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भारत का कपड़ा व परिधान निर्यात कोविड पूर्व स्तर के ऊपर

शाइन जैकब / चेन्नई December 26, 2021

चीन प्लस वन नीति से समर्थन पाकर चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से नवंबर के बीच भारत का कपड़ा एवं परिधान निर्यात 53 प्रतिशत बढ़ा है। यह 2020-21 की समान अवधि में हुए 17 अरब डॉलर निर्यात की तुलना में इस वित्त वर्ष में बढ़कर 26 अरब डॉलर हो गया है।

वजीर टेक्सटाइल इंडेक्स के मुताबिक चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान वेलस्पन, वर्धमान, ट्राइडेंट, केपीआर मिल्स, इंडो काउंट, आरएसडब्ल्यूएम, फिलाटेक्स, नाहर एसपीजी और इंडोरामा सहित सभी प्रमुख कंपनियों के निर्यात के आंकड़े महामारी के पहले किए गए निर्यात के आंकड़ों से आगे निकल चुके हैं। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में वेलस्पन जैसे बड़े कारोबारियों ने कोविड के पहले की तुलना में  18 प्रतिशत, वर्धमान ने करीब 26 प्रतिशत और ट्राइडेंट ने 16 प्रतिशत वृद्धि दर दर्ज की है।

अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (एईपीसी) के चेयरमैन ए शक्तिवेल ने कहा, 'अगर इस साल पहली छमाही में शिपिंग का संकट और कोरोना का असर नहीं रहा होता तो आंकड़े और बेहतर होते। हमें उम्मीद है कि इस वित्त वर्ष के अंत तक टेक्सटाइल और अपैरल का निर्यात 45 अरब डॉलर के आंकड़े को छू जाएगा।'

कॉन्फेडरेशन आफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (सीआईटीआई) के पास उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इस सेग्मेंट में सभी जिंसों का निर्यात, जिसमें कॉटन यार्न, फैब्रिक्स, मेड-अप्स, हैंडलूम उत्पाद, मानव निर्मित यार्न, जूट, टेक्सटाइल और अपैरल शामिल है, 2021-22 के अप्रैल नवंबर के दौरान 263 अरब डॉलर रहा है। यह 2020-21 की समान अवधि में हुए 174 अरब डॉलर निर्यात की तुलना में 51 प्रतिशत ज्यादा है। इस अवधि के दौरान इस क्षेत्र ने कुल निर्यात में 9.9 प्रतिशत हिस्सेदारी की है।

तमिलनाडु स्पिनिंग मिल्स एसोसिएशन (तस्मा) के सलाहकार के वेंकटचलम ने कहा, 'इस तेजी की प्रमुख वजह चीन प्लस वन नीति और भारत को लेकर वैश्विक धारणा बेहतर होना है। हालांकि बांग्लादेश और कंबोडिया जैसे देश कुछ देशों को शुल्क छूट दे रहे हैं, भारत के उत्पादों की गुणवत्ता कुछ ऐसी है, जिसकी वजह से हमारे उत्पाद खरीदने वाले बढ़ रहे हैं।'

इस महीने की शुरुआत में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपने बुलेटिन में प्रकाशित एक लेख में यूरोप और अमेरिका जैसे प्रमुख देशों के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौतों में प्रवेश करने की वकालत की थी, जिससे कि अपैरल सेग्मेंट को बढ़ावा मिल सके और यह बांग्लादेश व  कंबोडिया से प्रतिस्पर्धा कर सके। इसमें कहा गया था कि बांग्लादेश, वियतनाम और कंबोडिया जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा के कारण यूरोपीय संघ में पिछले एक दशक में स्थिरता रही है।

तिरुपुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (टीईए) के अध्यक्ष एम षडमुगम ने कहा, 'वास्तविक तेजी मात्रा के हिसाब से नहीं हो रही है, यह इसलिए हो रही है क्योंकि अर्थव्यवस्था बदली है। हमने देखा है कि यार्न, डाई और केमिकल्स की कीमतों में 40-50 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है।

इसके कारण कागजों में कारोबार शानदार दिख रहा है।' तिरुपुर को भारत के टेक्सटाइल विनिर्माण का केंद्र माना जाता है, जहां कारोबार 2019-20 के 27,500 करोड़ रुपये  से घटकर 2020-21 में 25,000 करोड़ रुपये रह गया है। टीईए को उम्मीद है कि इस वित्त वर्ष में कारोबार बढ़कर 33,000 करोड़ रुपये पहुंच जाएगा।

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