बिजनेस स?टैंडर?ड - 98 अमीरों के पास आधी आबादी जितनी संपत्ति
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98 अमीरों के पास आधी आबादी जितनी संपत्ति

सचिन मामबटा /  01 16, 2022

भारत के अमीर परिवारों की संपत्ति साल 2021 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई जबकि महामारी के दौरान करीब 84 प्रतिशत परिवारों की आमदनी घट गई। गैर लाभकारी संस्था, ऑक्सफैम इंडिया की एक रिपोर्ट विश्व आर्थिक मंच के दावोस एजेंडा शिखर सम्मेलन से पहले जारी की गई। इसके मुताबिक 2021 में देश के अरबपतियों की संख्या 102 से बढ़कर 142 हो गई।इसमें देश की आबादी के 10 प्रतिशत सबसे धनी लोगों पर अधिक कर लगाने की बात कही गई है ताकि असमानता घटाई जा सके। 'इनइक्वॉलिटी किल्स' शीर्षक वाली रिपोर्ट के मुताबिक इस कर के जरिये शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को कवर किया जा सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक शीर्ष 100 परिवारों की संपत्ति अब 57.3 लाख करोड़ रुपये है। विश्व असमानता रिपोर्ट के डेटा का अलग से विश्लेषण करने पर यह अंदाजा मिलता है कि शीर्ष स्तर के 10 फीसदी अधिक अमीर लोगों पर कर लगाकर शीर्ष स्तर के 100 परिवारों की तुलना में कम संपत्ति वाले सभी परिवारों को कवर किया जा सकता है। ऑक्सफैम के आंकड़ों के मुताबिक शीर्ष स्तर के 100 परिवारों की औसत संपत्ति 5.7 लाख करोड़ रुपये है। वहीं वल्र्ड इनइक्वॉलिटी रिपोर्ट के डेटा का विश्लेषण बिज़नेस स्टैंडर्ड ने किया जिसके मुताबिक शीर्ष 10 फीसदी अमीरों की औसत संपत्ति 63-65 लाख रुपये है। भारत को इस लिहाज से बेहद असमानता वाला देश बताया गया है जिसमें देश के शीर्ष 10 फीसदी लोगों के पास 57 प्रतिशत संपत्ति है जबकि निचले स्तर से आधी आबादी की हिस्सेदारी 13 प्रतिशत है। रिपोर्ट में इस बात की ओर इशारा किया गया है कि दुनिया भर में अधिक कराधान की भूमिका असमानता कम करने के लिए है। ऑक्सफैम की रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार का कर राजस्व गैर अनुपातिक तरीके से अप्रत्यक्ष करों जैसे कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पर निर्भर है। इसकी वजह से कोई सामान खरीदने या किसी सेवा का इस्तेमाल करने वाले सभी लोग समान दर से ही कर का भुगतान करते हैं। लिहाजा, कर की दर का प्रभाव समाज के गरीब वर्ग पर आमदनी कम होने के बावजूद उतना ही पड़ेगा जितना कि किसी अमीर पर पड़ेगा। ऑक्सफैम की रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि असमानता को मापने और असंगठित क्षेत्र के कामगारों की बेहतर सामाजिक सुरक्षा के लिए हर 10 साल पर कम से कम दो सर्वे कराए जाने चाहिए।

उसने कहा हा कि 98 अरबपतियों की संपत्ति पर 4 फीसदी कर लगाकर 17 साल तक मध्याह्न भोजन योजना की फंडिंग की जा सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक केवल एक फीसदी अमीरों पर कर लगाकर स्कूली शिक्षा और साक्षरता अभियान के कुल खर्च का या फिर सरकार की स्वास्थ्य बीमा योजना आयुष्मान भारत की फंडिंग 7 साल से अधिक समय तक की जा सकती है।  

ऑक्सफैम इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ बेहर के मुताबिक असमानता का नकारात्मक असर स्त्री-पुरुष समानता पर पड़ सकता है और अमीरों पर कराधान लगाकर इसका समाधान किया जा सकता है। उन्होंने कहा, 'महामारी की वजह से स्त्री-पुरुषों की समता का स्तर 99 साल से पीछे हटकर अब 135 साल पीछे चला गया है। वर्ष 2020 में महिलाओं ने सामूहिक रूप से अपनी कमाई में 59.11 लाख करोड़ रुपये गंवा दिए वहीं 2019 की तुलना में अब 1.3 करोड़ महिलाएं ही कामकाजी रह गई हैं। असमानता कम करने की शुरुआत के लिए कराधान के जरिये अमीर लोगों को लक्षित करना होगा ताकि लोगों की जिंदगियां बचाने के लिए वास्तविक अर्थव्यवस्था में पूंजी वापस लाई जाए। देश में असमानता और गरीबी के खिलाफ लड़ाई अमीरों की मदद के बिना संभव नहीं है जिन्होंने महामारी के दौरान देश में रिकॉर्ड मुनाफा कमाया।'

Keyword: wealth, india, davos,,
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