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नए साल के लिए मनोरंजन और मीडिया जगत की अच्छी खबरें

मीडिया मंत्र
वनिता कोहली-खांडेकर /  December 31, 2021

पिछले हफ्ते ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) पुनीत गोयनका काफी थके दिख रहे थे लेकिन उनके चेहरे पर प्रसन्नता भी थी। उन्होंने ज़ी और सोनी के विलय की बड़ी घोषणा की थी। ऑनलाइन बैठक में कैलिफोर्निया से सोनी पिक्चर्स एंटरटेनमेंट के ग्लोबल टेलीविजन स्टूडियोज और कॉरपोरेट डेवलपमेंट के अध्यक्ष रवि आहूजा और मुंबई के अपने दफ्तर से सोनी पिक्चर्स नेटवक्र्स इंडिया के प्रबंध निदेशक और सीईओ एन पी सिंह शामिल हुए। गोयनका ही इस विलय इकाई के प्रमुख होंगे और वह इसकी वृद्धि को ऐसे वक्त में बढ़ाने की कोशिश करेंगे जब मीडिया का पूरा तंत्र रफ्तार से बदल रहा है। विलय के चलते डिज्नी-स्टार, सोनी-ज़ी, फेसबुक, गूगल, जियो जैसी बराबरी वाली कंपनियों के लिए एक युद्धक्षेत्र जैसी स्थिति बनी है। यह काफी अच्छी बातचीत थी। तीनों ने डिज्नी-स्टार के बाद भारत की दूसरी सबसे बड़ी मीडिया कंपनी बनाने के लक्ष्य को पूरा किया था। अब इन कंपनियों में ग्राहकों और दर्शकों को लेकर संघर्ष छिड़ जाएगा।

भारत के मीडिया एवं मनोरंजन उद्योग का सबसे बड़ा हिस्सा, टेलीविजन प्रसारण 1.38 लाख करोड़ रुपये तक का है और यह करीब 17 फीसदी तक का योगदान देता है जबकि डिजिटल दूसरे पायदान पर है। भारत में करीब 90 करोड़ लोग टेलीविजन देख रहे हैं जबकि इस संख्या के करीब आधे लोग ओटीटी पर हैं। सभी प्रमुख प्रसारणकर्ताओं के पास स्ट्रीमिंग वीडियो ब्रांड का एक बड़ा हिस्सा है और इनमें से आधे ओटीटी पर देखे जाते हैं। इस उदासीन साल में सोनी-ज़ी की विलय अच्छी खबर का पहला भाग है। अर्थव्यवस्था में गिरावट के साथ ही बाकी जगहों पर मंदी की खबरों के बीच देश के मीडिया एवं मनोरंजन उद्योग को अपना एक-तिहाई राजस्व गंवाना पड़ा।

दूसरी अच्छी खबर इसकी वजह से भी आई। मीडिया खरीदार का कहना है कि 2021 की तीसरी तिमाही में विज्ञापन में सुधार की वजह यह रही कि मार्केटिंग कंपनी वाले टीवी और प्रिंट के संपर्क में आने लगे। 2019 में पिछले भारतीय पाठक सर्वेक्षण के बाद से पाठकों से जुड़ा कोई डेटा नहीं आया है। ज्यादातर अखबार अब अपने विज्ञापन की जगह 100 तक भर रहे हैं। दूसरी ओर टीवी में रेटिंग पर आधारित ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल डेटा 2020 में पूरे साल और 2021 की पहली छमाही तक उपलब्ध थे और विज्ञापन की तादाद तथा इसके मूल्य में गिरावट आई। ऐसे में विज्ञापन का समय और जगह अब क्यों बढ़ रहा है? मीडिया खरीद एजेंसी लोडेस्टार यूएम के महाप्रबंधक श्रीकांत शेनॉय ने कहा कि डिजिटल को वह सब कुछ साबित करने का मौका मिला जो कुछ भी यह साबित (दो लॉकडाउन के दौरान) करना चाहता था। यह (2021 की दूसरी छमाही) सत्यापन की अवधि (प्रिंट और टीवी के लिए) रही है। विज्ञापन का असर, 'कौन बनेगा करोड़पति', 'इंडियन प्रीमियर लीग' या 'दैनिक भास्कर' के पहले पन्ने पर आज भी दिखता है। जिस वक्त अखबारों की घरों में वापसी हो रही थी, नए टीवी शो और खेल प्रसारित किए जा रहे थे उसी वक्त विज्ञापनदाताओं की वापसी हुई। इस उभार से एक वास्तविकता सामने आई कि अब सभी डिजिटल चीजों के लिए आग्रह बढ़ गया है। डिजिटल के प्रति बढ़ता आग्रह, पारंपरिक मीडिया के बारे में संदेह बेवजह नहीं है। हमारे जीवन में इंटरनेट की सर्वव्यापकता महामारी से पहले भी स्पष्ट हो रही थी।  

