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किसी कंपनी से लगाव की क्या हो सकती है वजह?

आर गोपालकृष्णन /  March 11, 2022

आदर्श रूप में कंपनियों का परिचालन कुछ इस ढंग से होना चाहिए कि वे सभी संबंधित पक्षों से सम्मान एवं स्नेह अर्जित कर सकें।

किसी कंपनी से लगाव की वजह केवल व्यक्तिगत नहीं हो सकती है। यह भावनात्मक भी हो सकती है मगर यह जरूरी नहीं है कि यह स्नेह उस तरह हो जैसा किसी परिवार के सदस्य के प्रति होता है। उदाहरण के लिए हम खेल जगत के लोगों से भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं। रफाल नडाल, रोजर फेडरर और नोवाक जोकोविच सभी टेनिस में 20 ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने का कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं। उनकी इन उपलब्धियों की वजह से उनके कई चाहने वाले हैं। इनमें दो खिलाडिय़ों पर तो इनकी उदार सोच की वजह से प्रसंसकों का काफी प्यार उमड़ पड़ा। जब नडाल 21वां ग्रैड स्लैम खिताब जीतने वाले पहले खिलाड़ी बने तो फेडरर ने लिखा, 'मेरे मित्र और प्रतिद्वंद्वी, आपको 21वां ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने की हार्दिक बधाई। मुझे विश्वास है कि आप आगे और सफलताएं अर्जित करेंगे, फिलहाल आनंद एवं सफलता के इस क्षण का जश्न मनाएं।'

कोई कंपनी अपने ग्राहकों से किए वादे पूरे कर सम्मान अर्जित करती है। ये भावनाएं तब स्नेह में बदल जाती हैं जब कोई कंपनी किसी समुदाय के लिए संवेदनशील विषयों को छूती है। मसलन अगर कोई कंपनी सामाजिक या मानवीय लिहाज से महत्त्वपूर्ण विषयों पर ध्यान केंद्रित करती है तो लोगों के दिलों में उसकी जगह स्वयं बन जाती है। एक बुद्धिमान व्यक्ति एक ऐसी कंपनी तैयार करता है जो अपनी खास पहचान बनाती है और लोगों से प्रशंसा हासिल करने के साथ ही उनके लिए स्नेह पात्र बन जाती है।

जब मैं विभिन्न कंपनियों के निदेशकमंडल में कार्यरत था तो एक बार प्रबंधकों से पांच ऐसी कंपनियों के नाम बताने के लिए कहा जिनका वे सम्मान करते थे। उन्होंने उत्तर में कुछ जानी-मानी कंपनियों के नाम गिनाए। फिर मैंने उनसे उन पांच कंपनियों के नाम पूछे जिनका न केवल वे सम्मान करते थे बल्कि  उनके साथ स्नेह भी रखते थे। किसी निर्जीव वस्तु से स्नेह रखने की बात गले नहीं उतरती है। कुछ लोगों ने तर्क दिया कि आखिरकार कंपनियों की स्थापना ही आय अर्जित करने के लिए होती है तो फिर उनसे स्नेह का प्रश्न कहां उठता है। मगर यह भी एक सच्चाई है कि ग्राहकों के मन में कुछ कंपनियों के लिए एक खास जगह बन जाती है। जब भी ये कंपनियां किसी मुसीबत में या अनुचित विवाद में फंसती हैं तो लोगों का स्नेह उमड़ उठता है। जब यह चर्चा आगे बढ़ी तो कुछ लोगों ने थोड़ी हिचकिचाहट के साथ अमूल, एशियन पेंट्स, बजाज, एचडीएफसी और टाटा के नाम लिए।

दिलचस्प बात रही कि ऐसी कंपनियों की सूची छोटी थी। जब किसी कंपनी के साथ कुछ अच्छा होता था तो लोग प्रसन्नता व्यक्त करते थे और कुछ दुखद होने की स्थिति में अफसोस का इजहार करते थे। मैं उन बातों को याद करता हूं जिनका मैंने अनुभव किया है।

2008 में मुंबई में ताज महल होटल पर आतंकवादी हमले के बाद टाटा संस के कार्यालय और ताज होटल को लोगों के कई पत्र आए। भावनाओं से ओत-प्रोत इन पत्रों में लोगों ने ताज से जुड़ी अपने जीवन की घटनाओं का जिक्र किया था। एक व्यक्ति ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि किस तरह ताज होटल में उनका विवाह हुआ था। एक दूसरे व्यक्ति ने ताज होटल में अपने विवाह की वर्षगांठ मनाने की याद ताजा की थी। कुछ लोगों ने तो ताज की मरम्मत के लिए रकम की भी पेशकश की और पत्र के साथ चेक भी भेज दिए थे। मगर इन सभी पत्रों में खास बात यह थी कि लोगों ने अपना प्यार एवं स्नेह व्यक्त किया था। ताज महल होटल को लेकर लोगों में कितना भावनात्मक लगाव था!

