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अब 'शैडो बैंक' नहीं रही गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी

बैंकिंग साख
तमाल बंद्योपाध्याय /  January 04, 2022

बीते वर्ष के शुरू में एक बड़ी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के प्रमुख यह जानना चाहते थे कि आखिर समाचार माध्यमों में एनबीएफसी को 'शैडो बैंक' क्यों कहा जाता है। एक शैडो बैंक ऋण आवंटन के कारोबार में तो होते हैं मगर किसी नियामकीय निगरानी में नहीं आते हैं। शैडो बैंक का एक और आशय नियमित संस्थानों की अनियमित गतिविधियों से है।  पिछले वर्ष के अंत में एनबीएफसी के नियमन के लिए कई दिशानिर्देश बैंकिंग नियामक की तरफ से जारी किए  गए। एनबीएफसी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वैसे तो भारत में बैंकों की अगुआई वाली वित्तीय प्रणाली है मगर बैंक हमेशा ऋण आवंटित करने के लिए उत्साहित नहीं रहते हैं और प्रत्येक ग्राहक तक पहुंचना भी उनके लिए संभव नहीं है। 

 
पिछले कुछ वर्षों के दौरान एनबीएफसी क्षेत्र की छवि खराब हुई है इसलिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) इनमें सुधार और विश्वास बहाल करने के लिए प्रयास कर रहा है। जनवरी 2021 में आरबीआई के पास 9,507 एनबीएफसी पंजीकृत थीं। इनमें केवल 64 ग्राहकों से जमा रकम लेने की इजाजत थी। अब इनमें छह को जमा लेने से रोक दिया गया है। जमा रकम नहीं लेने वाली एनबीएफसी (कम से कम 500 करोड़ रुपये के ऋण खाते वाली) वित्तीय प्रणाली के लिहाज से महत्त्वपूर्ण मानी जाती हैं। इनकी ऋण परिसंपत्तियों में 83 प्रतिशत हिस्सेदारी है। उन्होंने मार्च 2021 तक 29.04 लाख करोड़ रुपये कर्ज के रूप में आवंटित किए थे। जमा लेने वाली एनबीएफसी का ऋण खाता 4.85 लाख करोड़ रुपये है। यह करीब 14.5 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है। शेष 2.3 प्रतिशत हिस्सेदारी जमा नहीं लेने वाली छोटी एनबीएफसी के पास है। इनकी संख्या अन्य दो श्रेणियों की एनबीएफसी की तुलना में अधिक है। वर्ष 2002 में शुरू की गई त्वरित सुधार कार्रवाई (पीसीए) अब बड़ी एनबीएफसी पर भी लागू होगी। वित्तीय आंकड़े एक निर्धारित सीमा से नीचे आने पर उनका परिचालन रोक दिया जाएगा। आरबीआई ने कारोबार-आधारित नियमन एवं आय की पहचान और परिसंपत्ति वर्गीकरण के लिए भी नियम तय किए हैं। इसके साथ ही सभी कर्जदाता संस्थानों में आवंटित ऋण के लिए प्रावधान (आवंटित ऋण के लिए बहीखाते से अलग रखी गई रकम) के उपाय भी एक जैसे किए जा रहे हैं। इन उपायों के साथ ही निगरानी एवं नियमन के लिहाज से एनबीएफसी अब लगभग बैंकों के बराबर हो गई हैं। जमा लेने और नहीं लेने वालीं एनबीएफसी के लिए पीसीए ढांचा 1 अक्टूबर, 2022 को प्रभाव में आ जाएगा। पीसीए 31 मार्च को या इसके बाद इन एनबीएफसी की वित्तीय स्थिति पर आधारित होगा।
 
