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टर्म प्लान खुद छोड़ा तो नॉमिनी को होगा घाटा

संजय कुमार सिंह /  January 09, 2022

महामारी के दौरान जीवन बीमा कंपनियों के सामने दावों की बाढ़ आ गई थी, जिसकी वजह से उन्होंने प्रीमियम की दरों में बढ़ोतरी कर दी है। कई बीमाकर्ताओं ने दिसंबर में अपने टर्म बीमा के प्रीमियम में भी इजाफा किया है। कुछ ने इस मौके का फायदा उठाकर अपने टर्म बीमा के नए रूप भी पेश कर दिए हैं, जिनमें कुछ अतिरिक्त फीचर हैं।

 
स्वेच्छा से निकलने का विकल्प
 
इंडियाफस्र्ट लाइफ इंश्योरेंस ने हाल ही में ई-टर्म प्लस प्लान पेश किया है, जिसमें स्वेच्छा से बीमा छोडऩे (वॉलंटरी इक्जिट) का विकल्प दिया गया है। इंडियाफस्र्ट लाइफ इंश्योरेंस के उप मुख्य कार्य अधिकारी ऋषभ गांधी बताते हैं, 'ग्राहक चाहें तो 65 साल की उम्र के बाद या 25 साल तक प्रीमियम अदा करने के बाद इस बीमा योजना को छोड़ सकते हैं। उन्हें उस समय तक चुकाई गई समूची प्रीमियम राशि वापस कर दी जाएगी।' वह कहते हैं कि आम तौर पर लोग टर्म बीमा में कुछ भी वापस नहीं मिलने की शिकायत करते हैं, जिसे इस विकल्प में दूर कर दिया गया है।
 
वॉलंटरी इक्जिट का विकल्प प्रीमियम की वापसी के विकल्प की ही तरह है मगर यह ज्यादा सरल है। प्रीमियम की वापसी के विकल्प में रकम तभी वापस की जाती है, जब बीमा की अवधि पूरी हो जाती है। लेकिन इस विकल्प में ग्राहक 65 साल की उम्र पूरी होने के बाद या 25 साल तक प्रीमियम भरने के बाद किसी भी समय पॉलिसी छोड़ सकता है। मगर बीमा क्षेत्र के जानकारों की सलाह है कि वॉलंटरी इक्जिट तभी चुनें जब आपको बहुत अधिक जरूरत हो। पॉलिसीएक्स डॉट कॉम के मुख्य कार्य अधिकारी नवल गोयल कहते हैं, 'आपके पास 25 साल या उससे भी पहले तय किए गए प्रीमियम पर बहुत अधिक राशि का बीमा होगा। कोई भी दुर्भाग्यपूर्ण घटना होने पर आपके नॉमिनी को भारीभरकम राशि मिलेगी। इसलिए पॉलिसी छोडऩा सही नहीं होगा।'
 
एश्योर्ड राशि बदलने की सुविधा
 
एसबीआई लाइफ की ईशील्ड नेक्स्ट और इंडियाफस्र्ट लाइफ की ई-टर्म प्लस पॉलिसी में ग्राहकों को एश्योर्ड राशि में हर साल तय मात्रा (मूल एश्योर्ड राशि की 5 से 10 फीसदी) में इजाफा करने की सुविधा दी जाती है और यह सुविधा तब तक जारी रहती है, जब तक एश्योर्ड राशि दोगुनी नहीं हो जाती। इस विकल्प से ग्राहकों को अपनी एश्योर्ड राशि खुद ही बढ़ाने का मौका मिल जाता है, जिससे बढ़ती महंगाई और बढ़ते वेतन के हिसाब से बीमा राशि भी बढ़ती रहे। मगर सलाह यही है कि एश्योर्ड राशि बढ़ाने के लिए यह विकल्प चुनने से परहेज करें। इससे बेहतर होगा नई बीमा पॉलिसी खरीदना और उसके जरिये एश्योर्ड राशि में इजाफा करना। मगर इसमें भी कुछ झंझट हैं। गांधी समझाते हैं, 'इसके लिए नए सिरे से अंडराइटिंग होगी। उम्र बढऩे के साथ आपका बीमा पॉलिसी खरीदने का प्रस्ताव खारिज भी हो सकता है।' 40 साल की उम्र पूरी होने के बाद पॉलिसी खारिज होने का जोखिम ज्यादा बढ़ जाता है।
 