कुछ वर्ष पहले मैं अपनी कंपनी से काम कर अपने घर लौट रहा था। कफ परेड के पास खड़े एक पुलिस दस्ते ने हमें रुकने का इशारा किया। शायद हमसे रेड लाइट का उल्लंघन हो गया था। मैंने विवाद के समाधान के लिए यातायात नियम के उल्लंघन के बदले जुर्माना देने की पेशकश की। इस बीच, यातायात पुलिस ने मेरे चालक के परिधान पर टाटा का लोगो देखा और उन्होंने मुझसे पूछा कि मैं टाटा समूह में क्या काम करता हूं। पुलिस वाले का रुख नरम हो गया और उसने कहा, 'आप टाटा में हैं इसलिए मैं आपसे जुर्माना नहीं लूंगा।' मैं उसकी बात सुनकर हैरान रह गया।

इस कहानी की पृष्ठभूमि कुछ इस तरह है। करीब पांच वर्ष पहले फाल्टन रोड स्थित पुलिस स्टेशन में मॉनसूनी बारिश से पहले सरकार पुलिस दल को छतरी नहीं दे पाई थी। चूंकि, तब तक मॉनसून ने दस्तक दे दी थी इसलिए पुलिसकर्मियों को बारिश में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। टाटा संस के विजिंटिंग ऑफिसर को इस बात की जानकारी मिली। वह टाटा संस के कार्यायल बॉम्बे हाउस आए और फाल्टन रोड के पुलिसकर्मियों के लिए 25 छतरियों का इंतजाम किया। संयोग से जिस पुलिसकर्मी से मेरी मुलाकात हुई वह उनमें से एक था। उसने कहा कि वे टाटा समूह के शुक्रगुजार हैं। फिर उसने कहा कि टाटा के प्रति सम्मान व्यक्त करने का उसे अवसर मिला है। बाद में मैंने भी इस पूरे मामले की पुष्टि की। टाटा के प्रति इस प्यार को देखकर मैं विभोर हो गया था। कौन कहता है कि आप किसी कंपनी से लगाव नहीं रख सकते हैं? कुछ छोटे-मोटे मगर दिल को छू लेने वाले काम कर आप लोगों का प्यार पा सकते हैं।

वर्ष 1990 में मैं पश्चिम एशिया में कार्यरत था इसलिए इस क्षेत्र की प्रति मेरी रुचि बढ़ गई थी। उस वर्ष इराक ने कुवैत पर आक्रमण किया था। कई भारतीयों को याद होगा कि एयर इंडिया ने कुवैत से किस तरह 1,70,000 लोगों को सुरक्षित निकाला था। दुनिया में नागरिकों को सुरक्षित निकालने की यह अब तक कि सबसे बड़ी मिसाल है और गिनीज बुक ऑफ रिकॉड्र्स में यह दर्ज है! यह कारनामा 13 अगस्त से 11 अक्टूबर, 1990 के बीच मात्र आठ हफ्तों में पूरा कर लिया गया। इस अभियान में कुवैत के निवासी टोयोटा सनी की अहम भूमिका रही। इस घटना के बाद एयर इंडिया के प्रति लोगों का तत्काल प्यार उमड़ पड़ा, भले यह कुछ ही दिनों के लिए रहा। इस अभियान पर 'एयरलिफ्ट' नाम से एक फिल्म भी बन चुकी है।

रणनीतिकारों और उद्यमियों के बीच इस बात पर बहत होगी कि क्या टाटा संस को एयर इंडिया का अधिग्रहण करना चाहिए था। खैर, यह आलेख इस विषय से जुड़ा नहीं है। जब टाटा ने एयर इंडिया का अधिग्रहण किया था तो मैंने एक लेख लिखा था, 'पहले युवा एवं सुंदर आंटी जो अब वृद्धा हो चुकी हैं और जिन्होंने 69 वर्ष पहले घर छोड़ दिया था वह दोबारा घर लौट आई हैं।' मेरा यह संदेश 5 लाख से अधिक लोगों ने देखा था और इस पर सैकड़ों प्रतिक्रियाएं भी आई थीं। सभी ने प्रसन्नता जाहिर करते हुए शुभकामनाएं दी थीं।

इससे मिलती-जुलती एक और कहानी है। 1880 के उत्तराद्र्ध में बॉम्बे प्रेसिडेंसी का सबसे बड़ी कपड़ा मिल धर्मसी संकट में घिर गई थी। इसकी नीलामी प्रक्रिया शुरू हो गई थी। जमशेदजी ने नीलामी में इसे जीत लिया और अगले सात वर्षों तक इसे संवारने में पूरा जोर लगा दिया। कई लोगों को आश्चर्य एवं प्रसन्नता हुई कि इस मिल ने शानदार कारोबारी सफलता अर्जित की। इस मिल का नाम बदलकर स्वदेशी मिल्स रखा गया था।

अब भारत के लोग एयर इंडिया को सक्षम और दोबारा स्नेह का पात्र बनते देखना चाहते हैं। एयर इंडिया को दोबारा तैयार करने वाले प्रबंधकों के लिए 135 करोड़ लोगों का स्नेह एक अपार पूंजी है। कौन कहता है कि आप किसी कंपनी या निदेशकमंडल से स्नेह नहीं रख सकते हैं?

(लेखक कंपनी सलाहकार हैं।)

Keyword: कंपनी, ग्राहक, समुदाय, संवेदनशील विषय, भावनात्मक जुड़, सम्मान, टाटा समूह, एयर इंडिया,
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