बिजनेस स्टैंडर्ड - तीसरी लहर की आहट से आपात मोड में उद्योग
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तीसरी लहर की आहट से आपात मोड में उद्योग

बीएस संवाददाता / मुंबई/बेंगलूरु/चेन्नई/कोलकाता/अहमदाबाद January 06, 2022

पहले 'देखो और इंतजार करो' की नीति पर चल रहा भारतीय उद्योग जगत अब कोविड और ओमीक्रोन के बढ़ते मामलों के मद्देनजर आपात स्थिति की तैयारी में जुट गया है। महामारी की तीसरी लहर को देखते हुए कामकाज को रिमोट और लचीला बनाने, सुरक्षा मानकों का पालन करने और केवल आवश्यक यात्रा की अनुमति की व्यवस्था फिर से लागू की जा रही है।   दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे महानगरों में ओमीक्रोन के मामले तेजी से बढऩे की वजह से लगभग सभी क्षेत्र की कंपनियां या तो पूरी तरह वर्क फ्रॉम होम मोड को अपना रही हैं या केवल आवश्यक संख्या में कर्मचारियों को चुनिंदा दिनों में कार्यालय बुला रही हैं। कई कंपनियों ने संक्रमण घटने के समय हाइब्रिड मॉडल अपनाया था लेकिन इस हफ्ते रिमोट से काम करना शुरू कर दिया है। 

 
कोविड के संक्रमण को देखते हुए आईटीसी ने इस हफ्ते से अपनी नीति में बदलाव किया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, मुंबई और कोलकाता के दफ्तर में यदि बहुत जरूरी हो तभी कर्मचारियों को बुलाने की अनुमति दी गई है। इसके साथ ही दफ्तर आने के लिए पूर्व अनुमति लेनी होगी। कंपनी हाइब्रिड मॉडल के तहत काम कर रही थी। अन्य शहरों के लिए आईटीसी ने बारी-बारी से 30 फीसदी कर्मचारियों को कार्यालय बुलाने की व्यवस्था की है, जिसे 50 फीसदी तक बढ़ाया जा सकता है।
 
अदाणी विल्मर के मुख्य कार्याधिकारी ए मलिक ने कहा कि कंपनी सरकार के दिशानिर्देशों के मुताबिक 50 फीसदी कर्मचारियों को ही दफ्तर बुला रही है। उन्होंने कहा, 'हमने महामारी की पिछली दो लहर से सीखा है कि आपूर्ति शृंखला प्रभावित हो सकती है, इसलिए हमने अतिरिक्त स्टॉक सुनिश्चित किया है ताकि आपूर्ति शृंखला और कारखाने पर कोई असर न पड़े और आवश्यक जिंसों की किल्लत भी न हो।' इस हफ्ते की शुरुआत में गोदरेज हाउसिंग फाइनैंस ने सभी टीमों को घर से काम करने को कहा। कंपनी ने हाइब्रिड कार्य मॉडल अपनाया था और अधिकांश टीमें बारी-बारी से 50 फीसदी क्षमता के हिसाब से कार्यालय आ रही थीं। लेकिन अब सेल्स टीम को भी पूरी तरह से घर से काम करने के लिए कह दिया गया है।
 
इसी तरह चेन्नई के श्रीराम समूह ने भी अपने आधे कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति देने का निर्णय किया है। पिछले महीने तक कंपनी के 75 फीसदी कर्मचारी दफ्तर आ रहे थे। श्रीराम समूह के एक प्रवक्ता ने कहा, 'हम अलग-अलग राज्य में वहां के नियमों के हिसाब से काम कर रहे हैं। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा कोविड के मामले हैं, इसलिए वहां ज्यादा कर्मचारियों को घर से काम करने की सहूलियत दी गई है जबकि हैदराबाद जैसे शहर में जहां संक्रमितों की संख्या कम है, वहां कम लोग ही घर से काम कर रहे हैं। हम हरेक 10 दिन में इसकी समीक्षा करते हैं।' 
 
तीसरी लहर व्यापक स्तर पर आती दिख रही है, ऐसे में रिलायंस इंडस्ट्रीज, महिंद्रा समूह, टाटा समूह और आदित्य बिड़ला समूह जैसे बड़े कारोबारी घराने अपने दफ्तरों में गिने-चुने लोगों को ही बुला रहे हैं और काम करने की लचीली नीति का पालन किया जा रहा है। ये कंपनियां इस महीने के अंत तक इस नीति को जारी रख सकती हैं। महिंद्रा समूह के एक कर्मचारी ने कहा कि हमारे यहां लचीली कार्य नीति है जिसमें कर्मचारियों को उनकी इच्छानुसार कहीं से भी काम करने की सहूलियत दी गई है, जिसे जारी रखा जाएगा।' टाटा मोटर्स के प्रवक्ता ने भी ऐसी ही राय जाहिर की। उन्होंने कहा कि हाइब्रिड मॉडल पर काम चल रहा है और जरूरत के मुताबिक सीमित संख्या में कर्मचारियों को बारी-बारी से कार्यालय बुलाया जाता है। कुछ जगहों पर कर्मचारियों को घर से काम करने की सलाह दी गई है। 
 
कार बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी मारुति सुजूकी ने अपने कर्मचारियों के बच्चों के लिए टीकाकरण शिविर लगाने की शुरुआत की है। कंपनी में कार्यकारी बोर्ड के सदस्य (एचआर, डीई, सेफ्टी एवं आईटी) राजेश उप्पल ने कहा, 'पूरे देश में कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण के बीच भारत सरकार के दिशानिर्देशानुसार हमने कर्मचारियों के 15-18 वर्ष के बच्चों के लिए टीकाकरण शिविर की शुरुआत की है। बूस्टर खुराक की जरूरत वाले कर्मचारियों के लिए भी शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।'
 
