है। हालांकि इसका बुनियादी पहलू रक्षा समेत चिह्नित क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।

सरकार का कदम यह है कि हम प्रतिस्पर्धा को खत्म नहीं करना चाहते हैं, हम दुनिया के लिए उत्पादन करेंगे लेकिन शुल्क एवं सब्सिडी के जरिये घरेलू उद्योग को मदद देंगे। इसे संभव बनाने के लिए यूक्रेन मामले के बाद की दुनिया में आत्मनिर्भरता का मतलब केवल दिग्गज राष्ट्रीय कंपनियां खड़ी करना नहीं है बल्कि यह बाहरी दबावों का जोखिम घटाकर राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

Keyword: लंबा विवाद, वैश्वीकरण, रूस, राष्ट्रीय सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय संबंध, यूक्रेन संकट,
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