बिजनेस स्टैंडर्ड - यूक्रेन-रूस जंग और दक्षिण एशियाई देशों का रुख
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, May 26, 2022 04:45 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

यूक्रेन-रूस जंग और दक्षिण एशियाई देशों का रुख

सियासी हलचल
आदिति फडणीस /  March 05, 2022

रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग शायद जल्द समाप्त हो जाए, या शायद न भी हो। परंतु इस जंग का असर इसके खत्म होने के बाद काफी लंबे समय तक महसूस किया जाएगा। यह असर केवल यूक्रेन या रूस तक सीमित नहीं होगा बल्कि दक्षिण एशिया भी इससे अप्रभावित नहीं रहेगा। संयुक्त राष्ट्र महासभा में मतदान को लेकर विभिन्न देशों का रवैया कई बातें स्पष्ट करने वाला है।

भारत के पड़ोसी देशों पर विचार कीजिए। हमारा पड़ोसी देश श्रीलंका जब यह आशा कर रहा था कि कोविड-19 संक्रमण में कमी आने से रूसी पर्यटक वापस देश में आने लगेंगे तब युद्ध ने झटका दे दिया है। चीन के बाद सबसे अधिक भारतीय पर्यटक श्रीलंका पहुंचते हैं लेकिन इन दोनों बाजारों में धीमापन है, हालांकि इनमें स्थिरता नजर आ रही है। परंतु श्रीलंका पहुंचने वाले पर्यटकों में रूसियों की तादाद हाल में बढ़ी है। फरवरी 2022 में श्रीलंका में 96,507 पर्यटक पहुंचे जबकि जनवरी में केवल 82,327 पर्यटक पहुंचे थे। इन 96,000 पर्यटकों में रूस के 15,300 और यूक्रेन के 5,600 पर्यटक थे। भारत से केवल 12,700 पर्यटक पहुंचे। श्रीलंका ने युद्धग्रस्त क्षेत्रों के पर्यटकों का वीजा दो महीने के लिए बढ़ा दिया है ताकि वे वहां रह सकें। सरकार आशा कर रही होगी कि वे श्रीलंका मेंरुकें और खर्च करें।

श्रीलंका को पैसों की इतनी अधिक आवश्यकता पहले कभी नहीं रही। वहां बिजली कटौती इतनी आम है कि इस बारे में लोग भूल ही गए हैं। अब तेल कीमतों में तेजी आ रही है और श्रीलंका को समान मात्रा में तेल खरीदने के लिए लगभग दोगुनी राशि चुकानी होगी। रूस के लोग जो चाय पीते हैं उसका 30 फीसदी श्रीलंका से जाता है। जनवरी 2022 में रूस ने श्रीलंका से करीब 25 लाख किलोग्राम चाय खरीदी और वह चाय का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन गया। प्रश्न यह है कि श्रीलंका हालात से कैसे निपटेगा? विदेशों से आने वाले धन में पहले ही कमी आई है और पश्चिम एशिया के श्रम बाजार में सुधार के संकेत नहीं हैं। विदेशी मुद्रा भंडार ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर है और जुलाई में सॉवरिन बॉन्ड की एक और खेप को छुड़ाना होगा, ऐसे में हालात और कठिन होने वाले हैं।

मतदान में बांग्लादेश और पाकिस्तान अपनी वजहों से दूर रहे। रूस बांग्लादेश को रक्षा उपकरण आपूर्ति करने वाला प्रमुख देश है। सन 2015 में रूस ने बांग्लादेश को 12 अरब डॉलर से अधिक की राशि देने का वादा किया था ताकि वह परमाणु बिजली संयंत्र की स्थापना कर सके। यह संयंत्र 2023 तक पूरा हो जाना चाहिए।

