बिजनेस स्टैंडर्ड - सरकार द्वारा सब्सिडी में कटौती से पड़ सकता है खपत पर असर
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, May 17, 2022 10:42 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम निवेश खबर

सरकार द्वारा सब्सिडी में कटौती से पड़ सकता है खपत पर असर

कृष्ण कांत / मुंबई 02 09, 2022

उपभोक्ता मांग से जुड़े क्षेत्रों की कंपनियों के लिए वित्त वर्ष 2022-23 कठिन साबित हो सकता है। सब्सिडी में कटौती, तेल के ज्यादा दाम और ब्याज दरों में बढ़ोतरी सहित कुछ वजहों से रोजमर्रा के इस्तेमाल वाली उपभोक्ता वस्तुओं (एफएमसीजी) और ऑटोमोटिव जैसे क्षेत्रों को कठिन दौर से गुजरना पड़ सकता है।

वित्त वर्ष 23 में खपत की राह में सबसे बड़ा रोड़ा खाद्य, उर्वरक और ईंधन सब्सिडी में कटौती और राजस्व व्यय में कमी है। विश्लेषकों का कहना है कि यह परिवारों की क्रय शक्ति पर बुरा असर डालेगा, जो आमदनी के निचले स्तर पर हैं और इससे उपभोक्ता वस्तुओं व सेवाओं पर खर्च में कमी आएगी।

2022-23 के केंद्रीय बजट में खाद्य, उर्वरक और पेट्रोलियम पर सब्सिडी में 26.6 प्रतिशत की कटौती का प्रस्ताव किया गया है और यह वित्त वर्ष 22 के 4.33 लाख करोड़ रुपये से घटाकर वित्त वर्ष 23 में 3.18 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के आवंटन में भी वित्त वर्ष 23 में 25.5 प्रतिशत कमी करने का फैसला किया है और यह वित्त वर्ष 22 के संशोधित अनुमान 98,000 करोड़ रुपये की तुलना में घटकर 73,000 करोड़ रुपये रह गया है। जेएम इंस्टीट्यूशनल इक्विटी के एमडी और मुख्य रणनीतिकार धनंजय सिन्हा ने कहा, 'बजट में उठाए कदमों का असर ग्रामीण इलाकों में महसूस किया जाएगा, जहां परिवारों की आमदनी में सब्सिडी प्रमुख है। खाद्य व उर्वरक सब्सिडी में कटौती और रोजगार गारंटी योजना में आवंटन कम किए जाने से सस्ते उपभोक्ता सामान जैसे दोपहिया वाहनों की मांग कम होने की संभावना है।'

इन कदमों की वजह से केंद्र सरकार के कुल मिलाकर राजस्व व्यय में वित्त वर्ष 23 में सिर्फ 0.9 प्रतिशत बढ़ोतरी होगी, जो कम से कम 52 साल की सबसे सुस्त वृद्धि है। सार्वजनिक ऋण पर ब्याज भुगतान को निकाल दें तो केंद्र का शुद्ध राजस्व व्यय वित्त वर्ष 23 में पिछले साल से 4.2 प्रतिशत कम हुआ है। 1971-72 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है, जब राजस्व व्यय में गिरावट आई है।

वित्त वर्ष 23 में सब्सिडी में कटौती वित्त वर्ष 22 में तेज कटौती की तरह ही है। केंद्र सरकार का खाद्य, उर्वरक और पेट्रोलियम सब्सिडी पर व्यय वित्त वर्ष 22 में 33.24 प्रतिशत गिरने का अनुमान लगाया गया है। इसका असर पहले ही निजी अंतिम खपत व्यय (पीएफसीई) पर दिख रहा है, जो अर्थव्यवस्था में निजी खपत का योग होता है। भारत के सकल घरेलू उत्पाद में पीएफसीई का हिस्सा वित्त वर्ष 22 में 9 साल के निचले स्तर 57.5 प्रतिशत पर रहने की संभावना है। ऐतिहासिक रूप से देखें तो सब्सिडी में बढ़ोतरी और कल्याणकारी योजनाओं जैसे मनरेगा पर ज्यादा व्यय से पीएफसीई को समर्थन मिला है, खासकर ऊर्जा की कीमत में बढ़ोतरी जैसे वृहद आर्थिक दबाव के दौरान यह समर्थन नजर आया है।

सब्सिडी में कटौती ऐसे समय में की गई है, जब ईंधन और जिंसों के दाम बढऩे से परिवारों की आजीविका का खर्च बढ़ा है। बैंक आफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, 'कच्चे तेल में हाल की बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ेगी और परिवारों को विवेकाधीन खर्च टालने पर बाध्य होना पड़ेगा क्योंकि उन्हें खाने, यात्रा और अन्य अहम जरूरतों के लिए नकदी बचानी होगी। इसकी वजह से जीडीपी में पीएफसीई की हिस्सेदारी और कम होगी।'  

पिछली बार जब वित्त वर्ष 10 से 14 के बीच तेल के दाम में भारी बढ़ोतरी हुई थी तो सरकार ने पेट्रोलियम सब्सिडी बढ़ाकर इसकी भरपाई की थी। इस बार ऐसा कुछ नहीं किया गया है।

 
Keyword: सब्सिडी कटौती, उपभोक्ता मांग, एफएमसीजी, ऑटोमोटिव क्षेत्र, खाद्य, उर्वरक ईंधन,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या डिजिटल सौदों को सीसीआई के दायरे में लाना होगा सही?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.