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80ईईए का कर लाभ चाहिए तो 31 मार्च से पहले होम लोन उठाइए

बिंदिशा सारंग /  03 01, 2022

वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में सरकार ने मकान खरीदने वालों को कर में एक बड़ी राहत का ऐलान किया था। यह राहत किफायती मकान खरीदने के वास्ते लिए गए आवास ऋण पर जाने वाले ब्याज में 1.5 लाख रुपये तक की अतिरिक्त कटौती की शक्ल में थी, जिसे एक साल के लिए बढ़ा दिया गया था। यह राहत आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80ईईए के तहत हासिल की जा सकती है। विस्तार के बाद आवास ऋण लेने वाले 31 मार्च तक इस कर छूट का फायदा उठा सकते हैं।


धारा 24बी और धारा 80सी

आवास ऋण लेने वाले किसी भी व्यक्ति को कर में छूट जरूर मिलती है। यह छूट आम तौर पर धारा 24बी और धारा 80सी के तहत दी जाती है।

धारा 24बी के तहत छूट आवास ऋण पर चुकाए जाने वाले ब्याज पर मिलती है। यदि मकान मालिक अथवा उसका परिवार मकान में रहता है तो कर योग्य आय में 2 लाख रुपये तक का ब्याज घटाया जा सकता है। विक्टोरियम लीगलिस - एडवोकेट्स ऐंड सॉलिसिटर्स में एसोसिएट आदेश आगरकर बताते हैं, 'अगर मकान मालिक अपने घर में नहीं रहता है तब भी आवास ऋण के ब्याज पर इस धारा के तहत कर छूट हासिल की जा सकती है। मगर मकान किराये पर चढ़ाया गया तो आवास ऋण के समूचे ब्याज पर कर में छूट ली जा सकती है।'

कर्ज लेने वाला करदाता वित्त वर्ष में चुकाए गए मूलधन पर भी कर छूट हासिल कर सकता है। उसे धारा 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक की कर छूट मिल सकती है मगर मूलधन का यह हिस्सा इस धारा के तहत दी जा रही कुल 1.5 लाख रुपये की छूट के अंतर्गत ही गिना जाता है।


धारा 80ईईए

आयकर अधिनियम की धारा 80ईईए के तहत कर योग्य आय में कटौती बहुत काम की है। यह कटौती या छूट धारा 24बी के तहत मिल रही 2 लाख रुपये की छूट के अलावा है। इस तरह जो भी व्यक्ति धारा 80ईईए के तहत कर योग्य आय में कटौती का पात्र है, उसे किसी भी वित्त वर्ष के दौरान कुल 3.5 लाख रुपये की कटौती का फायदा मिल सकता है। इसमें से 2 लाख रुपये धारा 24बी के तहत और 1.5 लाख रुपये धारा 80ईईए के तहत होते हैं। लेकिन इसके लिए किफायती मकान की खरीद होनी चाहिए।

मगर शर्तें भी हैं

धारा 80ईईए के तहत मिलने वाली कर छूट लुभावनी तो लगती है मगर इसे हासिल करने के लिए कुछ शर्तें पूरी करना जरूरी है। कर योग्य आय में यह कटौती आवास ऋण लेने वाले हरेक व्यक्ति को नही मिलती। इसके लिए वे करदाता ही पात्र हैं, जिन्होंने बजट में निर्दिष्ट अथवा सरकार द्वारा निर्धारित अवधि के दौरान आवास ऋण लिया हो। पीएसएल एडवोकेट्स ऐंड सॉलिसिटर्स में असोसिएट पार्टनर सुविज्ञा अवस्थी बताती हैं, 'यह लाभ उन्हीं करदाताओं के लिए है, जिन्होंने अपना मकान खरीदने के लिए 1 अप्रैल, 2019 से 31 मार्च, 2022 के बीच बैंक जैसे किसी वित्तीय संस्थान से कर्ज लिया हो।'

शर्तें और भी हैं। यह भी जरूरी है कि स्टांप शुल्क के हिसाब से मकान की कीमत 45 लाख रुपये से अधिक नहीं हो। इसके अलावा मकान के आकार का भी पैमाना तय किया गया है। प्रिवी लीगल सर्विस एलएलपी में मैनेजिंग पार्टनर मोइज के रफीक आकार की शर्त समझाते हुए कहते हैं, 'यह शर्त मकान के कारपेट एरिया से जुड़ी है। यदि मकान किसी महानगर में है तो उसका कारपेट एरिया 60 वर्ग मीटर यानी 645 वर्ग फुट से अधिक नहीं होना चाहिए। बाकी जगहों पर मकान का कारपेट एरिया 90 वर्ग मीटर यानी 970 वर्ग फुट तक हो सकता है।'