इंटरनेट अब पूरी तरह से मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र के साथ एकीकृत हो गया है और यह टीवी, फिल्मों और संगीत का पूरक बन रहा है। यह मीडिया को दिए जाने वाले वक्त में इजाफा कर रहा है। आप समाचार, गाने, फिल्मों, शॉर्ट वीडियो या दोस्तों के साथ चैट करते हुए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। इसने संगीत कारोबार को बचाया है और इसने अपने उपयोगकर्ताओं के आधार को व्यापक करने के लिए टीवी के साथ हाथ मिलाया है और फिल्मों को रचनात्मक छूट देने में मदद की है। यह अच्छी खबर का तीसरा भाग है। डिजिटल ने भारत के मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र के लिए अपनी सबसे बड़ी ताकत का फायदा उठाने के लिए सुनहरा अवसर दिया है। चीन के विपरीत भारत में विदेशी फिल्मों, टीवी शो या अन्य सामग्री पर कोई कोटा या प्रतिबंध नहीं हैं। फिर भी 90 फीसदी मनोरंजन सामग्री की खपत स्थानीय स्तर पर होती है। हॉलीवुड के दबदबे वाली दुनिया में भारत का रचनात्मक कारोबार सौ साल से अधिक समय से अपना पांव जमाए खड़ा है। इसकी पुष्टि एक और तथ्य के साथ की जा सकती है। हर शो और फिल्म जिसकी मंजूरी नेटफ्लिक्स या एमेजॉन प्राइम वीडियो कमीशन या लाइसेंस के जरिये दी जाती है उसे एक ही वक्त पर 200 से अधिक देशों में दिखाया जाता है। अब तीन सालों से रीमिक्स, सेक्रेड गेम्स, लस्ट स्टोरीज जैसे भारतीय शो को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार एमी के लिए नामांकित किया गया। वर्ष 2020 में 'डेल्ही क्राइम' ने ऐसा ही एक पुरस्कार जीता था।

सोनी-ज़ी विलय के बावजूद वैश्विक मंच पर फेसबुक, गूगल या डिज्नी को चुनौती देने वाले पैमाने की कोई भारतीय कंपनी नहीं है। हमारे लिए एकमात्र मौका यही है कि ब्रिटेन या नीदरलैंड ने जैसा किया वैसा ही किया जाए। मसलन टेलीविजन की दुनिया, वेब सीरीज, शॉर्ट वीडियोज या यूट्यूब और दूसरे सभी माध्यम पर जहां इंटरनेट की मौजूदगी है वहां भारतीय कहानियों के साथ अपना दबदबा बनाया जाए। भारत को अपनी फिल्मों की ताकत का फायदा उठाना चाहिए।

मीडिया एवं मनोरंजन के लिए काफी कुछ बुरी खबरें भी हैं। महामारी के बने रहने का मतलब यह है कि सिनेमाहॉल में केवल आधी ही संख्या में दर्शकों को जाने की अनुमति मिल सकती है। ऐसे में मीडिया एवं मनोरंजन तंत्र के सभी हिस्से मसलन टीवी, रेडियो, म्यूजिक ओटीटी का पूरक बनने वाले सेगमेंट, फिल्म पर बुरा असर जारी रहेगा। फिल्म कारोबार को 2019 के स्तर पर वापसी करने में कम से कम तीन से पांच साल का समय लगेगा। लेकिन वर्ष की समाप्ति के इस पड़ाव पर अच्छी खबर के तीन भाग पर ध्यान देने से इस वापसी में और तेजी लाने में मदद मिल सकती है।

Keyword: मनोरंजन, मीडिया जगत, ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज, सोनी पिक्चर्स एंटरटेनमेंट,
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