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एयरटेल मॉरेटोरियम का ब्याज चुकाएगी

अनीश फडणीस / मुंबई January 07, 2022

दूरसंचार क्षेत्र की प्रमुख कंपनी भारती एयरटेल ने कहा कि वह स्पेक्ट्रम और समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) की टाली गई देनदारियों पर ब्याज का भुगतान करेगी और इसके बदले सरकार को इक्विटी देने की उसकी मंशा नहीं है। कंपनी ने आज स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में कहा कि भारती एयरटेल ने दूरसंचार विभाग को सूचित किया है कि वह टाले गए स्पेक्ट्रम शुल्क और एजीआर बकाया भुगतान पर ब्याज को इक्विटी में बदलने का विकल्प नहीं चुनेगी। एयरटेल पर स्पेक्ट्रम और एजीआर मद में करीब 1 लाख करोड़ रुपये का बकाया है।

 
सरकार ने पिछले साल अक्टूबर में दूरसंचार कंपनियों की वित्तीय सेहत को ध्यान में रखते हुए कई उपायों की घोषणा की थी। इनमें स्पेक्ट्रम और एजीआर बकाया भुगतान पर चार साल की मॉरेटोरियम भी शामिल है। इसके साथ ही कंपनियों को यह विकल्प दिया गया है कि अगर वे टाली गई अवधि में बकाया राशि पर ब्याज का भुगतान करें या फिर ब्याज की राशि को इक्विटी में बदला जा सकता है। एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने चार साल के मॉरेटोरियम का लाभ उठाया है जबकि रिलायंस जियो ने इस सुविधा का लाभ नहीं लेने का निर्णय किया।
 
पिछले साल नवंबर में दूसरी तिमाही के नतीजों के मद्देनजर कॉन्फ्रेंस कॉल में वोडा आइडिया के मुख्य वित्त अधिकारी अक्षय मूंदड़ा ने कहा था कि देनदारियों पर ब्याज को इक्विटी में बदलने के विकल्प का कंपनी मूल्यांकन कर रही है। कंपनी को इस बारे में निर्णय करने के लिए 12 जनवरी तक का समय दिया गया है। स्पेक्ट्रम और एजीआर देनदारियों को टालने से एयरटेल को करीब 35,000 से 40,000 करोड़ रुपये बचत करने में मदद मिलेगी। वोडाफोन आइडिया इस मद में चार साल के दौरान करीब 60,000 करोड़ रुपये की फिलहाल बचत कर सकती है। कंपनियां इस रकम का इस्तेमाल नेटवर्क विस्तार, क्षमता में सुधार और 5जी स्पेक्ट्रम की खरीद में कर सकती हैं। पिछले महीने एयरटेल ने 128.4 मेगाहट्र्ज स्पेक्ट्रम का 2014 से लेकर अब तक का पूरा 15,519 करोड़ रुपये का बकाया चुका दिया है। कंपनी ने कहा कि इससे उसे ब्याज मद में करीब 3,400 करोड़ रुपये बचाने में मदद मिलेगी। हालांकि एयरटेल पर अभी भी स्पेक्ट्रम अधिग्रहण की करीब 74,500 करोड़ रुपये की देनदारी है। एजीआर बकाये की बात करें तो कंपनी ने 18,400 करोड़ रुपये चुका दिए हैं और उस पर करीब 25,000 करोड़ रुपये का बकाया है। 
 
रेटिंग एजेंसियों ने कहा कि ब्याज को इक्विटी में नहीं बदलने का एयरटेल का निर्णय उम्मीद के अनुरूप है। इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च में निदेशक-कॉर्पोरेट्स प्रशांत तरवाडी ने कहा, 'भारती एयरटेल के पास मॉरेटोरियम अवधि के ब्याज का भुगतान करने की सहूलियत है क्योंकि उसकी वित्तीय स्थिति मजबूत है और नकदी प्रवाह भी ठीक है। राइट इश्यू से कंपनी को जो पैसे मिले हैं उससे वह अन्य कारोबारी पहल जैसे कि 5जी आदि पर खर्च कर सकती है। अगर वह ब्याज को इक्विटी में बदलने का विकल्प चुनती भी तो उसे 2 फीसदी से भी कम शेयर देने होते।' फिच रेटिंग्स में वरिष्ठï निदेशक नितिन सोनी ने कहा, 'मेरा मानना है कि एजीआर और स्पेक्ट्रम बकाये के ब्याज को इक्विटी में बदलने का विकल्प वोडा आइडिया के लिए लक्षित था।' 
Keyword: airtel, moratorium, AGR, telecom,,
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