एक शर्त यह भी है कि कर्ज की मंजूरी के दिन मकान खरीदार के नाम पर कोई और आवासीय संपत्ति नहीं होनी चाहिए यानी जिस मकान के लिए कर्ज लिया गया है, वह करदाता का पहला मकान होना चाहिए। साथ ही ध्यान रहे कि कर रियायत केवल उस कर्ज पर मिल सकती है, जो मकान खरीदने के लिए लिया गया हो। मकान की मरम्मत, पुनर्निर्माण या रखरखाव के इरादे से लिया गया कर्ज रियायत के दायरे में नहीं आता है।


किसे मिलेगी छूट?

व्यक्तिगत करदाताओं के अलावा मकान के संयुक्त मालिक भी अलग-अलग कर राहत का दावा कर सकते हैं बशर्ते उन्होंने साथ मिलकर कर्ज लिया हो। आगरकर बताते हैं, 'इस धारा में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कर रियायत का लाभ लेने के लिए आपको भारत का ही निवासी होना जरूरी है। इसलिए मान सकते हैं कि निवासी भारतीयों के साथ अनिवासी भारतीय भी इस कर छूट का दावा कर सकते हैं।'

अविभाजित हिंदू परिवार इस धारा के तहत कर लाभ का दावा नहीं कर सकते हैं। उन्हीं की तरह कंपनियां, एसोसिएशन ऑफ पर्सन तथा पार्टनरशिप फर्म भी इस धारा का फायदा नहीं ले सकतीं। साथ ही भूखंड खरीदने के वास्ते लिए गए कर्ज पर इस धारा के तहत कोई फायदा नहीं मिलेगा। मकान के पुनर्निर्माण या मरम्मत के लिए मांगा गया कर्ज भी इस धारा में किसी काम नहीं आएगा।


धारा 24बी और 80सी से अलग

धारा 80ईईए और धारा 24बी तथा धारा 80सी के बीच एकदम साफ फर्क है। मुंबई में रहने वाले निवेश और कर विशेषज्ञ बलवंत जैन समझाते हैं, 'धारा 80ईईए की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके तहत ब्याज पर कर छूट उस समय भी मांगी जा सकती है, जब मकान या आवासीय संपत्ति का निर्माण हो रहा हो। इसके उलट धारा 24बी और धारा 80सी के तहत कर छूट का दावा आप उसी साल से शुरू कर सकते हैं, जिस साल में निर्माण पूरा होता है और आपको मकान का कब्जा मिल जाता है।'


80ईई से अलग

आवास ऋण के ब्याज पर कर राहत के धारा 80ईई भी लाई गई है मगर वह 80ईईए से बिल्कुल अलग है। 80ईई के तहत उन लोगों को कर्ज के ब्याज पर हर वित्त वर्ष में 50,000 रुपये की अतिरिक्त राहत दी जाती है, जिन्होंने पहली बार आवास ऋण लिया है। लेकिन इस धारा के तहत कर योग्य आय में 50,000 रुपये की कटौती का फायदा केवल उन लोगों को मिलता है, जिनका कर्ज 1 अप्रैल, 2016 से 31 मार्च, 2017 के बीच मंजूर हुआ था।

अब सबसे मार्के की बात। जो भी धारा 80ईईए के तहत फायदा हासिल करना चाहता है, उसके लिए वक्त बिल्कुल भी नहीं बचा है। उसे फौरन हरकत में आ जाना चाहिए। जैन कहते हैं, 'अगर आप ऐसा मकान खरीदना चाहते हैं, जिस पर आपको धारा 80ईईए के तहत कर रियायत का फायदा मिल जाए तो आपको आखिरी तारीख यानी इस साल 31 मार्च से पहले ही अपना आवास ऋण मंजूर करा लेना चाहिए। कर्ज की रकम आपके खाते में बेशक बाद में आए, इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। मगर फायदा तभी होगा, जब बैंक 31 मार्च तक आपके कर्ज पर मंजूरी की मुहर लगा दे।'

Keyword: 80ईईए, कर लाभ, होम लोन, बजट, मकान, राहत, ब्याज, आयकर अधिनियम,
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