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उतारचढ़ाव से सार्वजनिक निर्गम पर पड़ेगा असर

सुंदर सेतुरामन और ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई December 26, 2021

अमेरिका में संभावित ब्याज दर वृद्घि और उसकी वजह से घरेलू सेकंडरी बाजार में अनिश्चितता से वर्ष 2022 में 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) प्रवाह प्रभावित हो सकता है।

वर्ष 2022 में आईपीओ की संभावनाएं मजबूत दिख रही हैं और करीब 35 कंपनियां 50,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए बाजार नियामक सेबी की मंजूरी हासिल कर चुकी हैं। अन्य 33 कंपनियां अगले वर्ष करीब 60,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए नियामक की मंजूरी का इंतजार कर रही हैं। करीब 1 लाख करोड़ रुपये के एलआईसी आईपीओ को अगले साल लाया जा सकता है। वर्ष 2021 में 63 कंपनियों ने आईपीओ के जरिये 1.19 लाख करोड़ रुपये जुटाए।

यदि इन सभी आईपीओ की बात की जाए तो अगला कैलेंडर वर्ष कोष उगाही के संदर्भ में रिकॉर्ड तोडऩे वाला वर्ष होगा।  

लेकिन बैंकर केंद्रीय बैंकों (वैश्विक और भारत में, दोनों के संदर्भ में) द्वारा सख्त मौद्रिक नीति को लेकर सतर्क बने हुए हैं। बैंकरों का कहना है कि यदि अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ीं तो विदेशी निवेशकों से पूंजी प्रभावित हो सकती है।

कोटक इन्वेस्टमेंट बैंकिंग के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी एस रमेश ने कहा, 'सामान्यतया, 2021 के मुकाबले, हमें उतार-चढ़ाव और अगले साल समाचार-आधारित बाजार धारणा की उम्मीद है।' इक्विटी कैपिटल मार्केट्स (ईसीएम), इक्विरस के प्रबंध निदेशक एवं प्रमुख एस वेंकटराघवन ने कहा कि बढ़ती वैश्विक ब्याज दरों के साथ साथ घरेलू ब्याज दरें भी बढ़ेंगी।

उन्होंने कहा, 'हालांकि, घरेलू तरलता मजबूत बनी रहेगी। लेकिन नए क्षेत्रों में आईपीओ या खास कंपनियों में अच्छी दिलचस्पी बनी रहेगी।' हालांकि बैंकरों का कहना है कि यदि अगले साल उतार-चढ़ाव बढ़ता है तो मूल्य निर्धारण प्रभावित हो सकता है।

एस रमेश ने कहा, 'जब उचित स्तर की अस्थिरता हो तो हमें मूल्य निर्धारण को लेकर सतर्क रहना होगा। हमारा मानना है कि ईसीएम (इक्विटी पूंजी बाजार) गतिविधि अगले साल मजबूत होगी। लेकिन जब बाजार में उतार-चढ़ाव हो तो निवेशकों को कीमतों में जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। तरलता इस पर निर्भर करेगी कि मूल्य निर्धारण की रफ्तार कैसी रहती है।'

ओमिक्रॉन वैरिएंट का प्रसार अन्य महत्वपूर्ण कारक है जिससे आईपीओ प्रवाह प्रभावित हो सकता है। हालांकि पिछली दो कोविड लहर का उदाहरण दे रहे बैंकरों का कहना है कि बाजार बड़ी अस्थिरता के बाद स्थिर हो सकता है।

आईपीओ रुझानों पर अपनी रिपोर्ट में ईवाई ने कहा कि कंपनियों को बड़ी बाजार अनिश्चितता की आशंका है, जिससे उनकी आईपीओ योजनाएं प्रभावित होंगी। रिपोर्ट में कहा गया है, 'लेनदेन संबंधित उतार-चढ़ाव और वित्तीय ज रूरतों को पूरा करने के लिए प्लान बी आईपीओ में लेनदेन में किसी तरह के विलंब से संबंधित नुकसान की पूर्ति के लिए जरूरी होगा।'

पेटीएम की कमजोर सूचीबद्घता के बाद खासकर नुकसान में चल रहे यूनिकॉर्न के लिए महंगे मूल्यांकन को लेकर चिंता बनी हुई है। प्राइम डेटाबेस के प्रबंध निदेशक प्रणव हल्दिया का कहना है कि आईपीओ की कीमतों की सफलता के संदर्भ में यह बैंकरों और कंपनियों के हित में है।

हल्दिया ने कहा, 'इसके अलावा, भारत में हालात को देखते हुए, कई कंपनियों पर ऐसे प्रवर्तकों का नियंत्रण है जिनकी आईपीओ के बाद भी अपनी कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी बनी हुई है और उनकी पूंजी आईपीओ के प्रदर्शन के बाद किसी अन्य निवेशक के मुकाबले शेयर से ज्यादा संबंधित है।'

विश्लेषकों का कहना है कि शुल्क में इजाफा हो सकता है क्योंकि यूनिकॉर्न वर्ष 2022 में बाजार में संभावनाएं तलाशेंगे। हल्दिया ने कहा, 'इन कंपनियों ने पारंपरिक क्षेत्रों के मुकाबले शुल्क के ऊंचे प्रतिशत का भुगतान किया है।'

बैंकरों का कहना है कि इस साल पूर्ववर्ती वर्षों के मुकाबले ज्यादा मात्रा में ताजा पूंजी जुटाई गई है, और यदि कई और नए जमाने की कंपनियां (यूनिकॉर्न) बाजार में आती हैं, तो यह रुझान बना रहेगा।

आईपीओ के सेक्टोरल घटक के संदर्भ में बैंकरों का कहना है कि वर्ष 2021 की तरह स्पिलिट अलग अलग क्षेत्रों में वितरित किया जा सकेगा। कोटक इन्वेस्टमेंट बैंकिंग द्वारा ट्रेंड्स ऐंड आउटलुक 2022 रिपोर्ट के अनुसार, 'आईपीओ गतिविधि पर नए टेक, एफआईजी (वित्तीय संस्थान समूह), हेल्थकेयर, उपभोक्ता, रियल एस्टेट और स्पेशियलिटी केमिकल्स का दबदबा रहने की संभावना है।'

Keyword: उतारचढ़ाव, सार्वजनिक निर्गम,
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