गोयल कहते हैं, 'जब आप कवर में लगातार इजाफे वाली पॉलिसी खरीदते हैं तो आप पॉलिसी खरीदने के समय चल रही दरों पर प्रीमियम लॉक कर लेते हैं। मगर जब नई पॉलिसी खरीदने जाएंगे तो आपका प्रीमिय उस समय चल रही दरों के हिसाब से तय होगा।' यदि प्रीमियम की दरें बढ़ रही हैं, जैसा इस समय हो रहा है तो आपको जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है। लेकिन यदि प्रीमियम की दरों में कमी आ रही है, जैसा पिछले एक दशक के दौरान कई साल हुआ था तो आपको कम प्रीमियम पर ही अतिरिक्त बीमा कवर मिल जाएगा।
 
ई-टर्म प्लस में आपको बीमा कवर कम करने का विकल्प भी मिलता है। इसमें शुरुआत में एश्योर्ड राशि अधिक होती है और उसके बाद हर साल तय मात्रा में घटती जाती है। इसमें बैलेंस्र्ड कवर का विकल्प भी मिलता है, जिसमें कुल बीमा अवधि के शुरुआती आधे हिस्से में एश्योर्ड राशि हर साल बढ़ती है और बाद के आधे हिस्से में हर साल घटती जाती है। प्रोबस इंश्योरेंस के निदेशक राकेश गोयल कहते हैं, 'एक उम्र के बाद व्यक्ति की जिम्मेदारी घट जाती है। रिड्यूसिंग और बैलेंस्ड कवर विकल्प उस समय काम आ सकते हैं।'
 
ये विकल्प उन लोगों के ज्यादा काम आ सकते हैं, जिन्हें इस बात का अच्छा अंदाजा है कि उनकी जिम्मेदारियों में कमी कब आना शुरू हो जाएगी। इस प्रकार की पॉलिसी चरणबद्घ तरीके से बीमा कवर बढ़ाने के विकल्प के मुकाबले अधिक किफायती भी साबित हो सकती हैं। हालांकि यदि व्यक्ति 30 साल की उम्र पार करने के बाद एक और बीमा पॉलिसी खरीद लेता है तो उसका अपने बीमा कवर पर अधिक नियंत्रण रहेगा। ग्राहक को जब बीमा की जरूरत में कमी महसूस होने लगेगी तो वह एक पॉलिसी रोक देगा।
 
बीमा कंपनी ग्राहकों को जीवन के विशेष मुकामों पर कवर राशि में अपने आप ही वृद्घि का विकल्प भी देती हैं। जीवन के विशेष मुकाम विवाह, मकान खरीदना और बच्चे का जन्म जैसे मौके होते हैं। अगर आपकी बीमा पॉलिसी में बीमा कवर को खुद ही बढ़ा देने का विकल्प शामिल है तो भी आपको इस बात पर गौर जरूर करना चाहिए कि कवर में उतनी वृद्घि हुई है या नहीं, जितनी वृद्घि आपकी जिम्मेदारी में हुई है। मिसाल के तौर पर मान लेते हैं कि आपने 1 करोड़ रुपये का मकान खरीदा है मगर आपकी बीमा पॉलिसी की एश्योर्ड राशि में केवल 50 लाख रुपये का इजाफा होता है तो आपको 50 लाख रुपये की नई पॉलिसी खरीद लेनी चाहिए।
 
सबसे अहम बात यह है कि इस प्रकार के फीचर टर्म बीमा पॉलिसियों को ग्राहकों के ज्यादा अनुकूल बना सकते हैं मगर तीन खासियतों पर नजर जरूर डालनी चाहिए। गोयल कहते हैं, 'गौर से देख लीजिए कि बीमा कंपनी स्थिर यानी मजबूत है, उसका दावे निपटाने का अनुपात अच्छा खासा ऊंचा है और उसकी प्रीमियम दरें बाकी कंपनियों की टक्कर की ही हैं, उनसे बहुत अधिक नहीं हैं।'
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