कुछ स्टार्टअप कंपनियां भी मौजूदा हालात में अपने कर्मचारियों की मदद के लिए सामने आई हैं। बेंगलूरु की ओकेक्रेडिट में चीफ ऑफ स्टाफ विशाल अमन गुमाडापू ने कहा,'मौजूदा अनिश्चितताओं को देखते हुए हमने अपने कर्मचारियों के स्वास्थ्य बीमा में इजाफा किया है। हमने इसके तहत बीमित रकम प्रति कर्मचारी बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी है।' देश में कोविड-19 संक्रमण के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है जिसे देखते हुए कंपनियों ने सतर्कता बरतना शुरू कर दिया है। देश में गुरुवार को संक्रमण के मामले बढ़कर 90,928 तक पहुंच गए। इस वर्ष की शुरुआत से अब तक इसमें चार गुना इजाफा हो गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार इनमें ज्यादातर मामले उन शहरों से आए हैं जहां कोविड-19 के स्वरूप डेल्टा की जगह ओमीक्रोन अधिक प्रबल हो गया है। 
 
लोकलसर्किल डॉट कॉम के एक ताजा सर्वेक्षण के अनुसार कोविड-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रत्येक तीन में दो लोग कार्यालय से निपटाए जाने वाले कार्य (डेस्क जॉब) घर से ही ही निपटाने पर जोर दे रहे हैं। इस बीच, ज्यादातर कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को केवल आवश्यक यात्राएं करने की हिदायत दी है। विनिर्माण क्षेत्र की कंपनियां भी सतर्क हो गई हैं और नए स्वास्थ्य दिशानिर्देश जारी कर रही हैं। ये कंपनियां उन कर्मचारियों का भी आरटीपीसीआर टेस्ट कर रही हैं जो कोविड-19 से बचाव की दोनों खुराक ले चुके हैं। 
 
वेदांत ग्रुप की मुख्य मानव संसाधन अधिकारी मधु श्रीवास्तव कहती हैं, 'हमने दो दिन पहले अपने अधिकारियों एवं कर्मचरियों को डिजिटल माध्यम से बैठकें करने की सलाह जारी की थी और जरूरी महसूस होने पर ही कार्यायल, संयंत्र या अन्यत्र मिलने के लिए कहा है।' भारती सीमेंट में निदेशक रविंदर रेड्डी ने कहा कि उनकी कंपनी ने संयंत्र और कार्यालय दोनों जगहों पर बाहरी लोगों के आने पर पाबंदी लगा दी है। हालांकि रेड्डी ने कहा कि कंपनी के कर्मचारी कार्यालय में पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'हम इस सप्ताह स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं और अगले सप्ताह यह निर्णय लेंगे कि कर्मचारियों को एक दिन छोड़कर एक दिन कार्यालय आने के लिए कहा जाए या पूरी तरह घर से काम करने की अनुमति दे दी जाए। हमारे सभी कर्मचारी कोविड-19 से बचाव के दोनों टीके ले चुके हैं।'
 
आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया ने अपने सभी विभाग प्रमुखों को उनके संबंधित विभागों के लोगों को घर से काम करने को प्रोत्साहित करने के लिए कहा है। कंपनी ने कहा कि विभाग प्रमुखों को किसी भी समय कार्यालय में 50 प्रतिशत उपस्थिति ही रखने की हिदायत दी गई है। कंपनी भी अपने कर्मचारियों को बूस्टर डोज और उनके बच्चों को पहली खुराक देने के लिए टीकाकरण शिविरों का आयोजन कर रही है। हालांकि दवा कंपनियां अपनी बिक्री टीम और मेडिकल रिप्रजेंटेटिव को घर से काम करने की अनुमति देने पर कोई निर्णय नहीं ले पाई है। दवा कंपनियां कारोबार के लिए कार्यालय से बाहर काम करने वाली अपनी बिक्री टीम पर काफी निर्भर रहती है। मुंबई की एक दवा कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'डॉक्टर पिछली बार की तरह इस बार मेडिकल रिप्रजेंटेटिव से मिलने से नहीं कतरा रहे हैं। इसकी वजह यह है कि ज्यादातर लोगों को लगता है कि ओमीक्रोन से सेहत पर खास असर नहीं होता है।' 
 
कोविड-19 महामारी के दौरान ज्यादातर कंपनियों ने चिकित्सकों से ऑनलाइन माध्यम से सलाह लेने के लिए मोबाइल ऐप्लिकेशन और अन्य दूसरे तरीके तैयार किए थे। मुंबई जैसे बड़े शहरों में अधिकांश कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को फिलहाल घर से काम करने के लिए कहा है। हालांकि कुछ कंपनियां अपने खास एवं जरूरी लोगों को कार्यालय बुला रही हैं। सन फार्मा ने अपने कर्मचारियों को इस महीने के अंत तक घर से काम करने के लिए कहा है और वह स्थिति की लगातार समीक्षा करती रहेगी। कंपनी दिसंबर में अपने कर्मचारियों को पांच दिन कार्यालय बुला रही थी। विमानन कंपनियां हालात को देखते हुए कर्मचारियों को नियमित रूप से कार्यालय बुलाने के बजाय उन्हें सप्ताह में कुछ दिन घर से काम करने के लिए कह रही हैं। 
 
(शैली सेठ मोहिले, दीपशेखर चौधरी, ईशिता आयान दत्त, शाइन जैकब, सोहिनी दास, अनीश फडणीस, शर्लिन डिसूजा, अदिति दिवेकर और विनय उमरजी) 
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