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शी चिनफिंग के राजनीतिक भविष्य का नया खाका

श्याम सरन /  December 24, 2021

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की 20वीं कांग्रेस अगले वर्ष के उत्तराद्र्ध में होने वाली है। कांग्रेस ही यह तय करेगी कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग को पांच वर्ष का एक और कार्यकाल मिलेगा या नहीं। कई अन्य शीर्ष नेता भी सेवानिवृत्त होने वाले हैं और अनुमान है कि शी चिनफिंग अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए उनके स्थानापन्न नेता अपने ही खेमे से लाएंगे। वह नहीं चाहते कि कोई राजनीतिक या आर्थिक संकट कांग्रेस की सहज गतिविधियों को बाधित करे और उनके पद पर बने रहने की की कोशिश को जटिल बनाए।

पेइचिंग में 8 से 10 दिसंबर तक आयोजित सालाना सेंट्रल इकनॉमिक वर्क कॉन्फ्रेंस के नतीजों का आकलन करते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। सालाना कॉन्फ्रेंस ही देश के आर्थिक प्रबंधकों के लिए समग्र नीतिगत निर्देशन तैयार करती है जो पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत होता है। इस वर्ष की कॉन्फ्रेंस महत्त्वपूर्ण थी क्योंकि यह चीन की 14वीं पंचवर्षीय योजना के क्रियान्वयन का पहला वर्ष है।

रिपोर्ट में ध्यान देने लायक बात है 'सन 2022 में वृहद आर्थिक स्थिरता को बरकरार रखना'। रिपोर्ट में इसे स्पष्ट रूप से 20वीं पार्टी कांग्रेस के आयोजन से जोड़ते हुए कहा गया  है, 'बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि 20वीं पार्टी कांग्रेस अगले वर्ष आयोजित की जाएगी। यह पार्टी और देश के राजनीतिक जीवन में एक बड़ी घटना है। ऐसे में हमें एक स्थिर और स्वस्थ आर्थिक माहौल, एक शांतिपूर्ण और सुरक्षित सामाजिक माहौल और एक स्वच्छ तथा समुचित राजनीतिक माहौल बनाए रखना होगा।'

अब तक हासिल विभिन्न आर्थिक विफलताओं की सराहना करते हुए रिपोर्ट में विभिन्न दबावों और जोखिमों का भी उल्लेख किया गया है जिनसे निपटा जाना है। ये हैं घटती मांग, आपूर्ति के झटके तथा भविष्य की वृद्धि का कमजोर परिदृश्य। घरेलू मांग धीमी है क्योंकि जैसा कि चीन विश्लेषक माइकल पेटिस ने कहा, चीन के परिवार जीडीपी के करीब 55 फीसदी के लिए उत्तरदायी हैं जबकि पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं में यह आंकड़ा 70-80 प्रतिशत है। सरकार की हिस्सेदारी बहुत अधिक रही है और उसने बुनियादी रूप से अधोसंरचना निर्माण अथवा विनिर्माण को वित्तीय मदद देने में खर्च किया है, बजाय कि सामाजिक सेवा अथवा कल्याण पर व्यय बढ़ाने के। जैसा कि प्रोफेसर पेटिस ने कहा आम परिवारों की आय और घरेलू खपत बढ़ाने का सबसे आसान तरीका यही होगा कि वेतन बढ़ाया जाए लेकिन चीन की सरकार इसका प्रतिरोध कर रही है।

शी इसका उत्तर साझा समृद्धि के विचार से देेते हैं जिसके तहत सामाजिक कल्याण पर व्यय बढ़ाकर आय का अमीरों से गरीबों की ओर पुनर्वितरण करना तथा अमीर कंपनियों तथा उद्यमियों द्वारा परोपकार को बढ़ावा देना शामिल हैं। कॉन्फ्रेंस के दस्तावेज में भी साझा समृद्धि के लक्ष्य को दोहराया गया लेकिन यह देखना दिलचस्प है कि एक स्पष्टीकरण देकर कहा गया कि इरादा यह नहीं है कि अमीरों से संपत्ति लेकर गरीबों को दी जाए बल्कि संपत्ति इतनी अधिक होगी कि सबको पर्याप्त हिस्सा मिलेगा। इससे भी अहम बात यह है कि पुनर्वितरण को एक लंबी ऐतिहासिक प्रक्रिया बताया गया। ऐसे में लगता नहीं कि इस दिशा में कोई बड़ा कदम देखने को मिलेगा। प्रस्तावित संपत्ति कर को एक बार फिर टाला जा सकता है।