पाकिस्तान की बात करें तो उसके प्रधानमंत्री इमरान खान, यूक्रेन के साथ जंग छिडऩे के कुछ घंटे पहले अज्ञात कारणों से रूस गए थे, हालांकि उन्हें यकीनन यह पता रहा होगा कि जंग छिडऩे वाली है। स्वदेश वापसी के बाद उन्होंने ईंधन और बिजली की दरों में कमी की घोषणा की। उन्होंने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा, 'मुझे तेल एवं गैस नियामकीय प्राधिकरण (ओगरा) से जानकारी मिली और उसने अनुशंसा की कि वैश्विक बाजारों में कीमतों में वृद्धि के चलते पेट्रोल और डीजल के दाम 10 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए जाएं। आज मैं आपको बताना चाहता हूं कि अच्छी खबर यह है कि कीमतें बढ़ाने के बजाय हम पेट्रोल की कीमत 10 रुपये प्रति लीटर कम कर रहे हैं।' असल बात यह है कि पाकिस्तान में 2023 में आम चुनाव होने हैं। अपने उसी भाषण में उन्होंने अमेरिका के आतंक के खिलाफ युद्ध में पाकिस्तान की भागीदारी पर अफसोस भी जताया। उन्होंने कहा कि वह पहले दिन से कह रहे थे कि देश को अमेरिकी युद्ध में शामिल नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शर्मिंदगी की बात यह थी कि इतिहास में पहली बार एक देश ऐसे देश के समर्थन में था जो उस पर बमबारी कर रहा था।

मालदीव अवश्य यूक्रेन के पक्ष में खड़ा हुआ और उसने भारत और चीन से अलग रुख अपनाया। उसके इस नायकत्व की सराहना करनी होगी। रूस को नाराज करके उसे नुकसान ही होना है: वर्ष 2021 के अंत में करीब 2.2 लाख रूसी पर्यटक मालदीव आए। यह आंकड़ा 2019 के पिछले रिकॉर्ड से 2.7 गुना अधिक है। मालदीव आने वाला हर छठा पर्यटक रूसी है। ये अमीर पर्यटक होते हैं और काफी खर्च करते हैं। मालदीव में मछली और पर्यटक रिजॉर्ट के अलावा कुछ नहीं होता है, वह सबकुछ आयात करता है। वह एक छोटा देश है लेकिन जैसा कि संयुक्त राष्ट्र में उसके राजदूत थिलमीजा हुसैन ने कहा भी,  उसने हमेशा एक संप्रभु राष्ट्र की क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन के खिलाफ सैद्धांतिक कदम उठाया है। उन्होंने कहा, 'हमें पता है कि हमारे पास विनाश करने वाले शक्तिशाली हथियार नहीं हैं, इसके बजाय हम अपने अपने सिद्धांतों और देशों की एकता पर यकीन करते हैं।'

नेपाल और भूटान ने भी मालदीव का ही रुख अपनाया। दोनों की वजहें घरेलू रहीं। नेपाल की विदेश नीति में एक नया बदलाव आया है। अब वह न तो चीन की बात का समर्थन करता है, न भारत का अंध अनुगमन। मतदान के कुछ घंटे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा से बात कर उन्हें अमेरिकी कंपनी मिलेनियम चैलेंज कॉर्पोरेशन के साथ सौदे को संसदीय मंजूरी मिलने की बधाई दी थी। इस मंजूरी के लिए अत्यधिक राजनीतिक कुशलता की जरूरत पड़ी थी। चीन अमेरिकी दखल से नाखुश था लेकिन नेपाल ने पश्चिम के साथ जाने का विकल्प चुना। भूटान ने भी भारत और चीन से स्वतंत्र रुख रखा। संयुक्त राष्ट्र में भूटान के राजदूत ने कहा, 'हिमालय के ऊपर स्थित होने बावजूद ये शक्तिशाली पर्वत भी हमारे देश को इस संघर्ष की गूंज से बचा नहीं सकते।' उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा यूरोप की सीमाओं से परे भी खतरे में है और 'हम अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के एकपक्षीय निर्धारण को अनदेखा नहीं कर सकते।' डोकलाम का घटनाक्रम दिखा चुका है कि भूटान पहले ही बहुत मुश्किल हालात से जूझ रहा है।

दक्षिण एशिया में कोई नहीं चाहता कि जंग छिड़ी रहे। लेकिन कुछ लोग इसके खात्मे को लेकर दूसरों से ज्यादा उत्सुक हैं।

Keyword: यूक्रेन-रूस जंग, दक्षिण एशियाई देश, संयुक्त राष्ट्र महासभा, मतदान, पर्यटक वीजा,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या सरकार को उधारी लक्ष्य बढ़ाने की जरूरत पड़ेगी?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.