पूंजी आवश्यकता, संचालन मानदंड आदि आधारित नियमन में आकार, गतिविधि एवं जोखिम की आशंका के आधार पर एनबीएफसी को चार श्रेणियों में विभक्त किया गया है। सबसे निचले स्तर पर 1,000 करोड़ रुपये से कम आकार वाली एनबीएफसी शामिल हैं। मझोले स्तर पर 1,000 करोड़ रुपये या इससे अधिक आकार वाली एनबीएफसी शामिल हैं। इससे ऊपर आरबीआई द्वारा तय शर्तों के अनुरूप कुछ खास एनबीएफसी रखी गई हैं। इस श्रेणी में परिसंपत्ति के आधार पर 10 एनबीएफसी हैं। शीर्ष स्तर पर फिलहाल खाली है। अगर आरबीआई को लगता है कि ऊपरी स्तर पर कुछ एनबीएफसी से वित्तीय प्रणाली को खतरा है तो उन्हें शीर्ष स्तर का हिस्सा बनाया जा सकता है। पीसीए ढांचे में जमा नहीं लेने वाली 1,000 करोड़ रुपये से कम आकार की एनबीएफसी, प्राइमरी डीलर, आवास वित्त कंपनियां और सरकार नियंत्रित कंपनियां हैं। तकनीकी तौर पर सभी एनबीएफसी इससे प्रभावित नहीं होंगी मगर आरबीआई किसी भी आकार की एनबीएफसी के खिलाफ कभी भी कोई भी कार्रवाई कर सकता है। 
 
आरबीआई ने एनबीएफसी के परिचालन पर नजर रखने के लिए तीन शर्तें एवं मानदंड तय किए हैं। पूंजी पर्याप्तता अनुपात, टीयर-1 कैपिटल और शुद्ध एनपीए अनुपात पर विशेष जोर दिया गया है। फंसे ऋणों के लिए तीन सीमाएं-6 प्रतिशत से 9 प्रतिशत, 9 प्रतिशत से 12 प्रतिशत और 12 प्रतिशत से ऊपर-तय की गई हैं। पहली निर्धारित शर्त तोडऩे के लिए पीसीए में रखी गई एनबीएफसी के लाभांश वितरण पर पाबंदी लगाई जा सकती है। प्रवर्तकों को पूंजी डालने के साथ ही कर्ज कम करने के लिए कहा जाएगा। अगर दूसरी शर्त का उल्लंघन होता है तो इसे नई शाखाएं खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। तीसरी शर्त का उल्लंघन होने पर तकनीकी सुधार के अलावा सभी पूंजीगत व्यय पर रोक होगी।
 
सभी खंडों में कर्जदाताओं के लिए एक समान आय की पहचान, परिसंपत्ति वर्गीकरण एवं प्रावधान संबंधी नियम कई एनबीएफसी कंपनियों का बहीखाता प्रभावित कर सकते हैं। अगर कोई ऋण समय पर भुगतान नहीं हो पाता है तो यह बकाया हो जाता है मगर कई एनबीएफसी ऋण समझौतों में इसका साफ तौर पर जिक्र नहीं करती हैं। इनका कहना है कि कुछ खंडों में कर्जधारकों की आय बड़ी कंपनियों से अलग होती है। लिहाजा अगर किसी कर्जधारक को 12 दिसंबर को ऋण भुगतान करना है मगर रकम बकाया रह जाती है तो कोई एनबीएफसी भुगतान पाने के लिए दिसंबर के अंत तक इंतजार कर सकती है। अगर ऋण का भुगतान 90 दिनों तक बकाया रहता है तो यह एनपीए में बदल जाता है। इस मामले में एनबीएफसी के कर्जधारक को 109 दिनों (90 दिन और दिसंबर की बची शेष अवधि का योग) का समय मिलेगा है। कर्जधारक भुगतान कर ऋण चूककर्ता कहलाने से बच सकता है। पूरी बकाया रकम का भुगतान होने पर कोई फंसा ऋण मानक ऋण बन सकता है। मगर एनबीएफसी द्वारा आवंटित ऋण के मामले में कर्जधारक ब्याज या आंशिक बकाये का भुगतान कर देता है तो भी वह ऋण मानक खाता मान लिया जाता है। अब आरबीआई चाहता है कि एनबीएफसी ऐसे ऋण खातों को तभी मानक घोषित करें जब पूरा बकाया ब्याज एवं मूलधन का भुगतान हो जाता है। नए नियमों के बाद फंसे कर्ज में इजाफा होना चाहिए मगर इससे किसी को शिकायत भी नहीं होनी चाहिए। एनबीएफसी अब शैडो बैंक नहीं रह गई हैं।
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