बिजनेस स्टैंडर्ड - टोकन विधि की समयसीमा बढ़ाई
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टोकन विधि की समयसीमा बढ़ाई

अनूप रॉय / मुंबई December 23, 2021

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गुरुवार को व्यापारिक वेबसाइटों से कार्ड का डेटा (कार्ड का विवरण) हटाने तथा टोकन विधि लागू करने की अवधि छह महीने बढ़ा दी। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि व्यापारियों और भुगतान कंपनियों ने 31 दिसंबर की समय सीमा का पालन करने में असमर्थता जताई थी। केंद्रीय बैंक ने अपनी वेबसाइट पर बयान जारी करके कहा कि 'उद्योग के अंशधारकों के अनुरोध पर' समय सीमा 30 जून, 2022 तक बढ़ा दी गई है।

इस तारीख के बाद सभी कार्ड के आंकड़ों को 'हटाना होगा।' टोकन विधि लागू करने के अलावा उद्योग जगत के अंशधारकों को बारंबारता वाले वाले ई-मैंडेट, समान मासिक किस्तों (ईएमआई) के विकल्प आदि से निपटने के लिए अथवा लेनदेन के बाद की किसी भी ऐसी गतिविधि के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनानी होगी जिसमें अभी कार्ड जारीकर्ता या कार्ड नेटवर्क के अलावा कहीं और कार्ड की जानकारी एकत्रित होती है। केंद्रीय बैंक ने सबसे पहले 17 मार्च, 2020 को कहा था कि 30 जून, 2021 से व्यापारिक वेबसाइट और भुगतान कंपनियों को ग्राहकों के कार्ड की जानकारी अपने पास रखना बंद करना होगा। व्यापारियों और भुगतान प्लेटफॉर्म तथा कार्ड कंपनियों एवं बैंकों के अनुरोध पर इस समय सीमा को 31 दिसंबर, 2021 तक बढ़ा दिया गया। ग्राहकों की असुविधा दूर करने के लिए केंद्रीय बैंक ने इस वर्ष 7 सितंबर को कार्ड ऑन फाइल टोकनाइजेशन की शुरुआत की।

टोकनाइजेशन यानी टोकन विधि लागू करने से तात्पर्य ऐसी तकनीक से है जो कार्ड की संवेदनशील जानकारी को यादृच्छिक अंकों से प्रतिस्थापित करती है। व्यापारिक वेबसाइटों को यही यादृच्छिक अंक मिलते हैं जबकि पूरी प्रक्रिया को कार्ड जारी करने वाला बैंक या वीजा, मास्टरकार्ड अथवा रुपे जैसी कार्ड कंपनी पूरा करती हैं। सीओएफटी के अंतर्गत कार्ड की जानकारी व्यापारिक वेबसाइट पर इस तरह दर्ज होती है कि मूलभूत जानकारी कार्ड कंपनी या जारीकर्ता बैंक के पास रहती है न कि वेबसाइट के पास। कार्ड टोकन विधि लागू करने की समयसीमा तय होने से भुगतान उद्योग के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी क्योंकि सभी बैंकों अथवा भुगतान कंपनियों के पास जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार नहीं था। इतना ही नहीं ज्यादातर कारोबारी और यहां तक कि बैंक भी समय पर नई व्यवस्था अपनाने के लिए तैयार नहीं थे। खबरों के मुताबिक भुगतान उद्योग व्यवस्थित तरीके से बदलाव करने के लिए दो वर्ष का समय चाहता था।

इस समाचार पत्र ने इसी सप्ताह ऐक्सिस बैंक के कार्यकारी उपाध्यक्ष और प्रमुख (कार्ड एवं भुगतान) संजीव मोघे के हवाले से कहा था कि कुछ कारोबारियों ने टोकन विधि लागू करने की तैयारी कर ली है जबकि अन्य इस वर्ष के अंत तक जरूरी तैयारी कर लेंगे। हालांकि भारतीय भुगतान परिषद के चेयरमैन और इन्फीबीम अवेन्यू के निदेशक विश्वास पटेल ने कहा था कि कुछ कार्ड जारीकर्ता बैंक तैयार नहीं हैं और कारोबारी भी समय ले रहे हैं। ऐसे में 1 जनवरी, 2022 से नई व्यवस्था लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

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