आपूर्ति क्षेत्र के झटकों से निपटने के लिए कॉन्फ्रेंस ने कहा कि घरेलू अर्थव्यवस्था में आपूर्ति क्षेत्र की बाधाओं को दूर किया जाए तथा घरेलू वितरण की दिक्कतों को चिह्नित किया जाए। इसके अलावा लॉजिस्टिक्स नेटवर्क सुधारने की बात भी कही गई।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी तथा बाह्य आर्थिक हालात माहौल की जटिलता के कारण उत्पन्न अनिश्चितता के चलते अर्थव्यवस्था का परिदृश्य नकारात्मक है। कहा गया है कि दुनिया में ऐसे बदलाव आ रहे हैं जो गत एक सदी से नहीं देखे गए हैं। इस बाहरी जटिलता और अनिश्चितता का अर्थ यह भी है कि चीन को और अधिक आत्मनिर्भर होना होगा। हालांकि रिपोर्ट में 2022 की जीडीपी वृद्धि के लिए कोई लक्ष्य नहीं तय किया गया है। जानकारी के अनुसार चीन की सामाजिक विज्ञान अकादमी ने कहा है कि अगले वर्ष चीन 5.35 फीसदी की दर से वृद्धि हासिल करेगा। शायद चीन के नेता धीमी वृद्धि के लिए जनमत तैयार करने का प्रयास कर रहा है।

चीन का संपत्ति और उससे संबद्ध क्षेत्र उसकी जीडीपी वृद्धि में 28 फीसदी का योगदान करता है लेकिन इन दिनों देश की सबसे बड़ी प्रॉपर्टी कंपनी एवरगैंड के लगातार डिफॉल्ट के कारण यह क्षेत्र दबाव में है। परिसंपत्ति क्षेत्र की अन्य कंपनियां भी दबाव में हैं। वहां प्रॉपर्टी का बुलबुला फूट सकता है जिससे बड़ा आर्थिक संकट उत्पन्न हो सकता है। क्या दस्तावेज यह सुझाते हैं कि अतीत की तरह सरकार जोखिम से उबारने की कोई योजना पेश कर सकती है?

चीन के निजी उपक्रम भी आने वाले वर्षों में दबाव में रहेंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रशासन निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा की नीतियों के क्रियान्वयन पर जोर देगा और एकाधिकार के खिलाफ कार्रवाई करेगा। उसने पूंजी के असंगत विस्तार को रोकने के लिए टै्रफिक लाइट की अवधारणा पेश की है। कॉन्फ्रेंस को लेकर की गई टीका में संकेत दिया गया कि इसके पीछे विचार है प्लेटफॉर्म इकनॉमी, ऑनलाइन गेमिंग और शिक्षण सेवाओं का नियमन करना। यानी अलीबाबा, वीबो और टेनसेंट जैसे टेक प्लेटफॉर्म पर दबाव जारी रह सकता है। निजी क्षेत्र के कड़े नियमन के बीच कॉन्फ्रेंस में सरकारी क्षेत्र को मजबूत बनाने और उसके विकास के लिए काम करने का आह्वान किया गया है। शी चिनफिंग पहले ही कह चुके हैं कि समाजवादी बाजार अर्थव्यवस्था में सरकारी उपक्रमों को अहम भूमिका निभानी चाहिए।

कॉन्फ्रेंस में जहां 2022 में वृहद आर्थिक स्थिरता पर जोर देने की बात कही गई, वहीं कुछ नीतिगत उपाय ऐसे हैं जो शी की नई आर्थिक दिशा में क्रियान्वयन के दौरान जोखिम उठाने का सुझाव देते हैं। संकटग्रस्त प्रॉपर्टी कंपनियों को उबारने से इनकार में इसे महसूस किया जा सकता है।

चीन की अर्थव्यवस्था में कौन से रुझान उभर सकते हैं? वह कमजोर पड़ रही है। चीन के विश्लेषक भी 14वीं पंचवर्षीय योजना के तहत अधिकतम 4.5 से 5 फीसदी वृद्धि का अनुमान जता रहे हैं।

अर्थव्यवस्था अधिक घरेलू केंद्रित हो सकती है। यदि महामारी लंबी खिंचती है तो यह सिलसिला और स्पष्ट हो जाएगा। चीन इस बात से अवगत है कि आबादी की बढ़ती आयु तथा विनिर्माण क्षेत्र की घटती प्रतिस्पर्धा उसके प्रतिकूल हैं। वह तकनीकी नवाचार पर ध्यान दे रहा है। इन तमाम बातों के बीच अभी यह स्पष्ट नहीं है कि चीन के नेता वहां उभरते विरोधाभासों से कैसे निपटेंगे।

(लेखक पूर्व विदेश सचिव और सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के सीनियर फेलो हैं)

Keyword: शी चिनफिंग, चीन, कम्युनिस्ट पार्टी, सीपीसी, आर्थिक संकट,
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