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सीमित प्रगति

संपादकीय /  December 29, 2021

अनुमान था कि महामारी के कारण हुई आर्थिक उथलपुथल बैंकिंग क्षेत्र पर बहुत गहरा असर डालेगी। कोविड-19 वायरस का संक्रमण रोकने के लिए सन 2020 में देश में बहुत कड़े प्रावधानों वाला देशव्यापी लॉकडाउन लगाया गया था। संपूर्ण लॉकडाउन चरणबद्ध ढंग से हटाया गया लेकिन देश के कई हिस्सों में लंबे समय तक स्थानीय प्रतिबंध लागू रहे और उन्होंने कारोबार को प्रभावित किया। परिणामस्वरूप 2020-21 में सकल घरेलू उत्पाद में वास्तविक रूप से 7.3 फीसदी की कमी आई। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में महामारी की दूसरी लहर आई और आर्थिक गतिविधियां एक बार फिर प्रभावित हुईं। हालांकि बैंकिंग क्षेत्र पर प्रभाव सीमित रहा।

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रस्तुत 'देश में बैंकिंग की प्रगति एवं रुझान रिपोर्ट' के मुताबिक समस्त गैर निष्पादित परिसंपत्तियों (जीएनपीए) में 2019-20 में जो सुधार शुरू हुआ था वह 2020-21 में भी जारी रहा। इसी प्रकार बैंकिंग क्षेत्र के कुल अग्रिम में प्रतिशत के रूप में जीएनपीए 2019-20 के 8.2 फीसदी से घटकर 2020-21 में 7.3 फीसदी रह गया। आरंभिक आंकड़े बताते हैं कि सितंबर के अंत तक यह अनुपात और घटकर 6.9 फीसदी रह गया।

हालांकि आंकड़ों से संकेत मिलता है कि बैंकिंग क्षेत्र कठिन समय को झेल गया है लेकिन शीर्ष आंकड़े शायद नियामकीय लचीलेपन के कारण सही तस्वीर नहीं पेश कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि आंकड़े अधिक बारीक तस्वीर पेश करते हैं। ऋण वृद्धि धीमी बनी हुई है जिससे पता चलता है कि महामारी ने समेकित मांग को प्रभावित किया है। अन्य उपायों की बात करें तो आरबीआई ने कर्जदाताओं और कर्जदारों को राहत देने के लिए दो निस्तारण ढांचों की घोषणा की। इन उपायों के सामने आने के बाद बैंकों को आने वाली तिमाहियों में उच्च प्रोविजनिंग करनी पड़ सकती है। उन्हें कर्जदारों की कई श्रेणियों द्वारा महसूस किए जा रहे तनाव से निपटने के लिए और अधिक पूंजी की भी आवश्यकता हो सकती है। इसके अलावा जैसा कि आरबीआई ने रेखांकित किया जीएनपीए के कम होने का प्राथमिक स्रोत बीते कई वर्षों के दौरान दिए गए कर्ज को बट्टे खाते में डालना रहा। इससे संकेत मिलता है कि बैंकों को निरंतर नई पूंजी की आवश्यकता बनी रहेगी। वित्तीय प्रदर्शन के संदर्भ में गत वित्त वर्ष का मुनाफा बढ़ा क्योंकि व्यय में कमी आई। हालांकि ब्याज से होने वाली आय पर असर पड़ा लेकिन उच्च निवेश आय ने इसकी भरपाई कर दी। कारोबार से होने वाली आय भी बढ़ी क्योंकि बैंकों ने घटते बॉन्ड प्रतिफल का फायदा उठाया।

गत वित्त वर्ष में और चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में कुछ ऐसे कारक जो बैंकिंग क्षेत्र के पक्ष में गये लेकिन अब स्थितियां बदल सकती हैं। हालांकि परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार हुआ है लेकिन जीएनपीए अभी भी काफी अधिक है और जैसा कि हमने ऊपर कहा, अर्थव्यवस्था में तनाव को देखते हुए उसका स्तर बिगड़ भी सकता है। इसके अलावा निवेश और कारोबारी लाभ कुछ हद तक पलट सकते हैं क्योंकि बॉन्ड प्रतिफल सुधर रहा है। बैंकिंग क्षेत्र को फायदा मिला क्योंकि मौद्रिक और नकदी के हालात काफी समायोजन वाले रहे। हालांकि केंद्रीय बैंक नीतिगत समायोजन को समेट रहा है जिससे बॉन्ड प्रतिफल बढ़ा है। ऋण की मांग कमजोर बनी हुई है जो बैंकिंग क्षेत्र की आय के प्रमुख स्रोत को प्रभावित करेगी। गैर वित्तीय निजी क्षेत्र बीते कुछ वर्षों से विशुद्ध स्तर पर बचत कर रहा है। यानी अगर निवेश की मांग कुछ हद तक सुधरती भी है तो ऋण की मांग में बहुत इजाफा नहीं होगा। कोविड वायरस का नया स्वरूप आने के बाद अनिश्चितता बढ़ रही है और राज्यों ने सार्वजनिक गतिविधियों को सीमित करना शुरू कर दिया है। आर्थिक सुधार को एक और झटका लगा तो दबाव बढ़ेगा और बैंकिंग क्षेत्र पर विपरीत असर होगा।

Keyword: सीमित प्रगति, आर्थिक उथलपुथल, बैंकिंग क्षेत्र, लॉकडाउन, प्रतिबंध,
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